नववर्ष प्रतिपदा और चैत्र नवरात्र पर संस्कार भारती का कवि-सम्मेलन एवं संगीत-संध्या
अम्बिकापुर, 07 अप्रैल 2022(घटती-घटना)। कला, साहित्य एवं रंगमंच को समर्पित संस्था संस्कार भारती, जिला इकाई सरगुजा द्वारा हिन्दू नववर्ष प्रतिपदा और चैत्र नवरात्र के उपलक्ष्य पर प्रणव भवन में कवि-सम्मेलन एवं संगीत-संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सरगुजा के वरिष्ठ कवि एवं साहित्यकार श्याम कश्यप ‘बेचैन’, विशिष्ट अतिथि गीतकार भगत सिंह ‘विहंस’, रंजीत सारथी, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के जिला विभाग प्रमुख ठाकुर राम और अध्यक्षता के जिलाध्यक्ष आनंद सिंह यादव ने की।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा भारत माता के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। कवि-सम्मेलन में अधिकांश कवियों ने नवरात्रि व हिन्दू नववर्ष संबंधी रचनाओं एवं भजनों की प्रस्तुति दी। इसी अनुक्रम में कवयित्री माधुरी जायसवाल ने भगवती मां महामाया को अपने काव्य-पुष्प समर्पित किए- जिनके चरणों में हम हैं, उनको नमन करती हूं। जिन चरणों की हम धूल हैं, उन चरणों को फूल अर्पित करती हूं। अर्चना पाठक ने अम्बे के कल्याणकारी स्वरूप का चित्रण किया- माता के श्रीचरणों में मेरी है वैतरणी, सबका कल्याण करे मां दुर्गा अवतरणी। पूनम दुबे ने भवानी के दरबार में हाज़िरी देकर कुछ अर्ज़ करने का मनोभाव व्यक्त किया- दरबार सजा है मां, मैं भी आई तेरे दर पे। तेरी चर्चा बहुत सुनी है। आशा पाण्डेय ने दोहे- महिमा गाते हैं सदा, सारे वेद-पुराण, विश्व करे दुर्गा सदा, तेरा ही गुणगान – द्वारा मां की महिमा का बखान किया। गीता द्विवेदी ने जगदम्बे के स्वागत की तैयारी करने का वर्णन किया- दो पुष्प तो मंगा लूं, ज़रा दीप तो जला लूं, तेरे आने से पहले तेरा आसन तो सजा लूं। वरिष्ठ कवि बीडी लाल ने मां दुर्गा को अपने गीतरूपी हार पहनाने की प्रबल इच्छा व्यक्त की – यह गीत तुम्हारी पूजा का हार बने तो हरषाऊं, नैनो में तेरे सपनों का मनुहार बने तो मुस्काऊं। संतोषदास ‘सरल’ ने जसगीत- छउआ मैं तोर, तोला खोजत हवों ओ, आबे ना दाई तोला जोहत हवों ओ -सुनाकर समां बांध दिया।
कवि-सम्मेलन में दोहा छंद के सिद्धहस्त रचनाकार मुकुन्दलाल साहू ने जगत् जननी मां महामाया द्वारा कलिकाल में निरंतर लोगों का दुख दूर करने व उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करने का उल्लेख करते हुए, मनोरम दोहों की प्रस्तुति दी- जीवन-पट निर्मल बने, मिटे पाप की गर्द। दूर महामाया करे, जन-जन का दुख-दर्द। कार्यक्रम में ठाकुर राम ने जहां गीत- ‘भगवा ध्वज लहराबो’ -सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया वहीं वरिष्ठ कवि भगत सिंह ‘विहंस’ ने गीत- मुझे शक्ति दो प्रभुराम, मैं भज लूं तेरा नाम और गीतकार रंजीत सारथी ने गीत रचना – तोला भजों राम, तोला भजों रामा, रघुराई, धनुषधारी – की प्रस्तुति देकर कवि-सम्मेलन को यादगार बना दिया। कार्यक्रम में कतिपय कवियों ने हिन्दू नववर्ष पर भी उम्दा कविताओं का पाठ किया। सुप्रसिद्ध कवि श्याम कश्यप ‘बेचैन’ ने नववर्ष का स्वागत करते हुए कहा- हर क्षेत्र में उत्कर्ष हो, शुभ आपको नववर्ष हो। सबकी हो पूरी कामना, सबके हृदय में हर्ष हो। कवि विनोद हर्ष ने भी नववर्ष विषयक शानदार कविता प्रस्तुत की- प्राची से फैली है स्वर्णिम उषा, सुखद विहान की बेला है। चलो दीप जलाएं घर-आंगन, नववर्ष के स्वागत में अनुष्ठान की बेला है। आनंद सिंह यादव ने राष्ट्रभक्ति पूर्ण रचना- कोई हस्ती, कोई मस्ती, कोई चाह पे मरता है। यहां हर बंदा अपने हिन्दुस्तान पे मरता है। इनके अलावा शायरे शहर यादव विकास, अंजनी कुमार सिन्हा, श्यामबिहारी पाण्डेय, अजय शुक्ल ‘बाबा’, देवेन्द्रनाथ दुबे, प्रकाश कश्यप, डॉ0 अजयपाल सिंह, उमेश पाण्डेय और उम्बरीश कश्यप ने भी प्रेरणादायी कविताओं की प्रस्तुति दी। संगीत-संध्या में सुधीर राणा ने बांसुरी वादन की प्रस्तुति देकर सबका दिल जीत लिया। अजय कुमार शुक्ला ने रामचरितमानस के सुन्दरकाण्ड की चौपाइयों एवं दोहों का का पाठ कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। कार्यक्रम का काव्यमय संचालन अर्चना पाठक और माधुरी जायसवाल ने और आभार-ज्ञापन संस्था के अध्यक्ष आनंद सिंह यादव ने किया। इस दौरान श्याम कश्यप ‘बेचैन’, यादव विकास, बीडी लाल, रंजीत सारथी, भगत सिंह ’विहंस’ और ठाकुर राम को संस्था द्वारा शॉल, श्रीफल व पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अंत में संस्था के जिलाध्यक्ष आनंद सिंह यादव जी को सफल आयोजन एवं जन्मदिवस के अवसर पर सभी ने मिस्टान खिलाकर बधाई एवं शुभकामनाएं दिए। इस अवसर पर केन्द्रीय जेल अधीक्षक राजेन्द्र रंजन गायकवाड़, संस्था के महामंत्री पंकज गुप्ता, कृष्ण कुमार शर्मा, राजनारायण द्विवेदी, विशाल सिंहदेव, खेमलाल खूंटे, लोमश राम साहू, इंदर भगत, दिव्या भारती भगत, लक्ष्मी निषाद, देवेश बेहरा, जसपाल सिंह गिल, दीपक सोनी, गौरांगो सिंह, संतोष दुबे, संतोष कुमार गुप्ता सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।