बैकुण्ठपुर@क्या दिए गए आवेदनों पर कार्यवाही भी होगी सुनिश्चित या नहीं?

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  • काका आप अपना वादा भूल गए हैंःप्रदुमन कुमार साहू
  • प्रदुमन कुमार साहू ने काका को वादा याद दिलाने लगा तो माइक वापस लेने का निर्देश हुआ जारी।
  • शिकायत करने के लिए उमड़ी भीड़ क्या शिकायतकर्ताओं की शिकायत पहुंच पाएगी मुख्यमंत्री तक?
  • शिकायतकर्ता मुख्यमंत्री को अपनी शिकायत देने पहुंचे पर शिकायत मुख्यमंत्री के हाथों में जाने से पहले टेबल पर इकठ्ठा हो रही थी।
  • मुख्यमंत्री तक शिकायतकर्ताओं को पहुंचने से पहले ही रोका गया,उनकी शिकायत को टेबल पर जमा करा दिया टोकन।
  • शिकायतकर्ताओं और आवेदनकर्ताओं की भारी भीड़, हजारों की तादाद में दिए गए आवेदन।
  • कार्यक्रम समाप्ति के बाद भी हजारों की संख्या में अपना आवेदन जमा कराने के लिए लगी रही भीड़।
शिकायत देते ग्रामीण क्या शिकायत पहुचेगी मुख्यमंत्री के पास

रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर 04 जुलाई 2022(घटती-घटना)।
कोरिया जिले के ग्राम पटना में प्रदेश के मुख्यमंत्री का भेंट मुलाकात कार्यक्रम पूरी तरह मुख्यमंत्री व प्रशासन के नियंत्रण में रहा। माइक केवल उसी को मिल सका जिसे कुछ बोलने के लिए शासन की उपलब्धि बताने के लिए पहले से तैयारी कराई गई थी किसी भी विरोध जैसे विषय को समझते ही मुख्यमंत्री स्वयं माइक से सामने वाले से माइक लेने का निर्देश देते दिखाई और सुनाई दिए, कुल मिलाकर जनता जो शिकायतों या अपनी व्यक्तिगत मांगो के साथ पहुंची थी उसे कुछ भी कहने को नहीं मिला। मुख्यमंत्री ने पटना सहित शिवपुर चरचा में सौगातों की बौछार जरूर कर दी लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों से अपनी मांगों के निराकरण के लिए पहुंचे ग्रामीण निराश होकर वापस लौटे यह देखा गया।
मुख्यमंत्री तुंहर द्वार भेंट मुलाकात कार्यक्रम बैकुंठपुर विधानसभा के पटना और बचरापोड़ी में साढ़े 3 वर्ष के कार्यकाल के बाद जनता से रूबरू मुलाकात के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के भेंट मुलाकात के कार्यक्रम का आयोजन बैकुंठपुर विधानसभा के बचरापोड़ी और पटना में हुआ। भारी बारिश और उसके बाद उमस भरी गर्मी के बावजूद अपनी शिकायतों, मांगो और समस्या निवारण के लिए भारी संख्या में लोग कार्यक्रम में शिरकत किए। कार्यक्रम की रूपरेखा के अनुपात में स्थान कम पड़ गया और लोग पंडाल के भीतर अपनी जगह सुनिश्चित करने के लिए जद्दोजहद करते नजर आए। वहीं दूसरी ओर महिलाओं और बच्चों को उमस भरी गर्मी के कारण परेशान देखा गया। प्रशासन ने जनता की सुविधाओं की व्यवस्था सुचारू रूप से नहीं की थी। पूरे कार्यक्रम के दौरान प्रशासन ने शिकायतकर्ताओं और आवेदन कर्ताओं के लिए अलग से स्टॉल लगाकर कर्मचारी नियुक्त किए थे। परंतु हजारों की संख्या में जब शिकायतकर्ता पहुंचे तो वहां भी भारी अव्यवस्था का आलम देखने को मिला। हजारों की तादाद में प्राप्त आवेदनों से यह परिलक्षित हुआ की सुशासन के दावों के बीच में लोगों की असंतुष्टि ज्यादा है। यहां तक की भेंट मुलाकात कार्यक्रम समाप्ति के बाद भी हजारों की संख्या में अपना आवेदन जमा कराने के लिए लोगों की भीड़ जुटी रही। जो शासन प्रशासन की कार्यशैली पर मुंह चिढ़ा रही थी।

