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बैकुण्ठपुर@आदिवासी घोर विरोधी है छत्तीसगढ़ राज्य की कांग्रेस सरकारःमरकाम

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-रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर 01 अक्टूबर 2022 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ राज्य में आरक्षण को लेकर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी राष्ट्रीय महासचिव श्याम सिंह मरकाम ने बताया कि विगत वर्ष 2011, 2012 को राज्य में आदिवासी आरक्षण कि घोर विसंगति को लेकर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी संस्थापक गोंडवाना रत्न स्व. दादा हीरा सिंह मरकाम द्वारा बहुत बड़ा व्यापक रूप राज्य स्तरीय जन आंदोलन छत्तीसगढ़ राज्य कि राजधानी रायपुर में आंदोलन किया गया, जिसमें पूर्ववर्तीय भारतीय जनता पार्टी शासन काल के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के कार्यकाल में आदिवासियों कि संवैधानिक मांगो को दबाने की नियत से गोंगपा सुप्रीमो दादा हीरा सिंह मरकाम सहित लगभग 50 हजार आंदोलनकारी आदिवासियों गिरफ्तार किया गया था और पूर्ववर्तीय रमन सरकार कि दमन कारी नीति से दादा मरकाम को 3 से 4 दिनों तक रायपुर सेंट्रल जेल में बंद किया गया था, साथ में हजारों लोग को बंदी बनाया गया था, किंतु गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के सजग सिपाहियों द्वारा सरकार के दमन पूर्वक नीति का मुंह तोड़ जवाब देते हुए छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश राज्य सहित अन्य प्रदेश में जेल भरो आंदोलन किया गया जिसमें और पूर्ववर्तीय भारतीय जनता पार्टी के रमन सरकार को घुटने टेकने मजबूर होना पड़ा और सरकार को सभी आंदोलनकारियों को निःशर्त रिहाई किया गया साथ ही स्व. दादा मरकाम जी ने कहा था कि जिसकी जितनी संख्या भारी, उतनी उसकी हिस्सेदारी, कि न्याय संगत जनहित मांग पर बृहद जनआंदोलन से पूर्व भाजपा सरकार को घुटना टेकना पड़ा और राज्य के आदिवासियों को 32 प्रतिशत आरक्षण मिला था, किंतु वर्तमान कांग्रेस कि भूपेश बघेल सरकार में 27 विधायक आदिवासी आरक्षित सीट से निर्वाचित होकर विधान सभा सदन में पहूंचने के बाद भी राज्य में आदिवासी विरोधी नीति के कारण 58 प्रतिशत आरक्षण को लेकर माननीय उच्च न्यायालय द्वारा असैंवधानिक करार दिए जाने के बाद भी आदिवासी कांग्रेस विधायक और भाजपा विधायकों और साथ में आदिवासी सांसदों का चुप्पी साधना समझ से परे है, इन्हे नैतिकता के आधार पर सार्वजनिक तौर से माफी मांगते हुए पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। इस तरह से चुप्पी साधे रहने से कांग्रेस और भाजपा कि आदिवासी हितैसी होने का झूठे दावे किए जाने कि कथनी और करनी दोनों स्पष्ट है।
हमारे देश में विभिन्न राज्यों में माननीय उच्चतम न्यायालय के विशेष परिस्थितियों में आरक्षण 50 प्रतिशत से ज्यादा दिए जाने का न्याय दृष्टांत के अनुसार प्रमुखता से आरक्षण दिया जा रहा है, किंतु राज्य में 58 प्रतिशत आरक्षण को असैंवधानिक है तो एसटी का आरक्षण कम करके एससी का 4 प्रतिशत कि वृद्धि नहीं किया जाना चाहिए इस पर छत्तीसगढ़ राज्य महाधिवक्ता द्वारा माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष तर्क संगत बहस नहीं साथ ही जनगणना वर्ष 2011 के जनसंख्या अनुसार न्यायालय में रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं किया जाना छत्तीसगढ़ सरकार व महाधिवक्ता कि आदिवासी विरोधी नीति को स्पष्ट दर्शाता है। छत्तीसगढ़ राज्य कि भूपेश बघेल कांग्रेस सरकार कि आदिवासी विरोधी नीति से पूरे आसिवासी समुदाय उपेक्षित और अक्रोसित है, जिसका गोंडवाना गणतंत्र पार्टी घोर निन्दा करता है और शीघ्र ही राज्य स्तरीय जन आंदोलन किया जाएगा।


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