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बैकुण्ठपुर@बैकुंठपुर नगरपालिका में क्या सच मे भ्रष्टाचार का बोलबाला है, क्या सच मे अधिकारी निरंकुश हैं?

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-रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर 4 नवम्बर 2022 (घटती-घटना)। कोरिया जिले में वैसे तो अब दो ही नगरपालिका शेष रह गए हैं और उसमें भी एक जिला मुख्यालय की नगरपालिका है जो आये दिन विवादों में बनी रहने वाली नगरपालिका है और यहां अधिकारी निरंकुश हो चुके हैं ऐसा आजकल सोशल मीडिया पर शहर के लिए चल रहे पोस्टों से समझा जा सकता है। दुकानों की नीलामी की बात हो या शादी घर निर्माण की बात सभी मामलों में गड़बड़ी हो रही है यह बात सामने आ रही है, साफ सफाई भी उन्हीं मुहल्लों तक सीमित है जहां के पार्षद सत्ताधारी दल के हैं, अन्य दलों के पार्षदों के वार्डों में पालिका  विकास होने ही नहीं दे रही है यह भी आरोप लगते चले आ रहे हैं।वहीं जबसे वर्तमान मुख्य नगरपालिका अधिकारी की पदस्थापना बैकुंठपुर नगरपालिका में हुई है उनके क्रियाकलापों को लेकर लगातार निरंकुशता की बातें सामने आ रहीं हैं जो अधिकांश मामलों में सही भी हैं जो दिखाई दे रहा है। मुख्य नगरपालिका अधिकारी बैकुंठपुर पर सबसे पहला आरोप ट्रेडमिल के घरेलू उपयोग का लगा था जो नगरपालिका के जिम के लिए कोरोना काल मे आया था जिसका उपयोग मुख्य नगरपालिका अधिकारी खुद के निवास में कर रहीं थीं और जब बात मीडिया तक पहुंची और उनकी बदनामी होने लगी तब उन्होंने बड़ी मुश्किल में उसे जिम वापस भिजवाया और मामला शांत हुआ।
दूसरा मामला पुराने बस स्टैंड की दुकानों के नीलामी का सामने आया जिसमे नीलामी के दौरान दुकानें महंगी बिकीं लेकिन बाद में दुकानें बोलिकर्ताओं ने नहीं ली और दुकानें बिल्कुल ही कम दर पर लिफाफा पद्धति से कम मूल्य पर चहेतों को दे दीं गई, बताया जा रहा कि बोलिकर्ताओं में से कुछ ने बोली इसीलिए लगाई थी और बाद में दुकानें नहीं लीं जिससे दुकानों का मूल्य अधिक सामने रखा जा सके और बाद में अधिकारियों से मिलीभगत कर लिफाफा पद्धति स दुकानें ले ली जाएं जो कम मूल्य पर मिल जाएंगी और किसी को भनक भी नहीं लगेगी, वही हुआ भी अंदर ही अंदर लिफाफा पद्धति से दुकानें आबंटित कर दी गईं जिससे नगरपालिका को भी बड़ा नुकसान हुआ और अन्य दुकान बोली से खरीदने वालों को भी खुद के ठगे जाने का एहसास हुआ। मुख्य नगरपालिका अधिकारी की मनमानी यहीं नहीं रुकी उन्होंने शहर के लिए प्रस्तावित शादी घर के स्थान में ही परिवर्तन कर दिया और जो शादी घर शहर के बीचों बीच बनना था उसे शहर से दूर बनाने का निर्णय ले लिया।
नगरपालिका बैकुंठपुर की सीएमओ की हठधर्मिता की वजह से शहर के लोगों ने सभी मामलों की शिकायत संबंधित उच्च अधिकारियों से जरूर की है लेकिन मामले में उच्च अधिकारियों का भी मौन होना मामले को पटाक्षेप का रूप प्रदान कर रहा है। नगरपालिका बैकुंठपुर में जारी मनमानी को लेकर सोशल मीडिया में लगातार कुछ न कुछ पढ़ने सुनने को मिल जा रहा है लेकिन जिम्मेदार इस मामले में मौन हैं और मनमानी को शह मिलता जा रहा है। वैसे पुराने बस स्टैंड की दुकानों की नीलामी और लिफाफा पद्धति से आबंटन मामले में निश्चित रूप से भ्रष्टाचार हुआ है क्योंकि किसी ने बहोत अधिक मूल्य पर दुकान ली है और किसी को कुछ ही रकम खर्च कर दुकान आबंटित कर दी गई है।


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