छत्तीसगढ़ इलेक्टि्रक वाहन नीति-2022 के परिदृश्य

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आज कल सड़को पर दौड़ती हरे नम्बर प्लेट्स वाले मोटर व्हीकल नये यातायात के युग की ओर इशारा कर रहे हैं। यह एक ऐसा वाहन है जो प्रणोदन के लिए एक या अधिक इलेक्टि्रक मोटर का उपयोग करता है। इसे एक कलेक्टर सिस्टम द्वारा संचालित किया जा सकता है, अतिरिक्त स्रोतों से बिजली के साथ , या इसे बैटरी द्वारा स्वायत्त रूप से संचालित किया जा सकता है। ईवी में सड़क और रेल वाहन , सतह और पानी के नीचे के जहाज शामिल हैं। इलेक्टि्रक वाहनों का प्रादुर्भाव यकायक या अचानक नहीं हुआ है। ईवी पहली बार 19वीं शताब्दी के मध्य में अस्तित्व में आए। जब मोटर वाहन प्रणोदन के लिए बिजली पसंदीदा तरीकों में से एक थी। जो आराम का स्तर और संचालन में आसानी प्रदान करती थी। जो उस समय की गैसोलीन कारों द्वारा हासिल नहीं की जा सकती थी । लगभग 100 वर्षों तक कारों और ट्रकों के लिए आंतरिक दहन इंजन प्रमुख प्रणोदन विधि थे। लेकिन अन्य वाहन प्रकारों, जैसे छोटे वाहनों में उपयोग कर रही है। 21वीं सदी में, ईवीएस ने तकनीकी विकास के कारण पुनरुत्थान देखा है। यह अक्षय ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित किया है और जलवायु परिवर्तन, वायु प्रदूषण और अन्य पर्यावरणीय मुद्दों पर परिवहन के प्रभाव में संभावित कमी आई है।
जहाँ एक ओर पेट्रोलियम जनित वाहनों प्रदूषण सहित बढ़ती महंगाई के दौर में व्यय या आर्थिक क्षय भी बढ़ता दिखाई देता है। वहीं बिजली या रिचार्जेबल सिस्टम से चलने वाले इन व्हीकल के सस्ते ईंधन और पर्यावरण को प्रदूषण को कम करने की उद्देश्यपूर्ण लक्षणों के कारण लोगों के बीच लोकप्रिय हो रहे हैं। वहीं ईवी व्हीकल के कारोबार को कमतर आंकने वालों की कमी भी नहीं है। कुछ हादसों के उदाहरण सहित ईवी के कम दूरी के लिए सीमा बाध्यता को बाजार में प्रासंगिक होने की अवधारणा के मार्ग में रोड़े मानते हैं। लेकिन लगातार बढ़ती महंगाई और पेट्रोलियम के बढ़ते दाम लोगों को नये विकल्पों पर विचार करने के लिए नव आयाम दे रहे हैं।
इसी परिप्रेक्ष्य में राज्य शासन के द्वारा छत्तीसगढ़ ईवी नीति 2022 को मंजूरी दी गई है। जिसके तहत राज्य में आगामी पांच सालों में चार लाख इलेक्टि्रक वाहनों की खरीद का लक्ष्य रखा गया है। निर्धारित तिथि तक ईवी नीति की परिचालन अवधि के लिए ईवी की खरीद पर पंजीकरण शुल्क में छूट का प्रावधान ईवी खरीद को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगें। इस दौरान क्रय और पंजीयन में इलेक्टि्रक बसों की बिक्री पर व इलेक्टि्रक माल ढुलाई वाहन की बिक्री पर सत प्रतिशत एसजीएसटी की प्रतिपूर्ति की जाएगी। ईवी विनिर्माण उद्यम को विकसित करने के लिए राज्य सरकार संयंत्र और मशीनरी की लागत का 25 प्रतिशत अनुदान देगी। ईवी पार्क विकसित करने के लिए 500-1000 एकड़ भूमि आवंटित प्रावधान रखा गया है। यह औद्योगिक पार्क ईवी इको-सिस्टम के निर्माताओं को आकर्षित करेगा। ईवी-पॉलिसी के शुरू होने की तारीख से पहले 2 वर्षों के दौरान खरीदे गए सभी इलेक्टि्रक वाहनों पर रोड टैक्स में सौ फीसदी छूट होगी।
बहरहाल नीति के निर्धारण के उपरांत यदि निवेश और उद्यम की स्तरों का बढ़ना रोजगार नवसृजन के मार्ग को निर्देशन करेंगे। वहीं भावी यातायात के संसाधनों के विकल्प के रूप में बढ़ती ईवी की प्रासंगिक होने की विचारधारा अब चल निकली है। लोगों में ईवी के लिए रुझान भी बढ़ने लगे हैं। जो भावी समय में इलेक्ट्रॉनिक व्हीकलों के मांग और बढ़ाने के लिए आशातीत अवसरों को जन्म दे रहे हैं। स्वच्छ संसाधनों के लिए लोगों में यह कौतूहल भी है की पर्यावरण संरक्षण एवं कम बजट के संसाधनों की यदि उपलब्धता हो, तो पेट्रोलियम जनित वाहनों से जल्द ही किनारा किया जाना निश्चित है। छत्तीसगढ़ में लागू ईवी पालिसी-2022 के प्रासंगिक होने के साथ-साथ ईवी के बैटरी और उसके मानक स्तर की जांच के संदर्भ में कार्य करना भी अति आवश्यक है। क्योंकि इस नव तकनीक में जरा सी चूक भयानक रूप धारण करने में क्षणिक देर नहीं।
पुखराज प्राज
गरियाबंद छत्तीसगढ़


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