नगरपालिका अध्यक्ष पद की दौड़ड़ से बाहर होने के बाद विधायक ने दिलाया सांत्वना पद।
नगरपालिका बैकुंठपुर इसके पूर्व के कार्यकाल में नहीं था कोई नेता प्रतिपक्ष।
नेता प्रतिपक्ष की असल दावेदार थीं साधना जायसवाल जिन्होंने लड़ड़ा था अध्यक्ष का चुनाव।
साधना जायसवाल को किनारे कर विधायक के खास को बनाया गया नेता प्रतिपक्ष।
विधायक की मंशा की बात आ रही सामने,वरना नहीं बन पाता दूसरा कोई नेता प्रतिपक्ष।
बैकुंठपुर नगरपालिका की अजब गजब राजनीति, पूर्ण बहुमत के बाद भी कांग्रेस नहीं बना पाई अपना अध्यक्ष।
-रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर 30 अप्रैल 2022 (घटती-घटना)।
नगरपालिका बैकुंठपुर में सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी की अलग ही राजनीति चल रही है एक तरफ जहां चुनावों में पूर्ण बहुमत के बावजूद या यह कहें बहुमत से भी ज्यादा पार्षद होने के बावजूद सत्ताधारी दल अपना अध्यक्ष नहीं बना पाई जबकि बिल्कुल ही दौड़ से बाहर खड़ी चुनाव से भाजपा ने अपना अध्यक्ष बना लिया वहीं अब नेता प्रतिपक्ष के चुनाव में भी अलग तरह की राजनीति की गई है जिसमें नेता प्रतिपक्ष के असल दावेदार को किनारे कर विधायक की खास मानी जाने वाली पार्षद को नेता प्रतिपक्ष चुना गया है जैसा कि चर्चा भी जारी है।
बताया जा रहा है कि पिछले कार्यकाल में बैकुंठपुर नगरपालिका में नेताप्रतिपक्ष चुना ही नहीं गया था वहीं इस चुनाव में असल दावेदार अध्यक्ष पद की सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी की तरफ से रही उम्मीदवार साधना जायसवाल थीं जिह्ने किनारे कर दिया गया। पूरे मामले में विधायक की मंशा की बात सामने आ रही है बताया यह भी जा रहा है कि वर्तमान में जिस महिला पार्षद को नेताप्रतिपक्ष बनाया गया है उसे ही अध्यक्ष बनाने की विधायक की मंशा थी लेकिन विधायक की मंशा पर उस समय ग्रहण लग गया जब उस इकलौते नाम पर कोई भी पार्षद सहमत नहीं हुआ वहीं जिसके जिसके नाम पर लोग सहमत हुए वह चुनाव हार भी गईं। वैसे अध्यक्ष नहीं बना पाने की मंशा में असफल होने के बाद विधायक ने यह निर्णय लिया और महिला पार्षद को नेता प्रतिपक्ष बनाने पूरा जोर लगा दिया। वैसे बताया यह भी जा रहा है कि ज्यादातर पार्षद आराधना जायसवाल के पक्ष में थे लेकिन विधायक की मंशा के खिलाफ बोल नहीं सके। वैसे जिस तरह नगरपालिका बैकुंठपुर में सत्ताधारी दल कांग्रेस की हार बहुमत के बाद हुई और आपसी गुटबाजी कांग्रेस की सामने आई उसको देखकर वर्तमान में नेता प्रतिपक्ष को लेकर लिए गए निर्णय को लोग ज्यादा गंभीरता से नहीं ले रहे हैं और ज्यादातर लोगों का यही कहना है कि बैकुंठपुर में कांग्रेस पार्टी में कई गुट हैं और यह साफ तौर पर झलकने लगा है। सत्ताधारी दल के अंदर की गुटबाजी को लेकर जारी चर्चाओं में यह भी एक बात शामिल है कि इस गुटबाजी से आने वाले चुनावों में कांग्रेस पार्टी को नुकसान होगा जैसा नगरपालिका बैकुंठपुर के चुनाव में हो चुका है।
