-राजा मुखर्जी-
कोरबा 16 अप्रैल 2022 (घटती-घटना)। फोरलेन सडक़ का निर्माण हो या जैसी भी सडक़ बन रहे हो, उसमें नियोजित ठेकेदार और उनके कर्मचारियों द्वारा जितना मर्जी, जहां से चाहे जितना चाहे उतना मिट्टी-मुरूम खोदकर उपयोग कर रहे हैं। भले ही इसके लिए जमीन की सूरत क्यों न बिगड़ जाए, समतल जमीन गड्ढों में तब्दील क्यों ना हो जाए और उस पर खड़े लहलहाते खड़े पेड़ ही क्यों ना धराशाई हो जाएं। कार्यवाही करने वाले एक-दूसरे पर बात को टालते रहेंगे और अवैध खनन चलता रहेगा ढ्ढ जबकि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश उपरांत कलेक्टर ने स्पष्ट हिदायत दी है कि निर्माण कार्यों में अवैध सामग्रियों का बिलकुल भी उपयोग ना करें। जिले में उरगा से चांपा के मध्य निर्माणाधीन फोरलेन का काम कर रहे ठेका कंपनी द्वारा नियमों की अनदेखी की जा रही है। इसके बारे में कुछ ग्रामीणों के द्वारा अवैध उत्खनन के संबंध में जानकारी ली गई, तो पता चला कि, ग्राम पंचायत पुरैना में सिंचाई विभाग की जमीन को जहां-तहां खोद दिया जा रहा है। सिंचाई विभाग वालों से संपर्क करने पर फोन नहीं उठाया गया। हरे-भरे वृक्षों को उखाड़ दिए जाने के मामले में वन विभाग खामोश है। खनिज विभाग के अधिकारी ने फोन उठाया और कार्यवाही की बात कही, लेकिन कोई टीम शाम-रात तक नहीं पहुंची। कोरबा एसडीएम हरिशंकर पैकरा से संपर्क किया गया, तो उन्होंने खनिज विभाग वालों को मौके पर जाने के लिए निर्देश देने की बात कही पर हुआ कुछ नहीं। एक पेड़ काट लेने पर कार्यवाही करने वाला वन अमला भी ख़ामोश । काम सरकार का हो या निजी, नियम का पालन करना अनिवार्य है। बता दें कि कलेक्टर श्रीमती रानू साहू ने पिछले महीनों में बैठक लेकर स्पष्ट हिदायत दिए थे कि, किसी भी सूरत में निर्माण कार्यों में अवैधानिक मिट्टी-गिट्टी-मुरम रेत आदि निर्माण सामग्रियों का उपयोग बिल्कुल भी इस्तेमाल ना किया जाए पर बड़े पैमाने में अवैध तरीके से मुरुम-मिट्टी खोदकर फोरलेन ही नहीं प्रधानमंत्री योजना की सडक़ में भी लगाई जा रही है, जिसके लिए न तो कोई मापदंड है, ना कोई पैमाना ,ना कोई जुर्माना। जुर्माना हुआ भी तो एकाध हाईवा/ट्रैक्टर में भरे सामग्री पर न कि पूरे खनन क्षेत्र में।
