देश की औसत बेरोजगारी दर 6.9 प्रतिशत है
रायपुर, 02 अगस्त 2022। पिछले कई महीनो से छत्तीसगढ़ लगातार देश मे सबसे कम बेरोजगारी दर वाले राज्य का गौरव हासिल करता आया है। जुलाई माह मे भी राज्य की बेरोजगारी दर मात्र 0.8 प्रतिशत रही, जबकि देश की औसत बेरोजगारी दर 6.9 प्रतिशत दर्ज की गई। इससे पहले मई माह मे छत्तीसगढ़ की बेरोजगारी दर 0.7 प्रतिशत थी, जबकि तब देश की बेरोजगारी दर 7.1 प्रतिशत दर्ज की गई थी। इससे पहले मार्च और अप्रैल माह मे भी छत्तीसगढ़ की बेरोजगारी दर देश मे सबसे कम 0.6 प्रतिशत थी। सीएमआईई के नये आकड़ो के अनुसार जुलाई माह मे हरियाणा मे 26.9 प्रतिशत, जम्मू और कश्मीर मे 20.2 प्रतिशत, बिहार मे 18.8 प्रतिशत, गोवा मे 13.7 प्रतिशत, त्रिपुरा मे 13 प्रतिशत, दिल्ली मे 8.9 प्रतिशत, पजाब मे 7.7 प्रतिशत, हिमाचल प्रदेश मे 6.3 प्रतिशत, उत्तरप्रदेश मे 3.3 प्रतिशत, गुजरात मे 2.2 प्रतिशत, मध्यप्रदेश मे 2.0 प्रतिशत, बेरोजगारी दर दर्ज की गई।
साढ़े तीन साल पहले मुख्यमत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व मे छत्तीसगढ़ मे नयी सरकार बनने के बाद शहरी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सतुलित करने वाली तथा रोजगार के नये अवसरो का सृजन करने वाली योजनाओ पर शासन का सर्वाधिक जोर रहा। सरकार बनने के तुरत बाद किसानो को से मुक्ति तथा लबित सिचाई कर की माफी से इसकी शुरुआत की गई।
इसके बाद राजीव गाधी किसान न्याय योजना, गोधन न्याय योजना, सुराजी गाव योजना, नरवा-गरवा-घुरवा-बाड़ी कार्यक्रम, राजीव गाधी ग्रामीण भूमिहीन किसान न्याय योजना, नयी औद्योगिक नीति का निर्माण, वन तथा कृषि उपजो के सग्रहण की बेहतर व्यवस्था, उपजो का स्थानीय स्तर पर प्रसस्करण तथा वैल्यू एडीशन, ग्रामीण औद्योगिक पार्को की स्थापना, लघु वनोपजो के सग्रहण दर मे वृद्धि तथा 65 तरह के लघु वनोपजो की समर्थन मूल्य पर खरीद, तेंदूपत्ता सग्रहण पारिश्रमिक दर मे वृद्धि, मछली पालन तथा लाख उत्पादन को कृषि का दर्जा, परपरागत शिल्पियो, बुनकरो तथा उद्यमियो को प्रोत्साहन, हर जिले मे सी-मार्ट की स्थापना जैसे अनेक कदम उठाए गए।
छत्तीसगढ़ ने अपनी रोजगार तथा आय मूलक योजनाओ का लगातार विस्तार किया है। इसी क्रम मे हाल ही मे गोधन न्याय योजना का विस्तार करते हुए गोबर के साथ-साथ गोमूत्र की खरीदी की भी शुरुआत की है। खरीदे गए गोमूत्र से भी खाद तथा कीटनाशको का निर्माण किया जाएगा, जिससे रोजगार के नये अवसरो का सृजन होगा। गाव-गाव मे निर्मित गौठानो को भी ग्रामीण औद्योगिक पार्क के रूप मे उन्नत किया जा रहा है, जहा तेल मिल, दाल मिल, मिनी राइस मिल जैसी प्रोसेसिग इकाइया स्थापित की जा रही है। गौठानो मे विभिन्न उत्पादो का भी निर्माण किया जा रहा है।