मुबई, 01 जुलाई 2022। महाराष्ट्र मे सियासी घटनाक्रम के मुख्य चेहरे एकनाथ शिदे और उद्धव ठाकरे ही रहे। हालाकि, राष्ट्रवादी काग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार की भूमिका पर भी सभी की नजरे थी, लेकिन गुरुवार को शिदे की मुख्यमत्री के तौर पर शपथ के साथ ही इस उम्मीद का भी अत हो गया। पवार के दावो से लेकर वादे तक सभी असफल साबित हुए। हालात ऐसे बिगड़े कि सत्ता जाते ही आयकर विभाग का नोटिस भी आ गया और अब शिदे के सहारे भारतीय जनता पार्टी की नजरे राकपा प्रमुख के गढ़ सतारा पर भी टिक गई है।
23 जून, गुरुवार को पवार ने मुबई मे एक प्रेस कॉन्फ्रेस की, जहा अपने ‘अनुभव’ के आधार पर सकट से उबरने का भरोसा जताया। उन्होने कहा था, ‘एमवीए ने सीएम उद्धव ठाकरे का समर्थन करने का फैसला किया है। मुझे भरोसा है कि एक बार विधायक मुबई लौट आएगे, तो हालात बदल जाएगे।’ उन्होने कहा था, ‘हमने महाराष्ट्र मे ऐसे हालत कई बार देखे है। मेरे अनुभव से मै यह कह सकता हू कि हम इस सकट को हरा देगे और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व मे यह सरकार आराम से चलेगी।
26 जून, रविवार को भी पवार ने कहा कि हम अत समय तक ठाकरे का समर्थन करेगे। साथ ही उन्होने यह भी कहा था कि बागी विधायको के नए गठबधन की कोई खास महत्व नही है। शुरुआत मे सकट को शिवसेना का आतरिक मामला बताने वाले पवार लगातार एनसीपी की बैठके करते रहे। खबरे आई थी कि उन्होने दिल्ली का दौरा भी किया है।
उद्धव को इस्तीफे से रोका!
मीडिया रिपोर्ट्स मे सूत्रो के हवाले से बताया गया कि ठाकरे इससे पहले भी दो बार इस्तीफा देने का मन बना चुके थे, लेकिन पवार ने उन्हे ऐसा नही करने के लिए मना लिया। इडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, एक नेता ने बताया, ‘पवार ने उन्हे रुकने और जल्दबाजी मे कोई भी फैसला नही लेने के लिए कहा। यह भी बताया गया कि महाविकास अघाड़ी भाजपा के खिलाफ मिलकर लड़ेगी।
शिदे के जरिए गढ़ पर भी फोकस
साल 2014 के बाद से राज्य मे सीएम पद के लिए भाजपा ने ब्राह्मण चेहरे यानी मौजूदा उप मुख्यमत्री देवेद्र फडणवीस को तवज्जो दी। लेकिन अब पार्टी ने शिवसैनिक और मराठा शिदे को बड़ा पद दिया है। खास बात है कि इसके साथ ही पार्टी की नजर मे 32 फीसदी मराठा वोट भी है। खास बात यह भी है कि शिदे पश्चिम महाराष्ट्र के सतारा से आते है और यह पवार का घरेलू मैदान है और इसे वरिष्ठ नेता का गढ़ भी माना जा सकता है।
पहले सत्ता अब नोटिस
सत्ता परिवर्तन के अगले ही दिन पवार के पास आयकर विभाग का नोटिस पहुच गया। साल 2004, 2009, 2014 और 2020 मे चुनाव आयोग को दिए गए हलफनामो की जाच के बाद नोटिस जारी किए गए। हालाकि, राकपा प्रमुख ने इसे ‘लव लैटर’ बताया है। उन्होने केद्र सरकार पर निशाना भी साधा और कहा कि एजेसी कुछ ही लोगो की जानकारी जुटा रही है।
