मुम्बई@डॉलर के मुकाबले रुपया फिर रिकॉर्ड निचले स्तर पर बद

Share

पहली बार 82 के पार,आपके ऊपर क्या होगा असर
मुम्बई, 07 अक्टूबर 2022।
भारतीय करेसी रुपया शुक्रवार को रिकॉर्ड निचले स्तर तक गिर गया. इसने पहली बार ओपनिग मे डॉलर के मुकाबले 82 का स्तर भी तोड़ दिया है. रुपया शुरुआती कारोबार मे 82.22 रुपया प्रति डॉलर के लेवल पर आ गया. इसमे 33 पैसे या 0.41 फीसदी की जबरदस्त गिरावट देखी जा रही है. यहा बता दे रुपये मे ये गिरावट कई तरह से आप पर असर डालने वाली है.
16 पैसे टूटकर छुआ रिकॉर्ड लो स्तर
बीते कारोबारी दिन मुद्रा बाजार मे डॉलर के मुकाबले रुपया 81.88 के स्तर पर बद हुआ था. बीते कुछ दिनो मे इसमे कभी मामूली बढ़त और कभी गिरावट देखने को मिल रही थी. लेकिन कई रिपोर्ट्स मे इसके 82 तक गिरने की आशका जताई जा रही थी.
शुक्रवार को जैसे ही कारोबार शुरू हुआ भारतीय करेसी मे 16 पैसे की जोरदार गिरावट आई और रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर 82.33 तक फिसल गया. पहली बार 23 सितबर 2022 को इसने 81 रुपये के निचले स्तर को छुआ था. जबकि उससे पहले 20 जुलाई को यह 80 रुपये का लेवल पार कर गया था. यहा बता दे रुपया साल भर पहले अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 74.54 के स्तर पर था.
इस साल रुपये मे 10 फीसदी से ज्यादा की गिरावट
इस कैलेडर ईयर मे भारतीय रुपये मे 10 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखी गई है और ये साल 2022 मे 10.60 फीसदी टूट चुका है. अमेरिकी फेडरल रिजर्व के इस साल लगातार बयाज दरो के बढ़ाने के चलते डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है. इसके चलते इमर्जिग मार्केट्स की करेसी के साथ इडियन रुपी भी गिरावट ही दिखाता जा रहा है.
रुपये मे गिरावट के बड़े कारण
भारतीय मुद्रा रुपये मे लगातार आ रही गिरावट के एक नही बल्कि कई कारण है. हालाकि, इसके टूटने की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से बयाज दरो मे बढ़ोतरी को माना जा रहा है. दरअसल, अमेरिका मे महगाई चार दशक के उच्च स्तर पर बनी हुई है और इसके चलते बयाज दरे लगातार बढ़ रही है. बीते दिनो एक बार फिर से फेड रिजर्व ने इनमे 0.75 फीसदी की भारी-भरकम बढ़ोतरी की. इसके अलावा रूस और यूक्रेन युद्ध और उससे उपजे भू-राजनैतिक हालातो ने भी रुपया पर दबाव बढ़ाने का काम किया है.
भारत के लिए इसलिए बड़ी मुसीबत
रुपये के टूटने से कई क्षेत्रो मे बड़ा असर देखने को मिलता है. इसमे तेल की कीमतो से लेकर रोजमर्रा के सामनो की कीमतो मे इजाफा दिखाई देने लगता है. भारत के लिए डॉलर के मुकाबले रुपये मे गिरावट इसलिए भी बड़ी मुसीबत का सबब है, क्योकि भारत जरूरी तेल, इलेक्टि्रक सामान और मशीनरी समेत कई दवाओ का भारी मात्रा मे आयात करता है. अगर रुपये मे इसी तरह गिरावट जारी रही तो आयात और महगा हो जाएगा और आपको ज्यादा खर्च करना होगा.
दरअसल, कच्चे तेल, सोना और अन्य धातुओ की कीमते अतरराष्ट्रीय बाजार मे डॉलर मे तय होती है. ऐसे मे दिनो-दिन रुपये की बिगड़ रही हालत से इनकी खरीद के लिए हमे ज्यादा विदेशी मुद्रा खर्च करना पड़ेगा. घरेलू बाजार मे पेट्रोल-डीजल की कीमते भी बढ़ेगी. इसके अलावा रुपये मे गिरावट से भारतीयो के लिए विदेश मे पढ़ाई?करना और घूमना महगा हो जाएगा।


Share

Check Also

नई दिल्ली,@ मणिपुर में शांति बहाली की कोशिश में जुटा केंद्र

Share नई दिल्ली,05 अप्रैल 2025 (ए)। मणिपुर में शांति की दिशा में केंद्र सरकार ने …

Leave a Reply