क्या कोरिया जिले में सडक़ विभाग के मर्जी से नहीं ठेकेदार के मर्जी से बनेगी?
क्या ठेकेदार को जिधर लाभ होगा उधर बना देगा सड़डक़?
ठेकेदार पर होनी चाहिए कार्यवाही,संलिप्त अधिकारियों को भी बख्शा नहीं जाना चाहिए- ग्रामीण।
सडक़ बनाने की स्वीकृति कहीं और की ठेकेदार ने बना दिया कहीं, विभाग बना रहा मूकदर्शक।
पीडब्ल्यूडी विभाग का कारनामा सडक़ का निर्माण करना था कंचनपुर,सत्तीपारा व कूड़ेली।
ठेकेदार ने सडक़ का निर्माण कर दिया चारपारा से कूड़ेली पहुंच मार्ग व चारपारा से नरकेली पहुंच मार्ग।
ठेकेदार अपने मर्जी से जहां मन किया वहां सड़डक़ बना निर्माण कार्य कर लिया पूरा।
जहां सडक़ बनना था वहां के लोगों ने सडक़ चौड़ा होने की चाहत में अपने घरों का अतिक्रमण हटा लिया।
सडक़ बन गई कहीं और कि जहां बननी थी सड़डक़ बनी ही नहीं।
-रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर 25 मई 2022 (घटती-घटना)। पीडब्ल्यूडी विभाग के बैकुंठपुर क्षेत्र में 9 करोड़ 12 लाख की लागत से कंचनपुर, सत्तीपारा व कुड़ेंली पहुंच मार्ग का निर्माण होना था, जिसके लिए विभाग ने प्रशासनिक स्वीकृति भी दी थी ठेकेदार ने इस सडक़ को बनाना प्रारंभ भी किया, सडक़ का निर्माण शुरू होने के दौरान सडक़ के किनारे फंस रहे घर के लोगों को चेतावनी भी दी थी जिसके बाद गांव के लोगों ने स्वेच्छा से सडक़ के किनारे का अतिक्रमण हटा लिया था और सडक़ बनने का इंतजार करने लगे थे, उधर ठेकेदार ने उस सडक़ को छोड़ दूसरी तरफ सडक़ बनाकर सडक़ का निर्माण कार्य पूरा कर लिया, जिस सडक़ को जहां बनना था वहां ना बनकर वह सडक़ ठेकेदार के मर्जी से कहीं और बन गई, स्वीकृति आदेश में सडक़ का निर्माण कार्य का नाम कंचनपुर सत्तीपारा कूड़ेली नाम दिया गया पर यह सडक़ इन तीनों को कहीं से भी नहीं जोड़ती, यह सडक़ जो बनी है यह चारपारा से कूड़ेली पहुंच मार्ग तो वही नरकेली पहुंच मार्ग तक बनाकर निर्माण कार्य पूरा कर दिया गया, सवाल यह है जिस सडक़ को जहां के लिए स्वीकृत किया गया था, आखिर यह सडक़ वहां क्यों नहीं बनी? क्या ठेकेदार के पास इतना अधिकार है कि अपनी मर्जी से सडक़ को जहां चाहेगा वहां बना लेगा? क्या जिम्मेदार अधिकारी ऐसा करने की अनुमति ठेकेदार को दे सकते हैं? यह एक बहुत बड़ा सवाल व जांच का विषय बन चुका है पर अब सवाल यह है कि जहां सडक़ बनी थी वहां सडक़ नहीं बनी अब क्या इसके लिए विभाग फिर से टेंडर निकालेगा।
क्या ठेकेदार जहां चाहेंगे वहां सडक़ बनाएंगे
पीडब्ल्यूडी विभाग का सडक़ ठेकेदार ने अपनी मर्जी से जहां चाहा वहां बना दिया, जहां बनना था जहां के लिए सडक़ निर्माण की स्वीकृति थी वहां तक सडक़ नहीं बन पाई, सडक़ को जिधर नहीं जाना था सडक़ का निर्माण उधर हो गया, बताया जा रहा है कि ठेकेदार ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि मिट्टी का काम ज्यादा करना था जो उधर नहीं हो सकता था, जिस वजह से ठेकेदार को नुकसान हो सकता था, अपने नुकसान को फायदे में बदलने के लिए ठेकेदार ने सडक़ ही बदल दी, लेकिन सवाल यह उठता है कि ऐसे समय पर जिम्मेदार अधिकारी व विभाग क्या कर रहा था जब ठेकेदार ऐसा कर रहा था, आखिर किस के सह पर ठेकेदार ने इतना बड़ा कदम उठाया यह जांच का विषय है।
ग्रामीण कर रहे कार्यवाही की मांग
अब पूरे मामले में क्षेत्र के ग्रामीण ठेकेदार सहित विभागीय अधिकारियों पर कार्यवाही की मांग कर रहें हैं,ग्रामीणों का कहना है खासकर उन ग्रामीणों का जिनके गांव से होकर सड़क गुजरनी थी कि आखिर जिस सड़क को उनके गांव से होकर जाने की निविदा हुई थी उसे एकाएक दूसरी तरफ से कैसे बना दिया गया,वहीं ग्रामीण यह भी कह रहे हैं कि उनके सड़क पर पड़ रहे अतिक्रमण को जल्दबाजी में फिर क्यों हटवाया गया। ग्रामीण केवल अब कार्यवाही की ही मांग कर रहें हैं।

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