मनेंद्रगढ़ 11 दिसम्बर 2022 (घटती-घटना)। किसी मनोचिकित्सक द्वारा किसी मानसिक रोगी के साथ सम्बन्धपूर्वक बातचीत एवं सलाह मनोचिकित्सा या मनश्चिकित्सा कहलाती है। यह लोगों की व्यवहार सम्बन्धी विविध समस्याओं में बहुत उपयोगी होती है। मनोचिकित्सक कई तरह की तकनीकें प्रयोग करते हैं, जैसे- प्रायोगिक सम्बन्ध-निर्माण, संवाद, संचार तथा व्यवहार-परिवर्तन आदि। इनसे रोगी का मानसिक-स्वास्थ्य एवं सामूहिक-सम्बन्ध सुधरते हैं।
उक्त बाते नैना यादव (मनोचिकित्सक विद्यार्थी एवं प्रशिक्षु मैट्स विश्वविद्यालय)ने शासकीय उच्चतर विद्यालय लालपुर (एमसीबी) में मानसिक स्वस्थ जागरूकता कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किये। विद्यालय में उपस्थित बच्चों एवं शिक्षकों को संबोधित करते हुए सुश्री नैना यादव ने बताया कि मानसिक तकलीफ जैसे स्ट्रेस, एंजाइटी एवं डिप्रेशन क्या है और उसे कैसे मैनेज करें और अपने आस पास के लोगों कैसे मोटिवेट करे और कैसे उनकी मदद करे एवं उसका क्या उपाय करें। उन्होंने अपना निजी अनुभव बताया कि कैसे माइग्रेन, डायबिटीज,हाई लड प्रेशर जैसी कई बीमारियों से बिना दवाई के, मानसिक चिकित्सा और खानपान से परमानेंट इलाज किया जा सकता है साथ ही यह भी बताया कि उनकी रोजमर्रा की जिंदगी और खानपान में थोड़ा बदलाव कर के वे कैसे मानसिक और शारीरिक बीमारियों से बचाव किया जा सकता है।
उन्होंने बच्चों को बताया कि पूरा मनोविज्ञान और मनोचिकित्सा की पद्धति जीवन की सार्थकता के विचार पर ही आधारित होती हैं। मनोचिकित्सा शास्त्र में किसी रोगी की बुनियादी दिक्कतों को समझने की कोशिश की जाती है। आधुनिक समाज में हम वास्तविक खुशियों से दूर होते जा रहे हैं तथा सयुंक्त परिवार की अवधारणा लुप्त होती जा रही है एवं एकल परिवार वाद का बोल बाला का प्रचलन बढता जा रहा है आज हमलोग आधुनिकता का सही मतलब नहीं समझते हैं। जीवन के लिए क्या और कितना जरूरी है। क्या गैर-जरूरी है। आंख मूंद कर, तर्क किए बगैर हम चीजों का अनुसरण करने लग जाते हैं। जीवन का लुत्फ उठाना और पीड़ा की उपेक्षा करना ही केवल मनुष्य को प्रेरित नहीं करती है। मनोचिकित्सा भिन्न प्रकार की योग्यताओं से युक्त चिकित्सकों द्वारा अभ्यास में लायी जा सकती है। घर पर शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय लालपुर की प्राचार्य श्रीमती सुनीता शर्मा रचना पांडे श्रीमती संगीता राय अमित कुमार साहू जय श्री गुप्ता समेत समस्त स्टाफ की गरिमामय उपस्थिति रही।
