वर्ल्ड डेस्क, लद्दाख 13 जुलाई 2022। सीमा सड़क संगठन से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक जिन सड़कों को चौड़ा किया जा रहा है या बनाया जा रहा है वह सीधे बॉर्डर तक कनेक्ट हो रहे हैं। योजना के मुताबिक अगले कुछ महीनों में होने वाली बर्फबारी से पहले कुछ सड़कों के निर्माण को पूरा कर लिया जाए। अधिकारियों का कहना है कि बहुत सी सड़कें पूरी होने के कगार पर हैं…अगले कुछ महीनों में लद्दाख के उच्च हिमालयी इलाकों में बर्फबारी शुरू हो जाएगी। जिसके बाद लद्दाख के दुर्गम पहाड़ी इलाकों में सड़क संपर्क के सभी रास्ते बंद हो जाएंगे। लेकिन इस बार ऐसा नहीं होने वाला है। भारी बर्फबारी के बाद भी भारतीय सेना के जवान लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) तक अभी लगने वाले तय वक्त से आधे समय में ही पहुंच जाएंगे। दरअसल बीते कुछ समय से लद्दाख में चीन की तरफ से हो रहीं तनाव बढ़ाने की कोशिशों का जवाब देने के लिए सेना की ओर से चाक-चौबंद बंदोबस्त कर लिए गए हैं। ये बंदोबस्त कई तरह से हो रहे हैं। इसमें रणनीतिक तौर पर सुरक्षा उपायों के साथ-साथ सड़कों से लेकर पुलों तक के नए निर्माण के अलावा लेह से जुड़ने वाले कई कस्बों और गांवों में स्टेट हाईवे बनाने जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं।
तेज गति से हो रहा सड़कों का निर्माण
साल 2020 में जिस तरीके से पैंगोंग झील पर सीमा विवाद हुआ था, तो उसका भारतीय सेना ने मुहंतोड़ जवाब तो दिया, साथ ही सुरक्षा इंतजामों को भी और पुख्ता कर लिया। बीते कुछ दिनों में सीमा सड़क संगठन के बड़े अधिकारियों ने लद्दाख में भारतीय सेना और प्रशासन के साथ मिलकर बैठकें भी की हैं। योजना के मुताबिक मनाली से लेह और लेह से लद्दाख के दुर्गम इलाकों को जोड़ने रास्तों को न सिर्फ चौड़ा किया जाएगा, बल्कि अन्य वैकल्पिक रास्तों को भी बनाया जाएगा। सीमा सड़क संगठन से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक जिन सड़कों को चौड़ा किया जा रहा है या बनाया जा रहा है वह सीधे बॉर्डर तक कनेक्ट हो रहे हैं। योजना के मुताबिक अगले कुछ महीनों में होने वाली बर्फबारी से पहले कुछ सड़कों के निर्माण को पूरा कर लिया जाए। अधिकारियों का कहना है कि बहुत सी सड़कें पूरी होने के कगार पर हैं। सीमा सड़क संगठन इन सड़कों को अप्रैल के महीने से तेजी से बना रहा है। ताकि समय से पहले सड़कों का निर्माण हो सके और भारतीय सेना को सीमा तक पहुंचने में कम वक्त लगे।
2020 में चीन की ओर से की गई नापाक हरकत के बाद भारतीय सेना ने कई इलाकों में न सिर्फ चौकसी बढ़ाई है, बल्कि सुरक्षा के मजबूत प्रबंध भी किए हैं। जानकारी के मुताबिक भारतीय सेना और सीमा सड़क संगठन ने हुंदर, तुर्तुक, हंदनबरोक, केलापास, ज़िंगपाल, और चुशुल डैमचोक इलाके की सड़कों पर तेज़ी से काम शुरू कर दिया है। योजना यही है कि अगले कुछ महीनों में इलाके में होने वाली बर्फबारी से पहले ही इन इलाकों को जोड़ने वाली सड़कें बना ली जाएं। सीमा सड़क संगठन से जुड़े इंजीनियर के मुताबिक वह वक़्त से पहले अपने तय लक्ष्य को पूरा कर लेंगे। जानकारी के मुताबिक निम्मू, पदम और दारचा इलाके में बेहतर रोड कनेक्टिविटी होने वाली है। ये वह सड़कें हैं जो सैन्य टुकड़ियों और रक्षा उपकरणों को लाने ले जाने में बहुत मददगार साबित होती हैं।
भारतीय सेना ने खरीदीं एटीवी
