बैकुण्ठपुर@क्या विधानसभा चुनावों में ताल ठोकने की तैयारी में हैं वेदांती व अनिल?

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वेदांती तिवारी के साथ जिला पंचायत चुनाव लड़ चुके अनिल जायसवाल भी कांग्रेस से टिकट के दावेदार?
अब इन दोनों के ताल में कितना दम है यह तो 2023 में जनता तय करेगी।
स्थानीय विधायक के रवैये से दोनों को मिल सकता है लाभ, जिले में कांग्रेस से नहीं विधायक से है जनता नाखुश।

-रवि सिंह –
बैकुण्ठपुर 10 नवम्बर 2022 (घटती-घटना)।  अविभाजित कोरिया के राजनीति की बात की जाए तो कांग्रेस से नहीं सत्ता दल के तीनों विधायकों जनता नाराज है। जनता के दिलों में अपनी छाप छोड़ने में यह तीनों विधायक पीछे रह गए सबसे ज्यादा घमासान की स्थिति तो विधानसभा नंबर 3 यानी कि बैकुंठपुर की है, यहां पर नए चेहरे को विधायक की जवाबदारी मिली और यह जवाबदारी को इन्होंने बखूबी नहीं निभा पाया, आज इसी का परिणाम है की इनके जगह बाकियों की लोकप्रियता बढ़ रही है विधायक की लोकप्रियता पर जनता की आरी चल सकती है और इन्हीं की कमियों की वजह से दो बार विधानसभा हारे विनंती तिवारी के लिए लोगों का रुझान बढ़ रहा है तो वहीं पूर्व जनपद उपाध्यक्ष रहे अनिल जायसवाल भी लोगों के रुझान पाने के लिए मैदान में उतरे हुए। सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह दोनों नेता एक साथ जिला पंचायत चुनाव में एक-दूसरे के आमने-सामने चुनाव लड़ा, विधानसभा में भी आमने-सामने चुनाव लड़ सकते हैं ऐसी परिस्थितियां भी बन सकती हैं ऐसे तमाम तरीके के सवाल खड़े हैं।
वेदांती जनाधार वाले नेता बनकर बैकुंठपुर विधानसभा में उभर रहें हैं
बैकुंठपुर विधानसभा से दो बार अपनी किस्मत आजमा चुके वह भी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की टिकट पर वर्तमान में जिला पंचायत उपाध्यक्ष वेदांती तिवारी को लेकर बैकुंठपुर विधानसभा की जनता सकारात्मक दिख रही है। लगातार जनसम्पर्क व क्षेत्र की जनता के हर सुख दुख में पहुँच रहे वेदांती तिवारी आज के परिदृश्य में कांग्रेस के सबसे मजबूत एवम जनाधार वाले नेता बनकर बैकुंठपुर विधानसभा में उभर रहें हैं, पिछले दो चुनावों में भले ही उन्हें हार का सामना करना पड़ा हो लेकिन हार बहोत ही कम अंतरों से रहा है और जो साबित करता है कि उनका बैकुंठपुर विधानसभा में अच्छा खासा जनाधार है। जिला पंचायत सदस्य के लिए ही हुए चुनाव में उन्होंने न केवल कांग्रेस के घोषित प्रत्याशी को बुरी तरह हराया वरन उन्होंने जिला पंचायत उपाध्यक्ष के पद पर भी अपना कब्जा दर्ज किया जबकि स्वयं बैकुंठपुर विधायक उनके विरुद्ध रहीं और उनके विपक्ष में जमकर उन्होंने मेहनत भी की। वेदांती तिवारी को ग्रामीण परिवेश का होने का भी लाभ मिलता है और उनकी सर्व उपलब्धता भी उनके जनाधार को बढ़ाती है जो उनकी खूबी मानी जाती है।
