पत्रकार विपक्ष की भूमिका में झेल रहें हैं सत्तापक्ष का एफआईआर वाला प्रहार

Share

जनता से रिश्ता सरकार व लोकतंत्र के चौथे स्तंभ दोनों का पर निर्भर है सिर्फ एक
जनता से रिश्ता सरकार व लोकतंत्र के चौथे स्तंभ दोनों का पर निर्भर है सिर्फ एक
सत्ता और सत्ता पाकर ठेकेदारी करने वाले नेताओं से जनता है परेशान
चुनाव पैसों के दमपर लड़ना है इसलिए जारी है केवल कमाई का अभियान
उपलब्धियों और जनसरोकारों से अब नेताओं को नहीं है कोई सरोकार
वोट पैसों कर दमपर मिलेंगे यही है आजकल नेताओं का मनोबल और विश्वास।

-:रवि सिंह कटकोना कोरिया छत्तीसगढ़:-

भारत को आजाद हुए 7 दशक से अधिक समय बीत चुका है, इस बीच राजनीति में सत्ता व विपक्ष हमेशा एक सिक्के के दो पहलुओं की तरह काम किया करते थे, सत्ता यदि अपने नशे में चूर होती तब नशा तोड़ने का काम विपक्ष किया करता था और विपक्ष भी यदि फेल हो जाता था तो क्रांतिकारी रूप में समाजसेवी यह काम किया करते थे, इस समय की राजनीति में यह दोनों चीजें नहीं देखने को मिल रही, विपक्ष 15 साल बाद सत्ता से बाहर हुआ तो ऐसा लग रहा है कि 15 साल की थकान मिटा रहा है थकान को मिटाने के लिए पुरे 5 वर्ष वधब आराम करेगा, विपक्ष 3 वर्षों बाद भी प्रदेश में जनता के मुद्दों को उठाने पर नहीं सत्ता से लोगों को त्रस्त होता देखने में ज्यादा मस्त दिख रहा है, सत्ता भी जिस कदर चल रही है उसमें समाजसेवी भी सत्ता से लड़ने की हिम्मत नहीं है कर पा रहें हैं, लेकिन किसी तरह जो भी लोग आंदोलन कर सरकार को उसकी गलतियां दिखा रहे हैं उन्हें सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोग कुचलने का प्रयास कर रहे हैं, ऐसे कई उदाहरण छत्तीसगढ़ में देखे जा चुके हैं किसान आंदोलन, संविदा विद्युत कर्मियों के आंदोलन को पूरी तरह कुचला गया, वही आंदोलन का दौर अभी भी जारी है हर विभाग के कर्मचारी अभी भी आंदोलनरत हैं उधर लोकतंत्र का चौथा स्तंभ अपने कुचले जाने को लेकर आंदोलन में आने को तैयार है, यही वजह है कि अब लोकतंत्र का चौथा स्तंभ विपक्ष व क्रांतिकारी की भूमिका निभा रहा है पर सवाल वही हैं कि क्या लोकतंत्र का चौथा स्तंभ सत्ता बन सकता है? जवाब नहीं! सत्ताधारी तो विपक्ष को ही बनना होता है।

