नई दिल्ली 19 मई 2022(ए)। इंद्रधनुषी रंगों वाला शरीर. बेहद छोटे और मासूम चेहरे वाले इन पक्षियों को आम भाषा में लोग लव बर्ड्स बुलाते हैं. लेकिन असल में ये तोता है. लोग इन्हें प्यार से अपने घरों में भी पालते हैं. लेकिन इनकी एक खासियत देखकर वैज्ञानिक हैरान हो गए. ये पर्वतारोहियों की तरह किसी जगह पर चढ़ते हैं. ये तीन पैरों का उपयोग करते हैं. आप दंग रह जाएंगे जब इनके तीसरे पैर के बारे में जानेंगे
बराबर हिस्से में बंटे शरीर वाले को बाइलेटरल बॉडी कहते हैं. इंसान, बंदर, कछुए और पक्षी इसी में आते हैं. और भी कई जीव हैं लेकिन फिलहाल हम इस तोते के बारे में बात करते हैं. ये तोता अपने दो पैरों के सहारे चलता है. एक के बाद एक करके दोनों पैरों का उपयोग करता है. लेकिन यह चाल हॉरीजोंटल यानी मैदानी या प्लेन सतह पर होती है. अगर इसे ऊंचाई पर चढऩा होता है, तब ये अपने ‘तीसरे पैर’ का उपयोग करता है.
यह एक विकसित होती हुई शारीरिक तकनीक है. जो भविष्य के पक्षियों में भी विकसित हो सकती है. इस तोते की चोंच (क्चद्गड्डद्म) इतनी मजबूत होती है कि ये ऊपर चढ़ते समय चोंच को हुक की तरह फंसाते हैं. फिर नीचे से पैरों के सहारे ऊपर चढ़ते हैं. जैसे पर्वतारोही पहाड़ पर चढ़ते समय पहले हुक फंसाते हैं फिर पैरों से ऊपर चढ़ते हैं. यह एक बेहद शानदार तरीका है किसी तरह का नया बायोलॉजिकल ट्रेंड सेट करने का. इन तोतों की चाल के बारे में वैज्ञानिकों ने द जर्नल प्रोसीडिंग्स ऑफ द रॉयल सोसाइटी बी में रिपोर्ट प्रकाशित की है. सिर्फ यही तोता नहीं बल्कि पक्षियों की कुछ और प्रजातियां भी हैं, जो इस तरह से पेड़ों या किसी अन्य वर्टिकल जगहों पर चढ़ती हैं. ये चोंच को अपने तीसरे पैर की तरह यूज करती हैं. तोते की कई प्रजातियां है. कई तोते इस तकनीक का उपयोग करते हैं. ये बात लव बर्ड्स पर स्टडी करने के बाद नोटिस की गई.
न्यूयॉर्क इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में एनाटोमी के असिसटेंट प्रोफेसर माइकल ग्रानाटोस्की ने बताया कि प्रकृति ने किसी भी जीव को तीन पैर की सुविधा नहीं दी है. इसलिए कई जीव अपने हाथ-पैर-चोंच या किसी अन्य अंग की मदद से चलने-फिरने में सहूलियत हासिल करते हैं. हमारी धरती पर मौजूद जीवों की दुनिया में बाइलेटरल बॉडीज पर ज्यादा फोकस किया गया है. ज्यादातर जीवों का शरीर संतुलित तरीके से दो हिस्से में बंटा है. ताकि शरीर में किसी अनचाहे अंग का विकास न हो. ये जैविक रूप से जरूरी है.
सिर्फ तोते ही नहीं. कुछ जीव तो पांचवां पैर भी विकसित कर चुके हैं. जैसे- ऑस्ट्रेलिया में कंगारू. कंगारू जब धीरे-धीरे चलता है तब वह अपने निचले दोनों पैरों के अलावा अपनी पूंछ की मदद से कूदता है. पूंछ से खुद को उछालने में मदद लेता है. यही काम ये लव बर्ड्स तोते भी करते हैं. डॉ. ग्रानाटोस्की और उनकी ग्रैजुएट स्टूडेंट मेलोडी यंग ने बताया कि वो लोग छह लव बर्ड्स लेकर अपनी प्रयोगशाला में आए. इनकी लैब में वर्टिकली चढऩे के लिए कुछ जगहें बनाई गई थीं. इनपर सेंसर्स लगे थे. ताकि चोंच और पैरों से लगाए जा रहे फोर्स की गणना और दिशा का पता लगाया जा सके. वैज्ञानिकों ने देखा कि तोते अपने चोंच को हुक की तरह फंसाकर उसपर शरीर का हल्का सा वजन डालते हैं, फिर पैरों से ऊपर चढ़ते हैं. मेलोडी ने बताया कि इन छोटे तोतों के लिए चोंच का उपयोग करना एक बहुत बड़ी उपलब्धि है. क्योंकि जब आप गुरुत्वाकर्षण के विपरीत ऊपर की तरफ जाते हैं, तब आपको आपके शरीर का भार ले जाना होता है. ये बड़ा भारी काम होता है. इसलिए पैरों के साथ-साथ उन्होंने चोंच को भी विकसित कर लिया है. ये उनकी चाल में तेजी लाता है. या फिर पैर में चोट लगने पर चोंच चढऩे में मदद करती है. डॉ. ग्रानाटोस्की ने बताया कि तोते चोंच को पैर की तरह इसलिए उपयोग करते हैं क्योंकि वो कठफोड़वा या नटहैचेस पक्षी की तरह तनों और शाखाओं के नीचे नहीं लटक सकते. या ज्यादा देर वर्टिकल सतह पर टिक नहीं सकते. तोते अपने दोनों पैरों का उपयोग अल्टरनेट करते हैं, जैसे इंसान करता है. इसलिए उन्होंने अपनी चोंच को तीसरे पैर की तरह विकसित किया है. क्योंकि उनके शरीर में ऐसी कोई चीज नहीं है.
