–रवि सिंह-
मनेन्द्रगढ़,20 मई 2023 (घटती-घटना)। भाजपा के पूर्व महामंत्री रामचरित द्विवेदी ने मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन, नया रायपुर को एक पत्र प्रेषित कर जिला मिशन समन्वयक, समग्र शिक्षा राजीव गाँधी मिशन जिला- बैकुण्ठपुर एवं एम.सी.बी. के. द्वारा किये जा रहे भारी भ्रष्टाचार के संबंध में उचित कार्यवाही का अनुरोध किया है।
मुख्यमंत्री को भेजे अपने पत्र में श्री द्विवेदी ने उल्लेखित किया है कि जिला कोरिया में पदस्थ राजीव गांधी शिक्षा मिशन के समन्वयक मनोज पाण्डेय द्वारा दोनों जिलों में संचालित समस्त प्राथमिक एवं माध्यमिक शासकीय शालाओं में बच्चों के पढ़ने एवं खेल कूद (बालवाड़ी का सामान) से संबंधित सामग्रियों की किट जिसका अधिकतम मूल्य 5,000रूपये होगा, इनके द्वारा समस्त स्कूलों में अपने गृह जिले सूरजपुर से मनचाही दुकान पुस्तक भंडार सूरजपुर से 15,000 रूपये प्रति सेट की दर से सांठ-गांठ कर सप्लाई किया गया है जो कि भारी भ्रष्टाचार को दर्शाता है। दोनों जिलों में संचालित प्रत्येक शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं में कार्यरत शिक्षकों के डिजिटल हस्ताक्षर पेन ड्राइव में राज्य के निर्देश पर संघाई इन्टरप्राइजेस रायपुर द्वारा कराया जाना था। समस्त विकासखण्डों में संबंधित फर्म द्वारा कार्य प्रारंभ कर दिया गया था। परन्तु जिला मिशन समन्वयक द्वारा बीच में ही संबंधित फर्म का कार्य बंद कराकर अपनी मनचाही फर्म से सांठ-गांठ कर बैकुण्ठपुर से प्रति शिक्षक 1,499 रूपये की दर से कराया गया है जबकि इसकी लागत अधिकतम 499 रूपये आती है। इस दर पर कई दुकानदार डिजिटल हस्ताक्षर तैयार कर दे रहे हैं। समस्त शिक्षकों को डिजिटल हस्ताक्षर को अपनी इच्छानुसार कराये जाने हेतु स्वतंत्र होना था, इनके द्वारा आदेश जारी कर अपनी मनचाही फर्म से कराये जाने हेतु बाध्य किया गया है। दोनों जिलों में संचालित समस्त संकुल केन्द्रों में एक नग साउण्ड बॉक्स इनके द्वारा अधिक मूल्य 9,900 रूपये पर अपनी मनचाही फर्म सूरजपुर से सांठ-गांठ कर सप्लाई किया गया है। जबकि प्रत्येक संकुल प्रभारी को अपनी आवश्यकतानुसार क्रय किये जाने हेतु स्वतंत्र होना चाहिए था। प्रदाय किया गया साउण्ड बॉक्स की अधिकतम कीमत 4,000 से 5,000 रूपये के बीच में मार्केट में उपलब्ध है। जिला मिशन समन्वयक का आतंक इस प्रकार है कि दोनों जिलों में समस्त सामग्री की खरीदी इनके द्वारा जिला-सूरजपुर से क्रय कर सप्लाई की जा रही है। इनके दबाव के कारण न तो कोई शिक्षक और न ही कोई अधीनस्थ अधिकारी एवं कर्मचारी शिकायत कर पा रहे हैं और न ही विरोध कर पा रहे हैं।
