बैकुण्ठपुर@राजस्व विभाग नियमों की धज्जियां उड़ा रहा है:रमेश चन्द्र वशिष्ठ

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कोरिया प्रशासन का सच से नहीं सिर्फ गलत कार्य करने वालों से वास्ता
रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर 29 मई 2022 (घटती-घटना)।
जिला मुख्यालय बैकुन्ठपुर में नियम अनुसार जब कोई अनुभागीय दण्डाधिकारी के यहां पर आवेदिका की निस्तार की जमीन जो कि सन् 84 से कच्चे मकान का पानी के निस्तार को लेकर अनावेदक के कार्य को रोकने के लिए स्ट्रे दिया गया था, उस स्ट्रे के बावजूद गुंडों के बल पर निर्माण कार्य कराया गया क्या ऐसा करने का कोई नियम है? जबकि प्रभाकर डबरे की जमीन 20 बाई 60 है पर प्रशासन के देख रेख व छत्र छाया में 23 बाई 60 पर अवैध निर्माण कैसे हुआ? सोचने वाली बात है बैकुन्ठपुर अनुभागीय दण्डाधिकारी के यहां जमीन को लेकर स्ट्रे मिला हुआ था पर स्ट्रे हटाने का न तो आवेदक को पता चला न उसके अधिवक्ता को पता चला। क्या इस बात की जानकारी आवेदक को देना का नियम नहीं है?
आवेदक का आरोप है की मालूम नही कि राजनीतिक दवाब में कौन सा व किस तरह का लेन-देन हुआ की राजस्व विभाग गलत करने पर अमादा है, यह एक एैसा विभाग है जिसमें उदाहरण के तहत अशोक सोनी प्रेमाबाग निवासी से अश्विनी भगत ने फ्री होल्ड के जमीन के एवज में बीस हजार रूपए की मांग किया गया था, शपथ पत्र के द्वारा व आवेदन के द्वारा कोरिया कलेक्टर को आवेदन भी दिया गया था पर सोचने वाली बात है कि प्रशासन द्वारा आज तक कोई कार्यवाही नही हुई, कोरिया प्रशासन का साथ सच के साथ नही गलत कार्य करने वालों के साथ है इन के ऊपर कार्यवही करने वाला कोई नहीं है यह भगवान बन बैठे है।
आवेदिका के पति सच्चाई को लेकर कोरिया कलेक्टर के परिषद के पास एवं एसडीएम परिषद के बाहर धरने पर बैठे थे पर कोरिया प्रशासन द्वारा सिर्फ आश्वासन ही दिया गया कोई भी कार्यवाही नही हुई, कोरिया कलेक्टर के निर्देशन पर तहसीलदार, नायब तहसीलदार, आरआई व पटवारी के द्वारा निरक्षण किया गया, निरक्षण के पश्चात आवेदिका को स्ट्रे दिया गया, अनावेदक का निर्माण कार्य रोकने के लिए पर तीन बार स्ट्रे मिला मिलने के बाद भी तीन मंजिला मकान बनकर खडा हो गया सवाल है कैसे, अब आवेदिका अपनी स्वयं की जमीन में नियमानुसार लगभग 800 फुट में नवनिर्माण करा रहीं हैं तो बैकुन्ठपुर तहसीलदार के यहां अनावेदक द्वारा झूठा आवेदन देकर यह बतया गया की 2 हजार वर्गफुट में कब्जा कर निर्माण कराया जा रहा है, पर तहसीलदार ने बिना किसी भी जांच के सारे नियम ताक पर रखकर अनावेदक को आवेदिका के विरूद्व तुरंत स्ट्रे दे दिया, सोचने वाली बात है कि तहसीलदार महोदय ने किस नियम के अंतर्गत किस के दवाब में गलत स्ट्रे दिया? इसकी विस्तार से जानकारी सरगुजा संभाग आयुक्त को लिखित रूप से आवेदन दिया गया है अवैध नोटिस को लेकर आवेदिका के पति वशिष्ठ टाइम्स समाचार पत्र के संपादक है तो पुलिस प्रशासन पत्रकार का नाम सुनकर उतावला हो जाता है।


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