- 8 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने किया नीति आयोग की बैठक का बहिष्कार,इन सब पर जम कर बरसे भाजपा नेता
- आयोग के बैठक में विकसित भारत बनाने पर दिया गया जोर
नई दिल्ली 27 मई 2023। पीएम मोदी ने राजधानी दिल्ली में चल रही नीति आयोग की बैठक की अध्यक्षता की. नीति आयोग ने इसकी गवर्निंग काउंसिल की बैठक के दौरान नागरिकों से विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में काम करने के लिए कहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक भारत को वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.
नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बीवीआर सुब्रमण्यम ने कहा कि पीएम मोदी ने अपने संबोधन के दौरान इस बात पर जोर दिया कि चुकि इस बैठक की थीम विकसित भारत है, इसलिए सिर्फ राष्ट्रीय स्तर के लिए ही विजन तय किया जाए ये जरूरी नहीं है. अगर हमें इस लक्ष्य को हासिल करना है तो हमें राज्य और जिला स्तर के लिए भी सोचना होगा.
गौरतलब है कि इस बैठक में कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों के नहीं पहुंचने को लेकर बीजेपी ने कड़ा ऐतराज जताया. पार्टी की तरफ से वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा कि जो मुख्यमंत्री नीति आयोग की बैठक में गैर हाजिर रहे हैं वो गैर-जिम्मेदार और जनता विरोधी हैं. नीति आयोग की इस बैठक में पीएम मोदी 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य, कौशल विकास, महिला सशक्तिकरण और बुनियादी ढांचे के विकास से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की।
बैठक के लिए 100 से ज्यादा मुद्दे तक किए गए रविशंकर प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि नीति आयोग की बैठक देश के विकास के लिए बेहद जरूरी है. इस बैठक में देश के विकास के लिए ऑब्जेक्टिव्स, फ्रेमवर्क और रोड मैप तैयार किया जाता है. नीति आयोग की आठवीं बैठक के लिए 100 से ज्यादा मुद्दे तक किए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद भी आठ राज्यों के मुख्यमंत्री इस बैठक में नहीं आए।
सीएम केजरीवाल,भगवंत मान
और ममता नहीं आईं
बता दें कि जिन मुख्यमंत्रियों ने इस बैठक से दूरी बनाई है उनमें खास तौर पर अरविंद केजरीवाल, भगवंत मान और ममता बनर्जी शामिल हैं. रविशंकर प्रसाद ने कहा कि जिस बैठक में 100 से ज्यादा मुद्दों पर चर्चा होनी हो, उस बैठक में ये मुख्यमंत्री क्यों नहीं आए. अगर इतनी बड़ी संख्या में मुख्यमंत्री इतनी बैठक से दूर रहेंगे तो वो अपने राज्य के लोगों की बात को केंद्र तक कैसे पहुंचा पाएंगे।
ये बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण, गैर-जिम्मेदाराना और आम जनता के खिलाफ है. ये लोग पीएम मोदी के विरोध में आखिर कहां तक जाएंगे. आपको (सीएम जो बैठक में नहीं आए) पीएम मोदी के विरोध करने के कई मौके मिलेंगे लेकिन इस वजह से अपने राज्य की जनता का नुकसान क्यों कर रहे हैं.
8 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने
किया नीति आयोग की
बैठक का बहिष्कार
प्रगति मैदान में आयोजित नीति आयोग की आठवीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक का 8 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने बहिष्कार किया। इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों के इस फैसले पर भाजपा ने जमकर निशाना साधा। शनिवार को प्रेसवार्ता में भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि विपक्षी नेता मोदी विरोध के चलते राज्य की जनता का नुकसान करने पर लगे हैं।
भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि इस बैठक में 100 से अधिक मुद्दों पर चर्चा हो रही है और इस अहम बैठक में मुख्यमंत्रियों का भाग नहीं लेना सीधा सीधा जनता को नुकसान पहुंचाएगा। उन्होंने कहा कि नीति आयोग राज्यों की सक्रिय भागीदारी के साथ राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं, क्षेत्रों और रणनीतियों की साझा दृष्टि विकसित करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है। नीति आयोग पूरे देश के विकास के लिए संपूर्ण नीति-ढांचे और रोड मैप का निर्धारण करता है।
रविशंकर प्रसाद ने विपक्ष से सवाल पूछते हुए कहा कि नीति आयोग की इस बैठक के लिए 100 मुद्दे तय किए गए हैं, अब जो मुख्यमंत्री नहीं आए हैं, वो अपने प्रदेश की जनता की आवाज यहां तक नहीं ला रहे हैं। क्या उन लोगों को लाभ नहीं मिलना चाहिए? मोदी विरोध में विपक्ष कहां तक जाएंगा?
नीति आयोग की बैठक के बाद सीएम धामी ने दिया बड़ा बयान
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी नीति आयोग गर्वनिंग बॉडी की बैठक में भाग लेने के लिए नई दिल्ली पहुंच गए हैं। उन्होंने बैठक में राज्य में सालभर में आने वाली करीब सात करोड़ अस्थाई आबादी के लिए सुविधाएं जुटाने का मुद्दा उठाने के संकेत दिए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां प्रतिकूल होने के नाते नीति आयोग से राज्य के लिए अलग से व्यवस्था करने की मांग करेंगे।
मुख्यमंत्री ने नई दिल्ली में मीडियाकर्मियों से बातचीत में कहा कि नीति आयोग की बैठक में सरकार के विकास का रोडमैप साझा करेंगे। साथ ही उनका यह बात रखने का प्रयास होगा कि उत्तराखंड में पर्यटन, तीर्थांटन, कांवड यात्रा व अन्य प्रयोजन से साल भर करोड़ों लोगों का आना-जाना लगा रहता है।
राज्य सरकार को अपनी एक करोड़ से कुछ अधिक की आबादी के साथ साल भर करीब सात करोड़ अस्थाई आबादी के लिए सुविधाएं और संसाधन जुटाने पड़ते हैं। वे इस व्यवस्था के लिए केंद्र से सहयोग की मांग करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की अपनी भौगोलिक कठिनाइयां हैं। यहां विकास कार्यों की लागत अधिक आती है। वह नीति आयोग से इसके लिए भी अलग से व्यवस्था की मांग उठाएंगे।