चमचों के राजनीतिक दवाब में अधिकारी क्यों?

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25 की जगह 24 फिट चौड़ड़ाई में हो रहा निर्माण,प्रशासन जान रहा नियम से हो रहा निर्माण,फिर मौन क्यों दवाब किसका?
-रवि सिंह-

बैकुण्ठपुर 30 मई 2022 (घटती-घटना)। जिला कोरिया मुख्यालय बैकुन्ठपुर में उषा वशिष्ठ के नाम जमीन को लेकर निर्माण को रोकने के लिए अवैध रूप से बैकुन्ठपुर तहसीलदार के उपर पार्टी का दवाब देकर गलत रूप से स्टे दिया गया, वशिष्ठ टाइम्स के संपादक जब तहसीलदार के पास पहूंचे तो कहा गया कि जब आवेदक अपनी स्वयं की 25 फुट चौडाई को छोडकर 24 फुट पर अपना निर्माण कर रहा है तो तहसीलदार के द्वारा कहा गया कि मैं स्टे हटा दूंगा। स्टे को लेकर अनावेदक प्रभाकर डबरे काम करने वाले लेबरों व महिला रेजाओं को गंदी-गंदी गाली-गलौज जातिगत दिया गया, महिला रेजाओं को थाने में बैठे संपादक ने सिटी कोतवाली बुलाया जिसमें लिखित रूप से शिकायत किया गया तो पुलिस स्पेक्टर पैकरा के द्वारा काम करने वाली रेजाओं को अलग से बैठाकर 1 घंटे तक उनको बरगलाया और कहा कि तुम लोंग रिर्पोट मत लिखाओं व धमकाया गया कि कार्यवाही नही चाहते रेजा पढे लिखे नही थे व स्पेक्टर द्वारा लिख दिया गया कि ये कोई कार्यवाही नही चाहते, क्योकि आशीष डबरे का राजनीतिक दवाब इतना बढ़ चुका है इसको किसी भी पार्टी से कोई लेना देना नही है, पूर्व में ये एक खेल मंत्री से भी सटा था, अब आशीष डबरे कांग्रेस पार्टी का नेता बनकर अपना अवैध व्यापार चला रहा है इस पर एक सूट करती कहावत है कि अपना काम बनता भाड में जाए पार्टी।
रमेश चन्द्र वशिष्ट का कहना है की एैसे ही अवैध कारनामों से करोडों का आसामी बन चुका है एक शोसल मीडिया में समाचार पढा गया था कि वार्ड न0-1 में पार्षद के पद पर करोडों खर्च करने के बाद भी पार्षद चुनाव नही जीत पाया तो एैसा व्यक्ति पार्टी में रहकर पार्टी को कितना नुकसान पहुंचा सकता है व पार्टी के वरिष्ट लोगों को कितनी हानि हो सकती है लोगों में चर्चा का विषय है जैसे नाली में दुर्गध लोगों को पसंद नही वैसे ही जनता एैसे चमचों को पसंद नही करती। बैकुन्ठपुर प्रशासन पर एैसे चमचों का दवाब देकर अवैध रूप से तहसीलदार द्वारा दवाब में आकर स्टे दिया गया, जबकि आवेदिका अपनी 25 चौडाई की जगह 24 में निर्माण कर रहीं हैं और अनावेदक अपनी चौडाई 20 की जगह 23 में निर्माण किया गया क्योकि राजनीतिक को लेकर प्रशासन पर दवाब रहा। दिनांक 26-05-22 को शाम लगभग 5 बजे प्रभाकर डबरे पिता संतोष डबरे, पत्नी कल्पना डबरे, लडका रोहित डबरे भतीजा आशीष डबरे चारों के द्वारा घर के पीछे से संपादक व आवेदिका के साथ अभ्रद्र व्यवहार व जान से मारने की धमकी गाली-गलौज व मारपीट किया गया, जिसमें आवेदिका को चोट आई है क्या तहसीलदार अपनी कलम का दुरूपयोग करते हुए संपादक के परिवार को खत्म कराने का संकल्प लिए है?
इस बात को लेकर सिटी कोतवाली संपादक गए तो थाने में रिर्पोट दर्ज नही हुई, जिसकी शिकायत पुलिस अधीक्षक को मोबाइल द्वारा बताया गया कि आवेदिका अपने हद की जमीन को निर्माण को लेकर मजदूरो एवं संपादक के परिवार को लेकर जानलेवा हमला किया गया, क्योंकि आशीष डबरे शातिर बदमाश किस्म का व्यक्ति है इसके उपर पूर्व में भी कई शिकायत किया गया पर कोई भी मामला दर्ज नही हुआ। एक कहावत है कि हराम का पैसा कहीं मंदिर, मस्जिद में भी नही स्वीकारा जाता। इसी तरह रोहित डबरे द्वारा धान खरीदी में भी हेरा-फेरी किया गया था पर उस पर भी कोई कार्यवाही न होकर लीपापोती कर दिया गया। प्रशासन सब देखकर भी मौन क्यों है किस दवाब में?


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