बैकुण्ठपुर@जिनके लिए हुआ शिविर का आयोजन,उन्हें ही नहीं मिली जानकारी

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जहां आयोजन होना था वहां के कर्मचारियों को एक दिन पूर्व हुई जानकारी।
कार्यक्रम का आयोजन के दिन अतिथियों को किया गया सूचित अतिथियों में दिखा आक्रोश।
चिरायु योजना के तहत बच्चों का इलाज करना था या फिर प्रोपेगेंडा में लाखों खर्च।
कार्यक्रम का आयोजन पटना में टेंट,खान व अन्य समान की खरीदी बैकुंठपुर से स्थनीय व्यापारियों में दिखा आक्रोश।
-रवि सिंह-

बैकुण्ठपुर 11 जून 2022 (घटती-घटना)। कोरिया जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी जो भी कार्यक्रम कराते हैं उसमें उनकी आलोचना ना हो ऐसा काफी कम ही देखा जाता है, एक बार फिर यह आलोचना के शिकार हुए उसकी वजह भी यह खुद है चिरायु योजना के तहत पटना समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बच्चों के जांच कार्यक्रम का आयोजन किया गया पर यह आयोजन जिस दिन होना था उस दिन से 1 दिन पहले समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लोगों को सूचित किया गया, यहां तक की इसकी जानकारी पूरे क्षेत्र के लोगों को भी नहीं मिल सकी, जिस वजह से काफी कम संख्या में बच्चे इलाज के लिए पहुंच परिजन, सूत्रों का यह भी कहना है कि कार्यक्रम में जिन अतिथियों को बुलाना था उन्हें भी कार्यक्रम के दिन ही सूचित किया गया, जिस वजह से अतिथि भी देर से पहुंचे और गुस्से में भी दिखे। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर कार्यक्रम बच्चों के जांच व इलाज के लिए रखा गया था या फिर लाखों रुपए खर्च कर प्रोपेगेंडा कराने के लिए।
मिली जानकारी के अनुसार चिरायु योजना के तहत कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग ने लाखों रुपए खर्च कर दिए इस कार्यक्रम में लगे टेंट से लेकर खाना बैकुंठपुर के एक बड़े होटल से मंगाई गई, कार्यक्रम पटना क्षेत्र का था पर सारी खरीदी बैकुंठपुर से हुई जिसे लेकर भी स्वास्थ्य विभाग की जमकर किरकिरी हुई लोगों का यह भी आरोप था स्वास्थ विभाग काली कमाई के लिए सारी खरीदी बैकुंठपुर से किया गया है ताकि अनाप-शनाप बिल लगाकर पैसे निकाले जा सके, अनुमान लगाया जा रहा है कि इस कार्यक्रम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने लाखों रुपए खर्च किए हैं पर जिनके लिए यह पैसा खर्च हुए जिन्हें इस शिविर व कार्यक्रम में उपस्थित होना था उनमें से काफी कम लोग ही इस में उपस्थित हो पाए इसकी वजह सिर्फ जानकारी का अभाव बताया गया, क्योंकि कार्यक्रम आयोजन करने वाले ही जानकारी बताने में विलंब किए क्योंकि उन्हें खुद नहीं पता था कि उनके समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यक्रम का आयोजन होना है।
144 बच्चों हुई की जांच
स्वास्थ्य केंद्र पटना में चिरायु योजना के तहत 144 बच्चों की जांच हुई थी जिसमें 72 बच्चों का इको व कॉर्डियल जांच किया गया था जिसमें तीन से चार लोग सस्पेक्टेड पाए गए थे, जिनका जांच पुन: किया जाएगा, जांच में कुछ बच्चे का इलाज भी हुआ और कुछ बच्चों का इलाज जिला चिकित्सालय में हो सकता है इसलिए उनका इलाज वहां कराया जाएगा, बाकी बच्चे जिनका इलाज यहां नहीं होगा उन्हें बाहर भेजा जाएगा।
चिरायु योजना क्या है?
चिरायु योजना छत्तीसगढ़ राज्य की स्वास्थ्य योजना है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत चिरायु योजना को सबसे पहले 6 अगस्त 2014 को छत्तीसगढ़ के सत्य साई संजीवनी हॉस्पिटल में लॉन्च किया गया था, इसके बाद 28 अगस्त 2014 को इसे सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ के लिए लॉन्च किया गया। योजना के अंतर्गत 6 से 18 वर्ष तक के बच्चों स्क्रीनिंग की जाती है। यदि इनमें से किसी बच्चे में कोई बीमारी पाई जाती है तो उसका निशुल्क इलाज किया जाता है। बच्चों की स्क्रीनिंग के लिए चिरायु टीम अलग-अलग जगह पर जाकर जांच करती है।
चिरायु योजना का उद्देश्य
कई बच्चे जन्मजात से ही कुछ बीमारीयों के साथ पैदा होते हैं, वहीँ कुछ अशुद्ध भोजन व अन्य किसी कारण से गंभीर बीमारी का शिकार हो जाते हैं। बच्चों का चेकअप न हो पाने की वजह से यह बीमारियां उनके शरीर में धीरे-धीरे बढ़ती जाती हैं और गंभीर रूप ले लेती हैं। इस योजना का उद्देश्य बच्चों की बीमारी को गंभीर स्थिति में पहुँचने से पहले ठीक करना है। योजना के माध्यम से आंगनबाड़ी, स्कूल व अन्य स्थानों पर चिरायु टीम द्वारा जांच केंद्र स्थापित कर बच्चों की स्क्रीनिंग की जाती है।
छत्तीसगढ़ की चिरायु योजना का लाभ
योजना के तहत अलग-अलग स्थानों पर बच्चों की स्क्रीनिंग की जाती है। चिकित्सा विशेषज्ञों द्वारा यह स्क्रीनिंग की जाती है। आंगनबाड़ी सेंटर, प्राइमरी, सेकंड्री, हायर सेकंड्री गवर्नमेंट स्कूलों और रेसिडेंशियल सरकारी स्कूलों में बच्चों की स्क्रीनिंग हेतु जांच केंद्र लगाए जाते हैं। पर इस बार ऐसा कोरिया जिले में देखने को नहीं मिलका, योजना के माध्यम से बच्चों की फ्री स्क्रीनिंग की जाती है। योजना के अंतर्गत 35 तरह की बीमारियों को ठीक किया जाता है, जिसमें आँख से कम दिखाई देना, कानों से कम सुनाई देना, विटामिन की कमी, एनीमिया, ह्रदय रोग, जैसी बीमारियों की पहचान कर उनका इलाज किया जाता है। बीमारी की पहचान होने पर उनका इलाज किया जाता है। यदि कोई बच्चा गंभीर स्थिति में है तो उसे टीम द्वारा तुरंत नजदीकी हॉस्पिटल भेज दिया जाता है। छत्तीसगढ़ के हर ब्लॉक में इस योजना को लागू किया गया है। बीमारी के गंभीर स्थिति में पहुँचने से पहले ही बच्चों का इलाज हो जाता है।


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