- क्या अधिकारी का तबादला जांच प्रभावित करने के उद्देश्य से तो नहीं?
- जांच कर रिपोर्ट देने ही वाले थे हेराफेरी करने वाले का पता भी लग गया था की हुआ तबादला-सूत्र
- कब कौन करेगा यूरिया कालाबाजारी व हेराफेरी मामले की निष्पक्ष जांच, कही दोषियों को बचने की चाल तो नहीं?
- मामले की जांच ठंडे बस्ते में सहकारिता विभाग की कार्यप्रणाली समझ से परे।
-रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर 07 जून 2022 (घटती-घटना)। मामला कोरिया जिले के बैकुंठपुर विधानसभा अंतर्गत सहकारी समिति पटना एवं सहकारी समिति तरगवां का यूरिया की हेराफेरी व कालाबाजारी से जुड़ा हुआ है। विगत वर्ष सहकारी समिति पटना की आश्रित समिति तरगवां में किसानों को यूरिया आवंटन के लिए तत्कालीन समिति प्रबंधक रामकुमार साहू द्वारा परमिट काटे गए थे।परंतु आवंटित यूरिया को संग्रहण, भंडारण और वितरण की जिम्मेदारी संभाल रहे पटना समिति प्रबंधक अनूप कुशवाहा द्वारा किसानों को यूरिया की शार्टेज बताकर प्रदान नहीं किया गया। और यूरिया प्रदाय किए बिना ही समिति प्रबंधक रामकुमार साहू द्वारा किसानों से धान खरीदी के वक्त संपूर्ण ऋण की वसूली कर ली गई। जहां वास्तविक किसानों को समिति द्वारा यूरिया नहीं दिया गया, वहीं कुछ तथाकथित किसान एवं निजी खाद व्यवसाईयों को अनुपात से अधिक यूरिया समिति द्वारा प्रदान करने का मामला भी प्रकाश में आया। मामले की जानकारी संज्ञान में तब आई जब समिति तरगवां में नए समिति प्रबंधक की पदस्थापना हुई और किसान उनसे विगत वर्ष का बकाया यूरिया मांगने पहुंच गए। जिसकी शिकायत समिति प्रबंधक ने उच्चाधिकारियों तक प्रेषित की।
मामले को लगातार दैनिक घटती-घटना ने भी प्रकाशन कर उजागर किया। तब कहीं जाकर सहायक पंजीयक सहकारी संस्थाएं कोरिया बैकुंठपुर के द्वारा शाखा प्रबंधक जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित बैकुंठपुर को मामले की जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई। जिसकी रिपोर्ट 3 दिनों में प्रस्तुत की जानी थी। जैसे ही मामले की शिकायत उच्चाधिकारियों तक प्रेषित हुई वर्तमान समिति प्रबंधक का तबादला कोरिया जिले से सीधे सरगुजा जिले में कर दिया गया। साथ ही विडंबना यह हुई कि जिस अधिकारी को भ्रष्टाचार और कालाबाजारी के मामले की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत कर जिम्मेदारों पर कार्यवाही सुनिश्चित करानी थी, आनन-फानन में सहकारिता विभाग द्वारा उनका भी स्थानांतरण बैकुंठपुर शाखा से चिरमिरी शाखा में कर दिया गया। जो मामले को और भी संदेहास्पद बनाता है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार जांच अधिकारी ने यूरिया की कालाबाजारी और अनियमितता की घटना को सही पाया था, जिनकी रिपोर्ट वे तैयार कर रहे थे परंतु इसी बीच अचानक उनका तबादला हो गया।
सहकारिता विभाग की कार्य प्रणाली समझ से परे और संदेहास्पद
सहकारिता विभाग के अंतर्गत किसानों की सुविधा के लिए जगह-जगह समिति के माध्यम से किसानों को कर्ज, बीज-खाद के वितरण की व्यवस्था और किसानों द्वारा उपार्जित फसल को शासकीय दर पर खरीदने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाती है। इन पूरी प्रक्रिया में समिति में कार्यरत कर्मचारियों की कार्यशैली और उनकी अनियमितताएं कि लगातार शिकायतें बमय प्रमाण होती रहती हैं। जिन पर जांच आयोग भी बैठाया जाता है। परंतु नहीं आती तो किसी जांच की रिपोर्ट और ना हीं सुनिश्चित होती है तो किसी कर्मचारी पर कार्यवाही। जबकि सैकड़ों ऐसे मामले होते हैं जिनमें किसी विशेष प्रमाण के बिना भी कार्यरत कर्मचारियों की गलती प्रमाणित होती है, परंतु अधिकारियों की चुप्पी का आखिर क्या राज है?
