रामानुजगंज@लोक निर्माण विभाग के काले कारनामों का सच सड़कों की मरम्मत के नाम से लाखों का वारा न्यारा

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पृथ्वीलाल केशरी-
रामानुजगंज 16 अक्टूबर 2022 (घटती-घटना)।
अच्छी सड़कें नागरीकों का मौलिक अधिकार है गडढ़ा मुक्त सड़के उपलब्ध कराना राज्य शासन का वैधानिक दायित्व है। लेकिन लोक निर्माण विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारियों के मिली भगत से प्रत्येक वर्ष सड़कों के मेन्टेनेंस के नाम पर लाखों रूपये का व्यारा-न्यारा कर अपनी एवं अपने उच्चाधिकारियों के जेबे गर्म करने में लगे हुए हैं। विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नगर के डामरीकरण सड़कों का मेन्टेनेंस के नाम पर लाखों रुपये राज्य सरकार से विभाग को प्राप्त हो रहे है। इसके बाद भी सड़कों की माली हालत में सुधार नहीं हो पा रहा है जिसका खामियाजा नगर की जनता को भुगतना पड़ रहा है। नगर के पुरे लोग धुल धुसरीत जीवन जी रहे हैं। आय दिन गड्डो में पानी भरने से कीचड़ो का सामना करना पड़ रहा है। वर्षों से जमे अधिकारी एवं कर्मचारी बनिया का दुकान बना कर रख दिये है। जब की उचित ढंग से रख-रखाव वाली सड़के का अधिकार भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकारो का हिस्सा है। उसके उपर से किसी भी प्रकार का नुकसान होने पर नागरिकों को विभाग से क्षतिपूर्ति लेने का अधिकार है। जिसका लोक निर्माण विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी खुले आम उल्लंघन कर रहे है। जिसका खामियाजा आज जनता को भुगतना पड़ रहा है ठेकेदार एवं अधिकारी कर्मचारी प्रत्येक वर्ष कागजों पर मेन्टेनेंस को दिखा कर लाखों रूपये हजम कर जा रहे है। लगता है कि काली कमाई का हिस्सा इस क्षेत्र के निर्वाचित एवं मनोनित जनप्रतिनिधियों को पहुंच रहा है। शायद यही एक बड़ा वजह है जिसके कारण जनता को मिलने वाले मूलभूत सुविधाओं के प्रति लोक निर्माण विभाग उदासीन रवैया अपनाए हुए है। चुनाव के समय आम जनता से मूलभूत सुविधाओं के लिए बेहतर काम करने का वादा करने वाले जनप्रतिनिधियों के द्वारा लोक निर्माण विभाग पर कोई नियंत्रण नहीं होने के कारण विभाग अपने मनमानी पर आमादा है। अब सवाल यह उठता है। कि आम जनता के प्रतिनिधित्व करने के नाम पर जो दायित्व उठाया है। उसका क्या, क्या इसी तरह नगर कि जनता अपने मौलिक अधिकारों से वंचित रहेगा या आने वाले समय में कुछ सुधार की आशा है। नगर की जनता अपने मौलिक अधिकार के लिए जिला प्रशासन एवं राज्य सरकार से यह मांग कर रहीं है कि नगर की सड़कों का तत्काल सुधार कार्य कराते हुए वर्षों से जमे अधिकारी एवं कर्मचारियों को पृथक कर विभाग की छवि को धूमिल होने से बचाया जा सकें।


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