आगामी विधानसभा चुनाव में वेदांती तिवारी भी मजबूत दावेदारों में से एक
आगामी विधानसभा चुनाव में वेदांती तिवारी भी मजबूत दावेदारों में से एक हैं बैकुंठपुर से इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता वहीं वह किसी दल के टिकट पर चुनाव लड़ते हैं या निर्दलीय ही ताल ठोकते हैं यह देखने वाली बात होगी, वैसे सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी लगातार अपने विधायकों का रिपोर्ट कार्ड तैयार कर रही है और विधायकों के अब तक के कार्यकाल का क्षेत्र आधार पर लेखा जोखा भी तैयार हो रहा है और यह माना जा रहा है कि सत्ताधारी दल किसी भी स्थिति में कमजोर पड़ने वाले या खराब प्रदर्शन वाले विधायक को टिकट देने नहीं जा रहा और ऐसी परिस्थिति में बैकुंठपुर विधायक का टिकट तय है यह कहना जल्दबाजी होगी। लगातार क्षेत्र से दूर रहती चली आ रही विधायक वर्तमान में तो लगातार क्षेत्र का दौरा कर रहीं हैं लेकिन यदि क्षेत्र की जनता की राय जानी जाए तो एक ही बात सामने आएगी और वह है बहोत देर कर दी उन्होंने। अब विधानसभा चुनाव में सत्ताधारी दल यदि टिकट वितरण में बैकुंठपुर विधानसभा से विचार करेगा तो एक ही नाम जो सबसे लोकप्रिय और जनाधार वाला सामने आएगा वह है वेदांती तिवारी का जो पार्टी के लिए फायदेमंद उम्मीदवार हो सकते हैं और बैकुंठपुर विधानसभा सीट जीतकर पार्टी के खाते में डाल सकते हैं,वैसे वेदांती तिवारी स्वयं से फिलहाल कहीं कहते नहीं सुने जा रहें हैं कि वह उम्मीदवार रहेंगे चुनाव में लेकिन उनके समर्थंको की माने तो पार्टी हाईकमान भी उनके नाम पर गंभीरता से विचार कर रहा है और उनके सम्पूर्ण गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है।
चुनावी मैदान में उतरते हैं तो यह उनका विधानसभा चुनाव में तीसरा अवसर होगा
वेदांती तिवारी यदि इसबार चुनावी मैदान में उतरते हैं तो यह उनका विधानसभा चुनाव में तीसरा अवसर होगा और दो कम अंतरों से पराजय के बाद यह अवसर उन्हें जीत की तरफ भी ले जा सकता है जो नजर भी आता है और जनता द्वारा कहते भी सुना जाता है।वेदांती तिवारी ने भी अपनी सक्रियता लगातार बना कर रखी हुई है और वह शायद ही क्षेत्र के किसी व्यक्ति के दुख सुख में शरीक नहीं हुआ करते हैं,इनके पास कार्यकर्ताओं की जहां लंबी फौज है वहीं इनके समर्थक भी पूरे विधानसभा क्षेत्र में फैले हुए हैं जो इन्हें विधानसभा भेजना चाहते हैं। अब देखना यह है कि कब वेदांती तिवारी विधानसभा चुनाव को लेकर अपना निर्णय जनता के सामने सार्वजनिक करते हैं वहीं सत्ताधारी दल जिसमे की सुगबुगाहट भी है कि टिकट वितरण में कुछ परिवर्तन विधानसभावार हो सकता है उसका बैकुंठपुर विधानसभा को लेकर क्या निर्णय आता है।
पूर्व जनपद उपाध्यक्ष अनिल जायसवाल कांग्रेस से टिकट को लेकर कहीं न कहीं आश्वस्त नजर आ रहे हैं
