बैकुण्ठपुर,@ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा की अलख जगा रहे शिक्षक के निधन से ग्राम में शोक की लहर

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  • ग्राम आजानगर पुटा के प्रधान पाठक के निधन से विद्यालय के छात्र छात्राओं सहित ग्रामवासी दुखी।
  • शासकीय विद्यालय में कार्यरत शिक्षक ने बदल दी थी सरकारी शिक्षा की तस्वीर
  • लगन एवम मेहनत से छात्र छात्राओं को कराते थे अध्यापन,कभी दिखावे का भी नहीं किया प्रयास

बैकुण्ठपुर,25 जनवरी 2023 (घटती-घटना)। कोरिया जिले के बैकुंठपुर विकासखंड के ग्राम आजादनगर पुटा के प्राथमिक शाला के शिक्षक साथ ही प्रधान पाठक सत्यपाल सिंह का दुखद निधन रविवार को जो गया। सत्यपाल सिंह उन गिने चुने शिक्षकों में आते थे जिन्होंने सरकारी शिक्षा व्यवस्था को नया आयाम देने की कोशिश की थी और अपने सेवाकाल के आरंभ से ही वह छात्र छात्राओं के प्रति समर्पित थे और अध्ययन अध्यापन में उनकी रुचि भी अत्यधिक थी।
आजाद नगर पुटा प्राथमिक शाला में पदस्थ होने के उपरांत से ही सत्यपाल सिंह ने छात्र छात्राओं के प्रति अपना जीवन जैसे समर्पित कर दिया था और वह शासकीय विद्यालय को एक ऐसा आयाम दे पाने में सफल हुए जिसकी तुलना निजी विद्यालयों से की जाने लगी और विद्यालय में ग्राम के छात्र छात्राओं का दाखिला लगातार होता रहा,जहां आज शासकीय विद्यालयों से अभिभावकों का मोह भंग हो रहा है वहां प्राथमिक शाला आजादनगर पुटा की बात की जाए तो वहां दर्ज संख्या में इजाफा देखा जाता रहा। प्रारंभ से ही मेहनती छात्र छात्राओं के प्रति समर्पित शिक्षक सत्यपाल सिंह उन शिक्षकों में भी आते थे जिन्हे पुरुस्कार और नाम की ललक कभी नहीं रही और न ही उन्हें इसके लिए कभी प्रयासरत देखा गया वह केवल अपने विद्यालय की जिम्मेदारियों को निभाना बखूबी जानते थे और वह उस कार्य के लिए प्रसंशा या किसी इनाम के लिए कभी विचार या प्रयास करते नजर नहीं आते थे और वह अपने जिम्मेदारी के प्रति ईमानदारी से काम करते थे।
वह कभी दिखावा करते अपने काम का बखान करते नजर नहीं आए और यही उनकी खूबी थी। शिक्षक के निधन से ग्राम के प्राथमिक शाला के छात्र छात्राओं सहित ग्रामवासियों में शोक की लहर दौड़ गई और सभी ने नम आंखों से शिक्षक को बिदाई दी। शिक्षक सत्यपाल सिंह सन 1996 से विद्यालय में पदस्थ थे और तभी से वह विद्यालय एवम छात्र छात्राओं के प्रति समर्पित थे। उनके जानने वालों का कहना है जिनमे शिक्षक भी शामिल हैं की सत्यपाल सिंह शासकीय विद्यालय के ऐसे शिक्षक थे जिन्होंने शासकीय विद्यालय के प्रति समाज में फैली भ्रांति को दूर कर दिया था और उन्होंने साबित किया था की शासकीय विद्यालयों में भी बेहतर अध्ययन अध्यापन हो सकता है।


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