नई दिल्ली@आसाराम की याचिका पर गुजरात सरकार को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

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नई दिल्ली , 13 अगस्त 2022। सुप्रीम कोर्ट ने स्वयभू सत आसाराम बापू द्वारा दायर याचिका पर गुजरात सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मागा है। आसाराम द्वारा इस आधार पर जमानत मागी गई है कि उसकी उम्र 80 वर्ष से अधिक है और उसका स्वास्थ्य बिगड़ रहा है। जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस सीटी रविकुमार की बेच ने गुजरात सरकार से जवाब मागा और मामले की सुनवाई 7 सितबर को तय की है।
सुप्रीम कोर्ट ने 2013 के बलात्कार के एक मामले मे जमानत अर्जी खारिज किए जाने के खिलाफ जेल मे बद आसाराम की ओर से दायर अपील पर गुजरात सरकार से जवाब मागा है। बेच ने गुजरात हाईकोर्ट के 10 दिसबर, 2021 के आदेश को चुनौती देने वाली आसाराम की अर्जी पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किया।
आसाराम ने यह कहते हुए जमानत मागी कि मुकदमे के निष्कर्ष पर पहुचने का कोई सकेत नही है। 2018 मे आसाराम को राजस्थान की एक विशेष अदालत ने अपने आश्रम मे एक नाबालिग के साथ बलात्कार के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
बेच ने कहा कि सबधित फैसले की प्रमाणित प्रति और आधिकारिक अनुवाद की कॉपी दाखिल करने से छूट के लिए आवेदन को मजूरी दी जाती है। नोटिस जारी किया जाए और उसका जवाब सात सितबर, 2022 तक दिया जाए।
अपनी जमानत अर्जी मे आसाराम ने इस आधार पर राहत का अनुरोध किया है वह 80 वर्ष से अधिक उम्र का है और उसका स्वास्थ्य बिगड़ रहा है। आसाराम को 2018 मे राजस्थान की एक विशेष अदालत ने अपने आश्रम मे एक नाबालिग से बलात्कार करने के आरोप मे आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
अहमदाबाद के मोटेरा इलाके मे आसाराम के आश्रम मे 1997 से 2006 के बीच रहने वाली सूरत की दो बहनो ने आसाराम और उसके बेटे नारायण साई के खिलाफ अलग-अलग शिकायत दर्ज कराई थी। बड़ी बहन ने आसाराम के खिलाफ अपनी शिकायत मे उस पर 2001 से 2006 के बीच कई बार यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था, जब वह अहमदाबाद के मोटेरा इलाके मे उनके आश्रम मे रह रही थी।
26 अप्रैल, 2019 को सूरत की एक अदालत ने नारायण साई को भारतीय दड सहिता की धारा 376 (बलात्कार), 377 (अप्राकृतिक अपराध), 323 (हमला), 506-2 (आपराधिक धमकी), और 120-बी (साजिश) के तहत दोषी ठहराया। उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई।


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