- प्रभारी रेंजर के क्षेत्र में चल रहा बिना अनुमति खुदाई का काम,विद्युत लाइन पर रोक,पाइप लाइन के लिए खुली छूट।
- गुरुघासीदास राष्ट्रीय उद्यान के प्रभारी रेंजर तबादला के बाद भी नही छोड़ा पद,पोस्टिंग के बाद भी प्रभार के लिए चक्कर काट रहे रेंजर।
-रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर 27 जुलाई 2022 (घटती-घटना)। क्या आदिवासी वर्ग की विरोधी हो चुकी है राज्य की सरकार और उसी के नक्सेकदम पर भी चल रहा है प्रशासन, ऐसा इसलिए कह सकते हैं की हाल ही में हुए रेंजर पोस्टिंग में रेंजरों की पोस्टिंग तो कर दी गई लेकिन उसके बाद उन्हें पदभार के लिए भटकना पड़ रहा है और इस पूरी गतिविधियों में वन विभाग के उच्चाधिकारी और शासन दोनो की भूमिका संदेहास्पद लग रही हैं ऐसे में दोहरा चरित्र तो यही स्पष्ट करता है की पोस्टिंग महज प्रक्रिया थी जिसे पूरा कर दिया गया लेकिन प्रभार में लाकर अटका देना ही उस पद का असल खेल है जिसके तहत गोपालगांठ और बीच की भूमिका संचालित होती है और जिसे फॉलो करने वाले ही सरकार और सिस्टम में बने हुए रहते हैं। ऐसा ही एक मामला कोरिया जिले का है जहां पर गुरुघासीदास राष्ट्रीय उद्यान के रेहंड वन परिक्षेत्र में जशपुर निवासी ललित साय पैकरा जिनकी सीधी पोस्टिंग रेंजर पद पर वहां हुई है पर रेंजर ललित साय पैकरा शासन से तीन माह पूर्व हुई पोस्टिंग आर्डर लेकर अब तक इसलिए प्रभार और अकाउंट के लिए चक्कर काट रहे हैं क्यों की वहां पर पहले से पदस्थ जुगाड़ वाले डिप्टी रेंजर प्रभार पर बने हुए हैं। पोस्टिंग के कुछ हफ्तों बाद पार्क संचालक द्वारा उन्हें सरकारी वाहन तो दे दिया गया और प्रभारी रेंजर को भी नव पदस्थ रेंजर को प्रभार देने हेतु कह दिया गया था। बावजूद इसके ऐसा क्या हुआ की सरकारी वाहन के बाद उन्हें अब तक अन्य कोई भी अधिकार नही सौंपा गया। तो आपको बताते हैं उसके पीछे की असल वजह पार्क संचालक के मौखिक आदेश के बाद प्रभारी रेंजर को कुर्सी का मोह सताने लगा जिसकी वजह से उन्होंने पहले सीएफ वन्य प्राणी और फिर नेताओं के करीबियों से साधा सीधा संपर्क और प्रभार पर फिर से बैठा दिया गया, मजबूत मिला आश्वाशन और डट गए प्रभारी रेंजर कुर्सी बचाओ अभियान पर सूत्रों की मानें तो पार्क संचालक भी हैं दबाव में इसलिए मजबूर हैं।
गुरुघासीदास राष्ट्रीय उद्धान परिक्षेत्र महुली में मूलभूत आवश्यक सुविधा के विकास में बाधक यहाँ के अधिकारी खुद बने बैठे है जबकि उनका तबादला हुए महीना बीत गया पर अभी तक प्रभारी रेंजर के पद पर शोभमान है, प्रभारी रेंजर वीरेंद्र श्रीवास्तव के जगह पर उद्धान परिक्षेत्राधिकारी ललित राय पैकरा का किया गया, लेकिन आज 4 महीने बाद भी उनको प्रभार तक नही सौपा श्रीवास्तव के खिलाफ कई भ्रष्टाचार की शिकायतों की लंबी सूची है ग्रामीण बताते है कि अपने परिक्षेत्र में आते नही न ही रहते है अपने घर अम्बिकापुर से बैठे बैठाए ड्यूटी कर रहे, यही नही शासकीय वाहन का दूर्यप्रयोग अपने निजी हित के लिए कर रहे, महुली के ग्रामीण बताते है कि यहाँ विधुत नही है विधुत लाइन के लिए पूर्व कलेक्टर रणबीर शर्मा ने कोशिश की थी और आश्वासन भी दिया था, लेकिन उनका कुछ दिन बाद तबादला हो गया.उसके बाद आये कलेक्टर गौरव कुमार ने कोशिश की थी लेकिन प्रतिबंधित गुरुघासीदास उद्धान परिक्षेत्र होने पर बिजली का विस्तार नही हो सका।
दोहरा मापदंड
बिजली पोल लगाने के प्रतिबंध है तो वही पाइप लाइन के लिए खुली छूट है प्रभारी रेंजर की दोहरा नीति मापदंड की सजा ग्रामीण भुगत रहे है जबकि उद्धान परिक्षेत्र में पाईप लाइन की खुदाई के प्रतिबंध है. ग्रामीण बताते है कि कोल्हुआ में पाईप लाइन के लिए जमकर पैसे का बंदरबाट हुआ है।
निर्माण कार्य मे भ्रष्टाचार
