कार्टूनिस्ट से नेता कैसे बने थे बाल ठाकरे? इस फिल्म में नजर आया परिवार और पावर

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एंटरटेनमेंट डेस्क, मुंबई 13 जुलाई 2022 फिल्मों और राजनीति का रिश्ता काफी पुराना है। देश के कई बड़े कलाकार राजनीति में अपनी किस्मत आजमा चुके हैं तो वहीं कई राजनेताओं पर फिल्में भी बनाई जा चुकी हैं। इन फिल्मों के जरिए नेताओं के जीवन के उन पहलुओं को दिखाने की कोशिश की गई है जो लोगों की जानकारी में नहीं हैं। बॉलीवुड में ऐसी कई फिल्में हैं जिसमें राजनेताओं के व्यक्तिगत और राजनीतिक जीवन को बड़े पर्दे पर उतारने की कोशिश की गई है। आज इस रिपोर्ट में हम आपको उन्हीं में से एक फिल्म के बारे में बताने जा रहे हैं।

शिवसेना के संस्थापक पर बन चुकी है फिल्म
साल 2019 में शिवसेना के संस्थापक और महाराष्ट्र के बड़े नेता रहे बाल ठाकरे पर बायोपिक बनाई जा चुकी है। इस फिल्म में नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने मुख्य किरदार यानी बाल ठाकरे की भूमिका निभाई थी। फिल्म का निर्देशन अभिजीत पंसे ने किया था। फिल्म को हिंदी और मराठी भाषा में रिलीज किया गया था।
क्या है फिल्म की कहानी?                        
इस फिल्म के जरिए बाल ठाकरे के शुरुआती संघर्ष से लेकर उन्हें शिवसेना क्यों बनानी पड़ी इस बात को बताने की कोशिश की गई है। एक समाचार पत्र में कार्टूनिस्ट से लेकर महाराष्ट्र के सबसे बड़े नेता के रूप में उभरते हुए बड़े पर्दे पर उन्हें बखूबी दिखाया गया है। यह फिल्म उन सभी सवालों का जवाब देने की कोशिश लगती है, जिससे बाल ठाकरे जीवन भर घिरे रहे। जैसे उन्होंने आपातकाल का समर्थन क्यों किया या लोकतंत्र में वह क्यों विश्वास नहीं करते थे।
शिवसेना नेता ने लिखी है कहानी
इस फिल्म को किसी बॉलीवुड के लेखक ने नहीं बल्कि खुद शिवसेना नेता संजय राउत ने लिखा था। संजय महाराष्ट्र की राजनीति का एक जाना पहचाना नाम हैं। वह लंबे समय से शिवसेना से जुड़े हुए हैं। पार्टी में जुड़े होने की वजह से उन्होंने बाल ठाकरे को बहुत करीब से देखा है। यही वजह रही कि इस फिल्म की कहानी लिखने का जिम्मा राउत ने खुद उठाया और निर्देशक अभिजीत पंसे के साथ मिलकर यह फिल्म बनाई। फिल्म में बाल ठाकरे को केवल महाराष्ट्र के मसीहा की तरह दिखाया गया है जोकि दर्शकों को पहले से ही पता है। इसके अलावा फिल्म में कुछ नया नहीं दिखा गया जिसे जानकर लोग हैरान रह जाएं।
नवाजुद्दीन ने की दमदार एक्टिंग
नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने अपनी दमदार एक्टिंग से इस फिल्म में जान फूंक दी थी। इस फिल्म में हर एक सीन में वह हूबहू बाल ठाकरे की तरह नजर आए थे। चाहे वो बाल ठाकरे के हावभाव हो या उनका तल्ख अंदाज हर तरह से उन्होंने इस किरदार के साथ पूरा न्याय किया। दर्शकों को भी उनका यह अंदाज काफी पसंद आया था।
कितनी हकीकत बयां करती है फिल्म
फिल्म में जितनी भी चीजें दिखाई गई हैं वो ठीक हैं, लेकिन फिल्म देखने पर ऐसा लगता है कि केवल शिवसेना की छवि चमकाने के लिए कोई कहानी कही जा रही है। इसमें उन चीजों को वैसा नहीं दिखाया है जिसकी वजह से शिवसेना हमेशा सवालों के घेरे में रही है। यही वजह है कि यह फिल्म हकीकत से थोड़ी दूर और राजनीति से प्रेरित नजर आती है।


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