वर्ल्ड डेस्क, जेद्दाह 18 जुलाई 2022। पश्चिमी किनारे की यात्रा के दौरान बाइडन ने फिलस्तीनियों के प्रति अपने प्रशासन के अधिक समर्थन की बात कही। उन्होंने फिलस्तीनियों की बदहाली की भी चर्चा की। लेकिन पर्यवेक्षकों के मुताबिक यात्रा के दौरान यह संकेत देने में बाइडन ने कोई कोताही नहीं बरती कि वे इस्राइल के साथ खड़े हैं…अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन की चार दिन की पश्चिम एशिया यात्रा पूरी होने के बाद विश्लेषक अब यह आकलन करने में जुटे हैं कि इस दौरे से बाइडन को क्या हासिल हुआ। आम राय यह उभरी है कि इस दौरान बाइडन अपने ज्यादातर घोषित उद्देश्यों को प्राप्त करने में नाकाम रहे। पश्चिमी यात्रा यात्रा जो बाइडन ने इस्राइल जाकर शुरू की। उसके बाद वे फिलस्तीनी इलाके पश्चिमी किनारा गए। आखिर में सऊदी अरब आए। अमेरिकी मीडिया के एक बड़े हिस्से में बाइडन की इस यात्रा की कड़ी आलोचना हुई है। खुद उनकी डेमोक्रेटिक पार्टी के एक धड़े ने कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने उसूलों से समझौता करते हुए सऊदी अरब की यात्रा की।
बाइडन ने इस यात्रा पर निकलने के पहले अमेरिकी अखबार द वाशिंगटन पोस्ट में एक लेख लिख कर इस यात्रा का कारण समझाया था। उन्होंने कहा था कि पश्चिम एशिया में रूस और चीन के बढ़ रहे प्रभाव को देखते हुए उनका वहां जाना जरूरी है। लेकिन आम राय बनी है कि इस यात्रा से मानवाधिकारों के रक्षक होने का बाइडन का दावा अधिक संदिग्ध हो गया है। सऊदी अरब में उन्होंने वहां के युवराज प्रिंस सलमान से हाथ मिलाया, जिनके बारे में खुद अमेरिकी एजेंसियों का निष्कर्ष है कि अखबार वाशिंगटन पोस्ट के स्तंभकार जमाल खशोगी की उन्होंने हत्या करवाई।
ऐसा लगता है कि इस्राइल से सऊदी अरब के सामान्य रिश्ते बनवाने का बाइडन का मकसद भी इस यात्रा के दौरान पूरा नहीं हो सका। वेबसाइट पोलिटिको.ईयू ने अपने एक विश्लेषण में कहा है कि बाइडन की यात्रा की सबसे बड़ी सफलता यही रही कि सऊदी अरब इस्राइली विमानों के लिए अपने वायु क्षेत्र को खोलने पर राजी हो गया। लेकिन जेद्दाह में हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद सऊदी अरब के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा, इस्राइल के साथ औपचारिक संबंध में उनके देश की न के बराबर रुचि है। जेद्दाह वार्ता में सऊदी अरब इस्राइल के साथ सिर्फ उस हद तक संबंध कायम करने को राजी हुआ, जो उसके फायदे में हैं।
बताया गया था कि बाइडन की यात्रा का मकसद सऊदी अरब को कच्चे तेल के उत्पादन की मात्रा बढ़ाने पर राजी करना था, ताकि पश्चिमी देशों को ईंधन महंगाई से राहत मिले। लेकिन इस बारे में भी कोई ठोस घोषणा नहीं हुई। पश्चिमी किनारे की यात्रा के दौरान बाइडन ने फिलस्तीनियों के प्रति अपने प्रशासन के अधिक समर्थन की बात कही। उन्होंने फिलस्तीनियों की बदहाली की भी चर्चा की। लेकिन पर्यवेक्षकों के मुताबिक यात्रा के दौरान यह संकेत देने में बाइडन ने कोई कोताही नहीं बरती कि वे इस्राइल के साथ खड़े हैं। इसका मतलब यह है कि फिलस्तीनियों को अमेरिका से कोई ठोस नई मदद मिलेगी। यानी यहां भी इस मुकाम पर भी यात्रा की कोई ठोस उपलब्धि नहीं रही।
सऊदी अरब को रूस और चीन के पाले में जाने से रोकने का मकसद भी बाइडन हासिल कर पाए, कहना कठिन है। बाइडन की सऊदी यात्रा पूरी होने के ठीक बाद अमेरिकी टीवी चैनल सीएनबीसी को दिए एक इंटरव्यू में सऊदी अरब के विदेश राज्यमंत्री अदेल अल-जुबैर ने बेलाग कहा कि उनका देश अमेरिका और चीन दोनों के साथ अपने रिश्तों को मजबूत करना जारी रखेगा। उन्होंने कहा- चीन हमारा सबसे बड़ा व्यापार भागीदार है। चीन ऊर्जा का एक विशाल बाजार है और वह सऊदी अरब में एक बड़ा निवेशक है।