2017 मे ऐसे धराशायी किया था महागठबधन
लालू परिवार के सदस्यो पर लगाए थे आरोप
सुशील मोदी को पार्टी ने ही भेजा हाशिए पर
पटना, 10 अगस्त 2022। बिहार की राजनीति मे सुशील कुमार मोदी, वो नाम है जिसे सिर्फ बीजेपी का चेहरा ही नही, बल्कि सत्ता का सूत्रधार भी माना जाता है. सुशील कुमार मोदी की पहचान ऐसे नेता की रही है, जो अपने विरोधियो के खिलाफ पूरा शोध करते है और फिर तथ्यो के साथ अक्रामक रणनीति अपनाकर हमला करते है. साल 2017 के अप्रैल महीने मे उन्होने आरजेडी और लालू प्रसाद यादव के परिवार को जब हमला करना शुरू किया, तो परिणा मे महागठबधन धराशायी हो गया. नीतीश कुमार एक बार फिर एनडीए मे शामिल हुए और बीजेपी को सत्ता सुख मिला. अब जब नीतीश कुमार एक बार फिर पाला बदलकर महागठबधन के साथ हो गए है, तो बिहार मे इस बात की चर्चा हो रही है कि क्या बिहार मे सुशील कुमार मोदी को साइडलाइन करना बीजेपी को भारी पड़ गया. वैसे भी बिहार की राजनीति मे सुशील मोदी के हाशिये पर जाने की चर्चा विरोधियो ने कई बार की. उनकी पार्टी के लोगो ने उन्हे हाशिए पर भेजा भी. लेकिन अगर उनके कद की बात की जाए, तो ये देखने वाली बात है कि बिहार से निकलते ही कितना बड़ा परिवर्तन हो गया. इस बात का प्रमाण नीतीश का ये कहना है कि सुशील मोदी होते, तो बात अलग होती.
धराशायी किया था महागठबधन
साल 2017 का वो वक्त आपको याद है, जब लालू प्रसाद यादव के परिवार पर आरोपो की बौछार होने लगी. उस वक्त नीतीश कुमार महागठबधन मे शामिल थे. सुशील मोदी ने सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया. लालू परिवार की बेनामी संपत्ति के खुलासे के मामले मे उन्होने प्रेस काफ्रेस की झड़ी लगा दी. उन दिनो मे पार्टी विरोधियो के निशाने पर रहने वाले मोदी की इस काबिलियत को पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व को भी मानना पड़ा. सुशील मोदी की वजह से नीतीश कुमार महागठबधन से अलग हुए, लेकिन जब उन्ही को नीतीश के साथ डिप्टी सीएम नही रहने दिया गया, तो उसका परिणाम सत्ता गवाने के रूप मे आया.
सुशील मोदी की 4 अप्रैल 2017 की प्रेस कॉन्फ्रेस कौन भूल सकता है भला, लालू परिवार तो कतई नही. तब मॉल की मिट्टी को अवैध तरीके से पटना जू को बेचने का सबसे पहला मामला उजागर हुआ. फिर क्या था, सुशील मोदी ने इस मामले को लपका और दूसरे ही दिन मिट्टी घोटाले का आरोप लगाते हुए सबूत के साथ प्रेस काफ्रेस कर दी. मामले की जाच होने लगी, तब तक सुशील मोदी के पास अन्य स्रोतो से लालू परिवार की बेनामी संपत्ति का और विवरण हाथ लग गया. सुशील मोदी ने अपने हमले जारी रखे. इसके बाद 11 अप्रैल को एक प्रेस कॉन्फ्रेस मे सुशील मोदी ने कहा- यह तो शुरुआत है।
खुलासे अभी और बाकी है.
बिहार से दिल्ली पहुचे सुशील मोदी
लेकिन ठीक इसी समय पार्टी मे ही सुशील मोदी के विरोधी उन पर हावी होने लगे. शीर्ष नेतृत्व ने उन्हे राज्यसभा सदस्य बनाकर दिल्ली रवाना कर दिया. सियासी जानकार बताते है कि सुशील मोदी के पास बिहार बीजेपी की रीढ़ है. उनके पास बिहार की राजनीतिक के अलावा उन सभी बातो की जानकारी है, जो बिहार मे अन्य बीजेपी नेताओ के पास नही है. वो तोल कर बोलते है. उनकी बात को नीतीश कुमार ध्यान से सुनते थे. सुशील मोदी के नाराज हो जाने के बाद नीतीश कुमार कई बार अपने जदयू नेताओ पर लगाम लगाते थे. सुशील मोदी तथ्य मे मजबूत थे और बिहार बीजेपी को सभालने की कला उनमे थी. इस बार बीजेपी से बहुत बड़ी चूक हुई, सुशील मोदी को बिहार से हटाया और अब परिणाम देख लीजिए. सरकार हाथ से निकल गई.
लालू परिवार के सदस्यो पर लगाए आरोप
05 मई 2017 की प्रेस काफ्रेस मे सुशील मोदी ने लालू के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव पर आरोप लगाया कि उसने गलत तरीके से पेट्रोल पप का आवटन लिया है. इसके बाद एजेसिया सक्रिय हो गयी और कानूनी कार्रवाई होने लगी. सुशील मोदी यही नही रुके और लगातार मीडिया के माध्यम से लालू पर हमला बोलते रहे. उन्होने 20 जून की प्रेस काफ्रेस मे कहा कि लालू की पत्नी राबड़ी देवी 18 फ्लैटो की मालकिन है. 04 जुलाई को कहा कि लालू के बड़े बेटे तेज प्रताप को महज तीन साल की उम्र मे सेवा के बदले 13 एकड़ जमीन दान मे मिली. 06 जुलाई को उन्होने राजद नेता काति सिह, रघुनाथ झा और बाकी लोगो से दान मे मिली जमीन का खुलासा किया.
इन खुलासो के बाद नीतीश कुमार को तेज प्रताप यादव और तेजस्वी यादव के साथ गठबधन खत्म करने के लिए मजबूर होना पड़ा और 2015 के विधानसभा चुनावो से पहले बना महागठबधन धराशायी हो गया. सुशील मोदी ने वन मैन आर्मी बनकर ये काम किया और नीतीश दोबारा बीजेपी के साथ आए. इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव मे राजग ने अच्छा परफॉर्म किया. नीतीश ने 2020 का विधानसभा चुनाव भी बीजेपी के साथ लड़ा.