निलंबन,बहाली,स्थानांतरण,निलंबन…सवालिया कार्यवाही
सहकारिता विभाग के कर्मचारी जिनका कार्यकाल विवादों में रहा है, परंतु इस बार विवादों से परे खबर कुछ और है। मामला सहकारिता विभाग के समिति प्रबंधक जितेंद्र मिश्रा का है, जिन पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे थे। जिसके एवज में उन्हें विगत वर्ष 2021 निलंबित कर दिया गया था। निलंबन पश्चात जांच आयोग ने अपनी जांच पूरी की और जितेन्द्र मिश्रा को वित्तीय अनियमितताओं के आरोप से बरी करते हुए उन्हें पुन: दिसंबर 2021 में सहकारी समिति पटना में बहाल किया। निलंबन पश्चात बहाली पुन: पटना समिति में होने के पीछे भी एक बेहद अहम वजह यह रहा कि हाईकोर्ट से प्राप्त स्थगन आदेश के तहत समिति प्रबंधक जितेंद्र मिश्रा की पदस्थापना पटना समिति में ही होनी है। इस बीच मुख्य कार्यपालन अधिकारी अंबिकापुर सरगुजा द्वारा दिनांक 25 जनवरी 2022 को जारी एक आदेश के तहत समिति प्रबंधक जितेन्द्र मिश्रा की बहाली पटना समिति में करने संबंधित आदेश में आंशिक संशोधन करते हुए उन्हें सहकारी समिति पटना की ही आश्रित समिति तरगवां में पदस्थापना का आदेश जारी किया जाता है। जिसके बाद समिति प्रबंधक द्वारा जनवरी 2022 से अपनी सेवाएं तरगवां समिति में दी जा रही थी। इसी बीच अचानक उक्त समिति प्रबंधक का तबादला दिनांक 19 मई 2022 को जिले से बाहर नामनाकला अंबिकापुर समिति में बतौर समिति प्रबंधक कर दिया जाता है। तबादला आदेश जिस दिनांक को जारी होता है उस दिन से ही समिति प्रबंधक दिनांक 19 मई 2022 से आकस्मिक अवकाश में होते हैं, उसके पश्चात 21 मई 2022 से चिकित्सा अवकाश में चले जाते हैं। दिनांक 2 जून 2022 को सहकारी सेवाओं के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अंबिकापुर द्वारा समिति प्रबंधक जितेंद्र मिश्रा को निलंबित करने का आदेश जारी किया जाता है,जिसमें यह उल्लेखित किया जाता है कि समिति प्रबंधक को स्थानांतरण आदेश के बाद 23 मई 2022 को सहकारी समिति तरगवां से रिलीव कर दिया गया है, परंतु आज पर्यंत तक नए पदस्थापना स्थल पर ड्यूटी ज्वाइन ना करने के कारण उन्हें निलंबित किया जाता है। सवाल यह है कि एक कर्मचारी जो पहले आकस्मिक अवकाश तत्पश्चात चिकित्सा अवकाश पर है, इस दरमियान स्थानांतरण आदेश जारी होने के पश्चात उसे किस प्रकार एक तरफा रिलीव किया जा सकता है? विधिक जानकारों के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में आकस्मिक या चिकित्सा या अर्जित अवकाश कर्मचारी का अधिकार होता है जिससे उसे मरहूम नहीं किया जा सकता। यदि कोई कर्मचारी चिकित्सीय अवकाश में है तो उसे एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजने के लिए एक तरफा रिलीव नहीं किया जा सकता जब तक कि वह चिकित्सा अवकाश से स्वास्थ्य लाभ लेकर पुन: कार्य स्थल पर उपस्थित ना हो सके। परंतु इस प्रकरण में होने वाली निलंबन की कार्यवाही और निलंबन आदेश में उल्लेखित तथ्यों के अनुसार समिति प्रबंधक जितेंद्र मिश्रा को 23 मई 2022 को कर्तव्य स्थल से भारमुक्त दिखाया गया है, जबकि चिकित्सा आवेदन पत्र के अनुसार समिति प्रबंधक 19 मई 2022 से आकस्मिक अवकाश एवं 21 मई 2022 से चिकित्सीय अवकाश पर हैं।
क्या यूरिया की कालाबाजारी रोकना बना स्थानांतरण एवं निलंबन का मुख्य कारण
स्थानांतरण एवं निलंबन पूर्व समिति प्रबंधक तरगवां जितेंद्र मिश्रा 1 माह पूर्व तब सुर्खियों में आए जब उन्होंने क्षेत्र के एक रसूख दुकानदार एवं सत्ता पक्ष के करीबी को किसानों के लिए आवंटित यूरिया को अवैध रूप से खुले बाजार में विक्रय हेतु देने से मना कर दिया और विगत वर्ष जिन किसानों को बगैर यूरिया प्रदान किए समिति द्वारा ऋण वसूली कर गई थी,के संबंध में उच्चाधिकारियों को पत्र प्रेषित किया था। जिस संदर्भ में दैनिक समाचार पत्र घटती घटना ने लगातार खबरें भी प्रकाशित की थी,जांच आयोग का गठन भी हुआ था। सूत्र बताते हैं कि समिति प्रबंधक का तबादला और वर्तमान में निलंबन की कार्यवाही का यही मुख्य कारण बना। यह भी अपने आप में सत्य है कि उक्त समिति प्रबंधक का कार्यकाल विवादों से भरा रहा है, परंतु वर्तमान में होने वाली कार्यवाही समझ से परे है क्योंकि निलंबन से बहाली के पश्चात विगत 4 माह जब से उन्होंने कर्तव्य स्थल पर अपना कार्य संपादित किया उनके ऊपर किसी प्रकार के कोई आरोप नहीं लगे।