पार्क क्षेत्र में किये गए निर्माण में जमकर अनिमियता भ्रष्टाचार किया गया है. ग्रामीणों ने बताया कि बैजंनपाठ जाने मार्ग सड़क निर्माण में अधिकांश जगहों की सड़क बर्बाद हो गई कई जगहों की सड़क गायब हो गई. ग्रामीणों को अभी तक मजदूरी भी नही मिली.इसी तरह एनीकट निर्माण का अधिकारी ने विभाग से पूरा भुगतान प्राप्त कर किया लेकिन उसमें काम करने वाले मजदूरों को अभी तक मजदूरी नही मिला। पार्क क्षेत्र में अधिकारियों की मिली भगत से बड़े पैमाने पर लकड़ी की तस्करी की जा रही है, इस काम मे लगे तस्करों ने खुले आम प्रभारी रेंजर का नाम लेकर लकड़ी तस्करी कराने का आरोप लगा चुके है. पार्क के कर्मचारी तार आपराधिक गतिविधियों सहित मानव तस्करी से भी जुड़े है।
घर बैठे ड्यूटी
अगर घर बैठे ही अधिकारियों का काम हो जाये तो इससे अच्छा क्या है? कुछ ऐसा ही पार्क क्षेत्र में है यहाँ पदस्थ रेंजर किसी विशेष दिन ही आते है नही तो वे अपने घर अम्बिकापुर से ड्यूटी करते आ रहे
तबादला हुआ लेकिन प्रभार नही दिऐ, अंगद की तरह पैर जमे उप परिक्षेत्रपाल वीरेंद्र श्रीवास्तव को प्रभारी रेजर का प्रभार मिला था, जब रेंजर के पद पर रेंजर ललित राय पैकरा की नियुक्ति अप्रैल में विभाग ने की है लेकिन अभी तक प्रभारी रेंजर ने नए नियुक्त रेंजर को प्रभार नही दिया, इसके पीछे क्या कारण है फिलहाल ग्रामीण बताते है कि उनके द्वारा जमकर अनिमियता सहित फर्जीवाड़ा हुआ है जिसके वजह से प्रभार नव नियुक्त रेंजर को नही दे रहे। कितनी अजीब बिडमबना है पार्क क्षेत्र में किस तरह घोटाले अनिमियता भ्रष्ट्राचार व्यापत है एक प्रभारी विभाग के अधिकारी पर भारी पड़ा जिसकी कोरिया सरगुजा सहित सूरजपुर जिले में जमकर चर्चा है।
लूँगा रंगनाध रामकृष्ण गुरुघासीदास राष्ट्रीय उद्यान जिला बैकुंठपुर संचालक
ने बताया कि नव नियुक्त रेंजर को महुली परिक्षेत्र का प्रभार दे दिया गया उन्होंने ले भी लिया है, कल मैं खुद महुली परिक्षेत्र जाऊँगा और समस्याओं की जानकारी लुगा।
नव पदस्थ युवा आदिवासी रेंजर ललित क्यों कर सकते हैं पद से त्याग
आपको बता दें की जब हमने ललित साय पैकरा से उनका पक्ष जानना चाहा और उनकी मनोदशा को आभास किया तो ऐसा प्रतीत हुआ की वो अपनी मेहनत और ईमानदारी से की गई पढ़ाई और योग्यता की बदौलत मिली इस नौकरी पर होती राजनीति और शोषण से बहुत ज्यादा आहत नजर आए। जहां पर उन्हें एक काबिल अफसर का ओहदा मिल तो गया लेकिन उतने ही छलावे और दांव पेंच के उलझनों से उनका, सरकार और सिस्टम दोनो से मोह भंग सा होने लगा। जिसकी पीड़ा और सौतेला व्यवहार उनकी मनोदशा को भी ऐसी स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया है की वो कह दिए की ऐसा ही रहा तो मैं रेंजर पद का त्याग करके अपने घर की खेती बाड़ी से ही अपने परिवार का पालन पोषण करूंगा। उन्होंने कहा की जल्द ही रेंजर एसोसियेशन और सरकार को पत्र से अवगत कराकर त्याग पत्र दे सकता हूं।
भूपेश सरकार अगर आदिवासी विरोधी नहीं होती तो राष्ट्रपति चुनाव में आदिवासी वर्ग की महिला प्रत्यासी के विरोध में समर्थन नहीं देते
मामले की गंभीरता को देखते हुए हमने जब जिले व क्षेत्र के भाजपा नेता व पूर्व मंत्री भईया लाल राजवाड़े से इस पर चर्चा किया तो उन्होंने कहा राज्य की भूपेश सरकार अगर आदिवासी विरोधी नहीं होती तो राष्ट्रपति चुनाव में आदिवासी वर्ग की महिला उम्मीदवार और वर्तमान की महामहिम राष्ट्रपति श्री मति द्रौपदी मुर्मू के विरोध में समर्थन नहीं देते और यशवंत सिन्हा को अपना उम्मीदवार नहीं चुनते। इन्हे सिर्फ और सिर्फ अपने स्वार्थ की राजनीति आती है। कुर्सी का दायित्व धर्म की उम्मीद इनकी सरकार से नही किया जा सकता है। सरगुजा संभाग अंतर्गत राष्ट्रपति दत्तक पुत्र कहे जाने वाले समुदाय को 5 हजार नौकरी की घोषणा जिस तरह धकोशला साबित हुआ है उसी तरह आदिवासी विरोधी चेहरा भी बेनकाब हुआ है। श्री राजवाड़े ने कहा की युवा आदिवासी अफसरों के साथ हो रहे अन्याय के लिए वो राष्ट्रपति को पत्र लिखकर अवगत कराएंगे और इस पूरे समुदाय के अधिकार को सुरक्षित कराने की बात रखेंगे।