महिलाओं और बच्चों को उमस भरी गर्मी के कारण परेशान देखा गया।

पूरे संवाद की कमान मुख्यमंत्री जी के हाथों में
भेंट मुलाकात के इस पूरे कार्यक्रम के दौरान जनता से संवाद की कमान मुख्यमंत्री जी ने अपने हाथों में ही ले रखी थी। मुख्यमंत्री जी के सवालों पर चुनिंदा लोगों को ही जवाब देने का मौका मिला। यह कहा जा सकता है कि संवाद एक तरफा था जहां जनता टकटकी लगाए अपनी बारी का इंतजार करती रही। लोग अपनी आवाज मुख्यमंत्री महोदय तक पहुंचाने के लिए माइक प्राप्त करने को जूझते रहे, परंतु मौका कुछ चुनिंदा लोगों को ही मिला। मुख्यमंत्री महोदय के समक्ष बोलने के लिए प्रशासन द्वारा प्रशिक्षित लोगों को सामने की ओर बैठाया गया था। जिन्हें सभी प्रकार के सवालों के जवाब देने के लिए हफ्तों से प्रशिक्षित किया गया था। ऐन मौके पर उनमें से कई लोग प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद भी भूल गए कि क्या और कैसे बोलना है। अधिकांश लोगों ने रटा रटाया जवाब देने की कोशिश की, जिसके कारण कार्यक्रम के दौरान कई बार हंसी के फुहारे भी सुनने को मिले।

संवाद की कमान मुख्यमंत्री जी के हाथों में

जन चौपाल केवल घोषणा चौपाल साबित, शिकायतों को रोकने प्रशासन रहा मुस्तैद
मुख्यमंत्री का पूरा कार्यक्रम भेंट मुलाकात कार्यक्रम जो जनता से सीधे संवाद का कार्यक्रम बताकर आयोजित किया गया था केवल घोषणा चौपाल कार्यक्रम साबित हुआ। दूर दूर से अपनी समस्याओं के साथ अपनी बात मुख्यमंत्री तक रखने पहुंचे किसी भी व्यक्ति या महिला को मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी बात रखने का मौका नहीं मिला। मुख्यमंत्री के सामने कोई भी व्यक्ति महिला कोई भी शिकायत न कर सके इसबात को लेकर प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद दिखाई दिया। एक भी शिकायत मुख्यमंत्री तक सीधे न पहुंच सके इसको लेकर प्रशासन सहित पुलिस विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों को सक्रिय देखा गया। मुख्यमंत्री जन चौपाल में किससे करेंगे बात किसे मिलेगा माइक इसको लेकर पहले से ही तैयारी की गई थी। शासन की योजनाओं का बखान साथ ही महिमामंडन करने वालों को बाकायदा प्रशिक्षित करके जन चौपाल में बैठाया गया था और केवल उन्हें ही मुख्यमंत्री से बात करने माइक दिया जा रहा था।
मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में नहीं हुई एक भी शिकायत, नहीं गिरा कोई विकेट
अफसरशाही, भ्रष्टाचार से त्रस्त जनता को भेंट मुलाकात कार्यक्रम से बहुत उम्मीदें थी कि जिले में विभिन्न विभागों में पदस्थ ऐसे अधिकारी, कर्मचारी जिन्होंने जनता की नाक में दम कर दिया है, उनका शिकायत करने का मौका मिलेगा और उनका विकेट भी गिरेगा। परंतु प्रशासन की मोर्चाबंदी के कारण एक भी शिकायतकर्ता की सीधी पहुंच मुख्यमंत्री महोदय तक नहीं बन पाई। हफ्तों पहले से गांव गांव जाकर प्रशासन के अधिकारी इस बात की सुगबुगाहट का पता लगा रहे थे, कि कहां कहां और किसकी शिकायत संभावित है। अब विडंबना यह है कि आवेदन प्राप्त करने वाले स्टाल पर यदि किसी अधिकारी कर्मचारी की शिकायत हुई भी है तो वह मुख्यमंत्री महोदय के संज्ञान में पहुंचेगी भी या नहीं? मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में प्रशासन ने जिस तरीके से अपनी तैयारी शिकायतों को रोकने को लेकर की थी उसका फायदा भी प्रशासन को मिला और एक भी शिकायत मुख्यमंत्री तक सीधे नहीं पहुंच सका, शिकायतों के मुख्यमंत्री तक नहीं पहुंचने की वजह से एक भी निलंबन या स्थानांतरण किसी अधिकारी कर्मचारी का नहीं हुआ और प्रशासन ने चैन की सांस ली।

