नई दिल्ली,15 फ रवरी 2023 (ए)। दूसरे दिन हिंदू सेना ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बीबीसी दफ्तर के बाहर उग्र विरोध प्रदर्शन किया। विरोध के मद्देनजर सरकार ने दफ्तर के बाहर सुरक्षा बढ़ाने का निर्देश दिया। बुधवार को जैसे ही हिंदू सेना के प्रदर्शनकारियों ने बीबीसी कार्यालय का रुख किया, दफ्तर के बाहत तैनात पुलिस बलों ने बैनर और तख्तियां जब्त कर प्रदर्शनकारियों को काबू में किया।
प्रदर्शनकारी ब्रिटिश ब्रॉडकास्टर-बीबीसी के खिलाफ नारेबाजी करते भी सुने गए। इसके बाद बीबीसी दिल्ली कार्यालय के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के कई जवानों को बीबीसी कार्यालय के बाहर तैनात किया गया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक हिंदू सेना के सदस्यों के एक समूह ने बुधवार को बीबीसी इंडिया के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। नई दिल्ली के कस्तूरबा गांधी रोड में बीबीसी कार्यालय के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के कई जवानों को एचटी हाउस के बाहर तैनात किया गया। इसी बिल्डिंग में बीबीसी इंडिया के कार्यालय हैं।
आयकर विभाग के अधिकारी दूसरे दिन भी सर्वेक्षण करने पहुंचे। इसी बीच हिंदू सेना के प्रदर्शनकारियों ने बीबीसी कार्यालय के बाहर ‘बीबीसी भारत छोड़ो’ के नारे लगाए। दिल्ली और मुंबई में बीबीसी के कई कार्यालयों में आयकर विभाग के दूसरे दिन के सर्वेक्षण अभियान पर इंडिया टुडे की रिपोर्ट में कहा गया, समझा जाता है कि अधिकारी संगठन के इलेक्ट्रॉनिक और पेपर-आधारित वित्तीय डेटा की प्रतियां बना रहे हैं।
भारत में ब्रिटिश ब्रॉडकास्टर के खिलाफ कथित कर चोरी की जांच के तहत सर्वेक्षण किए जा रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक टैक्स अधिकारी बीबीसी के वित्त और कुछ अन्य विभागों के कर्मचारियों से बात कर रहे हैं। इनकम टैक्स विभाग के सूत्रों ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि ऑपरेशन के हिस्से के रूप में कुछ कंप्यूटर उपकरणों और मोबाइल फोन का क्लोन बनाया गया।
सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने बीबीसी पर “जहरीली रिपोर्टिंग” का आरोप लगाया है। इसी बीच आयकर विभाग की कार्रवाई और टाइमिंग पर कई विपक्षी दलों ने सवाल खड़े किए हैं। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि बीबीसी पर कार्रवाई इसलिए हुई है क्योंकि इस संस्था ने कुछ हफ्तों पहले ही दो-भाग वाली डॉक्यूमेंट्री – “इंडिया: द मोदी म्ेश्चन” रिलीज की है। बता दें कि करीब 21 साल पहले 2002 में गुजरात में गोधरा दंगों के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली गुजरात सरकार की भूमिका पर प्रकाश डाला गया है।
