स्कूलों में पेयजल के लिए तैयार इन्फ्रास्ट्रक्चर बिना उपयोग क्षतिग्रस्त हालत में पहुंचा।
क्या निर्माण कार्यो के मूल्यांकन व बिलों की अंतर शासकीय राशि में गड़बड़झाला?
गांवों के संपूर्ण विकास के लिए सरकार की कई नई योजना जिसके क्रियान्वयन पर
करोड़ों खर्च,फिर भी योजनाओं का प्रतिफल आम जनता से दूर क्यों?
-रवि सिंह-
बैकुंठपुर 06 अगस्त 2022 (घटती-घटना)।जिले के प्रत्येक गांव का संपूर्ण विकास करने के लिए सरकार एक के बाद एक नई योजना ला रही है। जिसके क्रियान्वयन पर करोड़ों रुपए खर्च किया जा रहा है। लेकिन इन योजनाओं का प्रतिफल आम जनता को नहीं मिल पा रहा है। हम बात कर रहे हैं केंद्र सरकार की अति महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन स्कीम की। जिसका उद्देश्य हर नागरिक को उसके घर तक पेयजल पहुंचाना है। जिसमें सरकारी स्कूल भी शामिल हैं। इस योजना के तहत अब तक किए गए काम का जो रिजल्ट सामने आया है, वह काफी निराशाजनक है। क्योंकि योजना के तहत निर्माण कार्य पर भारी भरकम बजट तो खर्च कर दिया गया है लेकिन उसकी गुणवत्ता और अपूर्ण कार्य की वजह से कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। साथ ही स्कूलों में पेयजल के लिए जो इन्फ्रा स्ट्रख्र बनाया गया है वह उपयोगविहीन होकर क्षतिग्रस्त हालत में पहुंच गया है। वही कुछ स्कूलों में तो हल्की बारिश में ही छत का प्लास्टर भी अब गिर रहा वही कुछ में तेज बारिश होने पर गिरने की संभावना हैं वही ठेकेदार लगे बिलो को भुगतान निकालने के जुगाड़ में लगे हैं । जिससे अब कार्य की गुडवत्ता को लेकर सवाल उठना लाजमी हैं।
साफ पानी उपलब्ध कराने केंद्र की जल जीवन मिशन से स्वीकृत रनिंग वाटर में गड़बड़ी,कैसे मिलेगा
साफ पानी?
कोरिया जिले में बच्चो को साफ पानी उपलब्ध कराने केंद्र सरकार की योजना जल जीवन मिशन के तहत स्वीकृत रनिंग वाटर कार्य में हर पंचायतो में हर जगह गड़बड़झाला और कम सामग्री लगाकर डण्डी मारने की खबरे कुछ दिन पूर्व जिले में सुर्खियों का मुख्य केंद्र तो रहा ही वही ठेकेदारी से हो रहे कार्य की जिले के अधिकारियों को भनक तक नही थी, जहा कलेक्टर कोरिया ने जाच के निर्देश भी दिए जहा कुछ जगह अनियमितता भी पाया गया व लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग से पूर्व में लगे बिल भी लौटा दिया गया था, किंतु मामला के शांत होने व पूर्व अधिकारी के स्थान्तरण होते ही अब पंचायतो द्वारा लग रहे बिलो व अधिकारियों के मॉनिटरिंग को लेकर भी सवाल उठना लाजमी हैं। क्यो की न्यूनतम बिल 33 हजार व अधिकतम बिल एक लाख बत्तीस हजार तक के लगे हैं वही मूल्यांकन कर्ता अधिकारी निर्माण एजेंसी के बताए अनुसार मूल्यांकन करना बता रहे जब कि निर्माण एजेंसी पर पर गड़बड़झाला का आरोप लगा था। कोरिया जिले के पाचो विकासखंड में स्तिथ 2898 आंगनबाड़ी केंद्र व प्राइमरी-मिडिल स्कूलों में साफ पेयजल उपलब्ध कराने करीब 34.46 करोड़ रुपयों की कार्य योजना बना कर रिपोर्ट सौपी गई जहा इन सभी कार्यो की मंजूरी भी मिली है। जहा पूर्व में