विश्रामगृह में मुख्यमंत्री से मिलने लगी लंबी कतार,अधिकांश को नहीं मिला मौका

विश्रामगृह में मुख्यमंत्री से मिलने लगी लंबी कतार,अधिकांश को नहीं मिला मौका
मुख्यमंत्री के बैकुंठपुर विश्रामगृह में प्रवास के दौरान और वहां भी भेंट मुलाकात कार्यक्रम आयोजित होने की वजह से देर रात तक लोगो को मुख्यमंत्री से मिलने अपनी बारी का इंतेजार करते देखा गया। विश्रामगृह के सामने लोग इंतेजार करते रहे और अनेक लोगों को मिलने का मौका नहीं मिल सका। मुख्यमंत्री से विश्रामगृह में भी केवल उन्ही से मुलाकात कराया गया जिनके पास शिकायत जैसा कोई विषय नहीं था और जो समाज के प्रतिनिधि थे,अन्य किसी भी याचक को अंदर तक जाने नहीं दिया गया लोग घण्टो इंतेजार करते देखे गए।
यक्ष प्रश्न यह की दिए गए आवेदनों पर कार्यवाही भी होगी सुनिश्चित या नहीं?
जहां एक और लोग अपनी समस्याओं की व्यथा कथा और अपनी मांगों के लिए कागज लेकर हाथ में घूमते नजर आए और आवेदनों को जमा कराया। वहीं दूसरी ओर यक्ष प्रश्न यह है कि इतने भारी तादाद में आए‌ आवेदनों पर निराकरण भी होगा या नहीं? लोग बड़ी उम्मीद से अपने मुख्यमंत्री को अपने समक्ष पाकर अपनी समस्याओं के निदान के लिए एकत्रित हुए थे। जनता आशान्वित थी की अपनी समस्या को आमने-सामने मुख्यमंत्री महोदय के समक्ष अवगत कराएंगे, परंतु आवेदन प्राप्त करने के स्टाल की व्यवस्था को लेकर भी वे आशंकित नजर आये। अब देखने वाली बात यह है कि जनता की समस्याओं का निदान होगा, अन्यथा ढाक के तीन पात की तर्ज पर समस्याएं कागजों में ही काली स्याही के रूप में सिमटी रह जाएंगी।
‌श्रेय की होड़ में जनप्रतिनिधियों तैयार की थी अपनी सूची,पर उनको भी नहीं मिला मौका
मुख्यमंत्री महोदय के आगमन के पूर्व स्थानीय कांग्रेसी जनप्रतिनिधियों और कांग्रेसी नेताओं ने अपनी अपनी मांगों की सूची तैयार की थी। जिसका सोशल मीडिया और होर्डिंग, विज्ञापन के माध्यम से खुब प्रचार-प्रसार भी किया गया था। इसमें चर्चा का विषय यह है कि सभी नेता और जनप्रतिनिधियों की सूची में समानता थी, पर श्रेय लेने की होड़ ने सबको गुटबाजी की प्रतिस्पर्धा में लाकर खड़ा कर दिया था। सब अपने आप को पटना 84 का हितैषी सिद्ध करने के प्रयास में थे और एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे थे। पर इन्हें भी पृथक रूप से मुख्यमंत्री महोदय के समक्ष अपनी बात रखने का मौका नहीं मिला। हालांकि जो मांगे पूरी हुई वह पूर्व निर्धारित थीं, इस कारण कार्यक्रम समाप्ति के बाद श्रेय की होड़ भी समाप्त हो गई।
मंचासीन कांग्रेसी जिलाध्यक्ष का नाम नहीं ले पाए मुख्यमंत्री
कार्यक्रम की शुरुआत में जब मुख्यमंत्री जी ने अपना उद्बोधन प्रारंभ किया तो मंच पर उपस्थित पदाधिकारियों को उनके नाम से संबोधित करते समय मुख्यमंत्री महोदय कांग्रेस के जिलाध्यक्ष श्री नजीर अजहर का नाम नहीं ले पाए उन्हें केवल जिलाध्यक्ष कह कर अन्य पदाधिकारियों का परिचय कराने लगे। यहां तक की स्वर्गीय श्री राजीव गांधी के कार्यकाल में सांसद रहे श्री लाल विजय प्रताप सिंह का भी नाम मुख्यमंत्री महोदय को उन्हीं से पूछ कर लेना पड़ा।

ज्ञापन सौंपने जा रहे भाजयुमो के कार्यकर्ता हिरासत में लिए गए

ज्ञापन सौंपने जा रहे भाजयुमो के कार्यकर्ता हिरासत में लिए गए
जिले के अन्यायपुर्ण विभाजन, बैकुंठपुर शहर में सड़क चौड़ीकरण, नगर पालिका बैकुंठपुर के सीएमओ की शिकायत, जैसे अनेक मुद्दों को लेकर मुख्यमंत्री महोदय को ज्ञापन सौंपने जा रहे भाजयुमो के कई कार्यकर्ता हिरासत में लिए गए। इस कार्यवाही के बाद भाजपा नेताओं एवं अन्य नागरिकों द्वारा चर्चा का विषय यह रहा कि क्या मुख्यमंत्री केवल कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के हैं, अन्य जन सामान्य लोगों के लिए नहीं। जनता के मुद्दों पर तो कोई भी आवाज उठा सकता है इसमें पार्टी का क्या रोल। सोशल मीडिया के माध्यम से इस कार्यवाही का जगह-जगह विरोध भी हुआ।


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