लोकतंत्र का चौथा स्तंभ लोगों के मुद्दे को उठाते हुए विपक्ष की भूमिका के लिए तैयार तो है लोकतंत्र का चौथा स्तंभ निष्पक्ष भी होता दिख रहा है पर इस निष्पक्षता में उनकी संख्या बल कम है, जिस वजह से सत्ता चौथे स्तंभ को कुचलने का प्रयास कर रही है लोगों के मुद्दे उठाने में लोकतंत्र कुचला जा रहा है। आज लोकतंत्र में लोकतंत्र का चौथा स्तंभ सत्ता के लिए विपक्ष है यदि वह निष्पक्ष है। विपक्ष की बजाए सत्ता के हाशिये पर है यदि वह निष्पक्ष है। लोकतंत्र का चौथा स्तंभ यदि जरा भी चाटुकार है सत्ता समर्थक और सत्ता का गुणगान करने वाला है पुरुस्कार का भागी है यदि जरा भी निष्पक्ष है एफआईआर उसके हिस्से का उपहार है और यही सत्ता का वर्तमान में प्रचलित सिद्धांत है। सत्ता पाने की आस में सभी की दौड़ है सत्ता मिलने तक वादों और घोषणाओं की बौछार है लेकिन जैसे ही सत्ता मिलती है ठेकेदारी है और सभी नेता ठेकेदार हैं। आजकल सत्ता से जुड़कर ठेकेदारी करने का जो जुनून नेताओं में है वह उन्हें जनसरोकारों से दूर कर चुकी है वहीं सत्ता में आते ही नेताओं की सोच भी विचित्र है उन्हें लगता है कि आगे पैसों से ही सत्ता मिल सकेगी इसलिए ठेकेदारी इतनी करो कि इतने बड़े बन सको की कुछ भी खरीद सको भले ही वह जनता का मत ही क्यों न हो जो आने वाले समय मे सत्ता प्राप्ति के लिए जनता से लेना है। आज लोकतंत्र में सत्ताधारी के लिए विपक्ष केवल लोकतंत्र का चौथा स्तंभ पत्रकारिता है और वही पत्रकार विपक्ष है जो निष्पक्ष हैं। पत्रकारों में से उनकी चांदी है सत्तापक्ष के साथ हैं और उनके मनमुताबिक खबरों का प्रकाशन कर रहें हैं। जिन पत्रकारों द्वारा सच और निष्पक्ष पत्रकारिता की जा रही है उनके ऊपर एफआईआर दर्ज करने से भी सत्तापक्ष के लोगों को गुरेज नहीं। कुल मिलाकर वादों और घोषणाओं की बजाए आने वाले समयों में चुनाव पैसों के दमपर लड़ें जाएंगे यह तय नजर आने लगा है वह भी सत्तापक्ष के नेताओं की गतिविधियों को देखकर। जनता के मत को खरीद लिया जाएगा और वह बिकने तैयार रहेगा यह भी सत्तापक्ष की मंशा को देखकर साफ झलकने लगा है। सत्ता सिर्फ इस बात पर चल रही है कि सिर्फ लोगों तक उसकी अच्छाइयां ही पहुंचे उसकी बुराइयां पहुंचाने वालों की खैर नहीं, क्योंकि वह मानते हैं कि उनमें कोई बुराइयां है ही नहीं वह जो कर रहे हैं सबसे अच्छा कर रहे हैं, उससे ज्यादा अच्छा कोई नहीं कर सकता पर उनकी बुराइयां सिर्फ एक ही सामने ला रहा है वह लोकतंत्र का चौथा स्तंभ जो उन्हें बर्दाश्त नहीं, इसलिए लोकतंत्र के चौथा स्तंभ को कुचलने अब प्रयास जारी है लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को उदाहरण के तौर पर भी सत्ताधारी लोग लोगों के सामने रख रहे है उनके साथ दुर्व्यवहार कर रहें हैं उनपर एफआईआर कर रहें हैं जिससे सभी को इसबात का भय मन मे बना रहे की, देख लो आप जो हमारी बुराई करेगा उसका भी यही हश्र होगा, यही वजह है कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के अंतर्गत काम कर रहे कुछ लोग कुचले जा रहे हैं तो उसे देखकर बाकी लोग डरे सहमे हैं उनमे हिम्मत नहीं है कि वह आगे आ सके, पर लोकतंत्र अभी डर कर दुबक जाए और अपने संविधान के अधिकारों को ना समझे तो फिर हमारे देश का संविधान किस काम का, हमारे देश के संविधान हर व्यक्ति को आजादी दी, अधिकार दिया है, सर उठा कर जीने का हौसला दिया, लोकतंत्र का चौथा स्तंभ सत्ता से परेशान लोगों के मुद्दे को उठाता रहेगा, क्योंकि संविधान ने भी उसे यह अधिकार दिया है, कुचलने वाले बहुत दिन तक नहीं रहते यह भी संविधान ने कहा है, यदि आप सत्ता का दुरुपयोग कर रहे हैं इसका मतलब कि आप संविधान को कुचल रहे हैं जनता की दुख तकलीफों से सत्तापक्ष के नेताओं का कोई वास्ता नहीं है यह कहीं नजर भी आ रहा है, हर बुराई का अंत होता है और होगा। वैसे विपक्ष ने भी जितनी देर सत्तापक्ष पर नियंत्रण के लिए लिया वह बहोत ज्यादा है, विपक्ष क्यों मौन है प्रदेश का यह तो विपक्ष ही जाने क्योंकि 15 वर्ष की सत्ता के बाद इतना कमजोर विपक्ष बनकर सामने आना विपक्ष के लिए आगे सत्ता में आने के रास्ते का ही रोड़ा बनेगा और सत्तापक्ष का मनोबल बढ़ा हुआ रहेगा तो विपक्ष आने वाले चुनावों में प्रारंभ में ही धरासाई नजर आएगा। विपक्ष कब जागेगा प्रदेश का यह विषय ही अब तय करेगा प्रदेश का आगामी चुनाव में चुनाव परिणाम क्या होगा वरना जिस तरह से निरंकुश तरीके से शासन प्रशासन की कार्यवाहियां जारी हैं उससे विपक्ष भी बहोत दिनों तक खुद को बचाये रख सकेगा टूटने से लगता नहीं।


Share

Check Also

@लेख @@ भ्रष्टाचार पर लगाम और पारदर्शिता की नई पहल

Share वक्फ संशोधन बिल 2024:पारदर्शिता और जवाबदेही की ओर एक क्रांतिकारी कदमवक्फ संशोधन बिल 2024 …

Leave a Reply