यह कार्य लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के द्वारा किया जाना था किन्तु कुछ राजनीतिक दबाव से यह कार्य पंचायत को दे दिया गया वही जिले के पंचायतो में बिना सरपंच के जानकारी के कार्य भी अघोषित ठेकेदारों ने पंचायतो के सचिव के कहने पर कर दिया किन्तु अधूरे कार्य व कम सामग्री लगाकर भी पूरे राशी के भुगतान को लेकर अब यह मामला जिले में सुर्खियों का विषय बना हुआ है ,लेकिन मॉनिटरिंग नहीं होने से अब ठेकेदार अपनी मर्जी से जैसे-तैसे निर्माण कार्य जुगाड़ में करा भी दिये है। भले ही योजना का लाभ बच्चो को भविष्य में मिले या न मिले इन्हें केवल मूल्यांकन कर भुगतान निकालने की जल्दबाजी हैं जिससे अब भुगतान के दबाव में अधिक मूल्यांकन व लगे बिल को लेकर गोलमाल होने की संभावना हैं।
जीवन मिशन के तहत 2898 स्कूल व आंगनबाड़ी केंद्रों का हुआ था चयन
जानकारी अनुसार जल जीवन मिशन के तहत 2898 स्कूल व आंगनबाड़ी केंद्रों का चयन किया गया है। जिसमें 1502 आंगनबाड़ी केंद्र व 1396 प्राइमरी-मिडिल स्कूल शामिल हैं। चयनित शिक्षण संस्थानों की छत पर प्लास्टिक टंकी लगाकर पाइपलाइन के सहारे नल से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाना है। लेकिन क्रियांवयन एजेंसी की लापरवाही के कारण ठेकेदार जैसे-तैसे अपनी मर्जी के हिसाब से काम करा रहे है। इस्टीमेट में प्रत्येक स्कूल में दो हजार लीटर की क्षमता वाली टंकी या एक एक हजार लीटर की दो टंकी लगाई जानी है। लेकिन ठेकेदार सिर्फ एक हजार लीटर वाली टंकी लगा इसमें भी गड़बड़ी करने के फिराक में है। जबकि एक स्कूल में कार्य की लागत 1.36 लाख है। वहीं प्लास्टिक टंकी लगाने व पाइपलाइन-नल फिटिंग व सबमर्सिबल पंप लगाने 49913 रुपए बजट का प्रावधान है। जिसमे में कम लागत की मशीन लगा कर पूर्ण राशि निकालने की सूचना हैं जिससे गड़बड़ी होना स्वाभाविक हैं फिलहाल अधिकांश शिक्षण संस्थानों में टंकी सहित अन्य कार्य कराने के बाद ठेकेदार जा चुके है किन्तु स्टीमेट के अनुसार कार्य नही हुआ है ।वही मूल्यांकन कर्ता अधिकारी बिना पंप व सामग्री के जाच किये ठेकेदार के कहे अनुसार मूल्यांकन भी कर दिए जिससे अब लगे सामग्री के गुडवत्ता को लेकर भी सवाल उठना लाजमी हैं।
सही मॉनीटरिंग का अभाव
जल जीवन मिशन के तहत जिले के प्रत्येक ब्लॉक में काम हुआ है। लेकिन इसके काम की गुणवत्ता से आम जनता संतुष्ट नहीं है। कई बार स्थानीय ग्रामीण जनसुनवाई के माध्यम से इसकी शिकायत कर चुके हैं। जिसके बाद हरकत में आए प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों को मौके पर जाकर निरीक्षण करने के निर्देश दिए। अधिकारी मौके पर पहुंचे भी और ठेकेदार को सही काम करने की हिदायद भी दी। लेकिन बाद में इन कामों की मॉनीटरिंग ठीक से नहीं की गई। यही वजह हैं कि निर्माण कार्य पूर्ण होने पर कोई न कोई कमी सामने आ रही है।जहा अब पानी टंकी के कारण कुछ स्कूलों का प्लास्टर गिरने की नोबत आ गई हैं वही कुछ स्कूलों में प्लास्टर गिर भी चुका हैं किंतु शिकायत के बाद भी सुधार नही।