बैकुंठपुर के पूर्व जनपद उपाध्यक्ष अनिल जायसवाल में जो बदलाव आया है वह काफी अलग उन्हें बनाता है जिला पंचायत चुनाव हारने के बाद इनके अंदर एक अलग सा परिवर्तन आया है और यह परिवर्तन इस समय दिख भी रहा है जनता के बीच जाने से कतराने वाले अनिल जायसवाल लगातार अब जनता के बीच पहुंचने लगे हैं उन्हें समझ आ गया है कि राजनीति में रहना है तो जनता का आशीर्वाद तो जरूरी है आज यही वजह है कि वह जनता के बीच जाने लगे हैं और कहीं ना कहीं अपनी राजनीति में वेदांती तिवारी के पदचिन्हों  को ही अपनाकर आगे बढ़ रहे।अनिल जायसवाल अपने समर्थकों के साथ आजकल हर उस जगह जा रहें हैं जहां भी जनता का जुटाव देखा जा रहा है या कोई सार्वजनिक कार्यक्रम हो रहा है।
2 कांग्रेसी इस स्थिति में एक साथ चुनाव लड़ सकते हैं
2023 विधानसभा में स्थानीय विधायक का टिकट कटता है और अनिल जयसवाल को कांग्रेस से टिकट मिलता है और भारतीय जनता पार्टी से पूर्व मंत्री भइयालाल राजवाड़े का टिकट कटके यदि अन्य किसी को टिकट मिलता है तो निर्दलीय तौर पर वेदांती तिवारी व अनिल जायसवाल एक बार फिर आमने-सामने चुनाव लड़ सकते हैं, जिला पंचायत चुनाव में भले ही अनिल जयसवाल को हार का सामना करना पड़ा हो पर इस नेता के दिमाग के सामने बाकी नेताओं की बोलती बंद हो जाती है, यह भी कटु सत्य है अनिल जायसवाल के दिमाग मे राजनीति को अलग ही रूप से देखा जाता है, आज जहां जनपद में लोग मान सम्मान के लिए तरस रहे हैं वहीं अनिल जायसवाल एक ऐसे जनपद उपाध्यक्ष थे जिनका प्रोटोकोल भी होता था और शिलालेख में नाम भी लिखा जाता था, उन्हें पता होता था कि उनका अधिकार क्षेत्र है और अपने अधिकार क्षेत्र का कैसे उपयोग किया जाता है, जो आज के जनप्रतिनिधि नहीं कर पा रहे हैं। वर्तमान समय मे जनपद पंचायत बैकुंठपुर का कार्यकाल जनप्रतिनिधियों का बिल्कुल विपरीत है जबकि अनिल जायसवाल विपक्ष के उपाध्यक्ष होने के बावजूद अपना वजूद कायम रख पाए थे, वहीं आज केवल निर्माण कार्य कर जल्द से जल्द धनाढ्य बनने की लालसा में उसी पद पर सत्ताधारी दल के लोग केवल अपने स्वार्थ सिद्धि में लगे हुए हैं वहीं उनको अधिकारी भी तव्वजो नहीं दे रहें हैं जिसकी वजह से लगातार आपसी तकरार सामने आ रही है।
विधायक के सिपहसालार विधायक के लिए बन रहे मुसीबत
जैसा कि बताया जा रहा है कि बैकुंठपुर विधायक का जो परफॉर्मेंस उपर गया है वह बहोत बेहतर नहीं गया है और उनके परफॉर्मेंस को कमजोर माना जा रहा है,विधायक के समर्थकों खास सिपहसालारों की ही वजह से परफॉर्मेंस नीचे गिरा है यह भी कहना गलत नहीं होगा,सरकार दुबारा आये न आये जल्द से जल्द खुद को संपन्न बनाने में जुटे विधायक के खास समर्थंको ने विधायक के लिए मैदानी कोई भूमिका कभी तैयार नहीं कि जिसकी वजह से उन्हें दोबारा चुनाव में दिक्कत न हो और यही वजह है कि टिकट को लेकर कई दावेदार सामने आ रहें हैं और जो कहीं न कहीं आश्वस्त भी दिख रहे हैं।


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