अभी हाल में चीन की सेना की जानकारी सामने आई थी, जिसमें एक सैटेलाइट के माध्यम से इस बात का खुलासा हुआ था कि वो पैंगोंग झील के एक छोर पर पुल बना रहा है। ताकि उसकी सेना का आवागमन मजबूत हो सके। सेना से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं कि चीन की हर नापाक हरकतों के बारे में उनके पास जानकारियां रहती हैं। इसलिए चीन अपने किसी भी मकसद में सफल नहीं हो सकेगा। वह कहते हैं कि भारतीय सेना के जवान चीन के किसी भी गलत कदम का उसकी ही भाषा में जवाब देने में सक्षम हैं। जानकारी के मुताबिक़ भारतीय सेना भी अपनी सुरक्षा के लिए कई नए पुल और ऊंचे-ऊंचे दर्रों पर सड़कों का निर्माण कर रही है। ताकि दुश्मन की किसी भी कार्रवाई को तय वक़्त पर नेस्तनाबूद कर सकें।
लद्दाख के खारदुंग गांव के ताशी लुनडुप कहते हैं कि चीन ने जो हरकत 2020 में की थी, उससे कुछ तनाव तो इलाके में बना हुआ था। लेकिन भारतीय सेना ने चीन को मुंह तोड़ जवाब दिया। ताशी कहते हैं कि तनाव के वक्त बहुत सी पाबंदियां लगाई गईं थीं, लेकिन अब हालात सामान्य हैं। वहीं भारतीय सेना ने बॉर्डर इलाके में पेट्रोलिंग के लिहाज से भी अपनी तैयारियां मजबूत कर ली हैं। भारतीय सेना ने हाल ही में बख्तरबंद वाहनों के अलावा ऑल टैरेन व्हीकल को बॉर्डर इलाके में तैनात किया जाएगा। अभी भी सेना के पास ऐसे वाहन हैं लेकिन अब इनकी संख्या बढ़ाने का फैसला लिया गया है।
व्हाइट हाउस ने इस यात्रा को अमेरिका की पश्चिम एशिया रणनीति का हिस्सा बताया है। लेकिन विश्लेषकों में आम राय है कि इसके पीछे बाइडन का मकसद सऊदी अरब को कच्चे तेल का अधिक उत्पादन करने के लिए राजी करना है। अमेरिका में इस समय तेल और प्राकृतिक गैस की महंगाई आसमान छू रही है। इस कारण बाइडन की लोकप्रियता में तेजी से गिरावट आई है। समझा जाता है कि अगले नवंबर में होने वाले संसदीय चुनावों में सत्ताधारी डेमोक्रेटिक पार्टी को इसकी महंगी कीमत चुकानी पड़ेगी। इसीलिए बाइडन किसी तरह महंगाई की समस्या का समाधान चाहते हैं।
सऊदी अरब तेल के सबसे बड़े उत्पादक देशों में है। साथ ही तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक में उसकी आवाज सबसे ज्यादा मायने रखती है। रूस को भी अपने साथ शामिल कर ओपेक अब ओपेक प्लस के नाम से जाना जाने लगा है। इसी कारण मौजूदा ऊर्जा संकट के बावजूद ये संगठन तेल उत्पादन बढ़ाने पर राजी नहीं हो सका है। बाइडन की कोशिश इसके लिए सऊदी अरब पर दबाव बनाने की होगी। टीकाकारों ने कहा है कि तेल और गैस की महंगाई का हल ढूंढने की कोशिश में बाइडन ने अपने ‘उसूल आधारित’ विदेश नीति से समझौता कर लिया है। अमेरिकी जांच एजेंसियां इस नतीजे पर पहुंची थीं कि प्रिंस सलमान ने ही अखबार द वाशिंगटन पोस्ट के स्तंभकार जमाल खशोगी की हत्या का आदेश दिया था। इसीलिए बाइडन ने उन्हें दंडित करने का वादा किया था। लेकिन यूक्रेन युद्ध छिड़ने के बाद से वे सलमान को मनाने की कोशिश में लगे रहे हैं। अब वे सीधे उनसे मिलने जा रहे हैं।
वाशिंगटन स्थित थिंक कंसल्टैंसी फर्म गल्फ स्टेट एनालिटिक्स में विदेशी नीति एवं ऊर्जा संबंधी वरिष्ठ रणनीतिकार उमुद शोकरी के मुताबिक सऊदी अरब अपने तेल उत्पादन में रोज दस लाख बैरल की बढ़ोतरी करने में सक्षम है। उधर संयुक्त अरब अमीरात रोज तीन से सात लाख बैरल तक तेल का अतिरिक्त उत्पादन कर सकता है। लेकिन यूबीएस बैंक के विश्लेषक गिओवानी स्ताउनोवो ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से बातचीत में कहा कि सऊदी अरब के पास जितनी क्षमता है, वह अपने उत्पादन को उतना बढ़ा चुका है। इसलिए बाइडन को अपनी यात्रा के मकसद में ज्यादा कामयाबी नहीं मिलेगी। स्ताउनोवो के मुताबिक यूएई के पास जरूर कुछ अतिरिक्त क्षमता है। लेकिन उन्होंने कहा कि अगर तेल उत्पादन का बढ़ाने का इन देशों ने फैसला किया भी, तो उससे बाजार में घबराहट बढ़ेगी। आखिर उन देशों का भंडार सीमित है। तब ये आशंका पैदा होगी कि उनका भंडार समय से पहले चूक जाएगा।