- एक ऐसे थानेदार जिनके नेतृत्व में 1-1 दिन में 4-4 सफलता मिलती है पर कोयला चोरी रोकने मामले में असफल क्यों ?
- एक दिन में 4 जुआ एक्ट व 4 एनडीपीएस में एफआईआर दर्ज करने होने वाले थाना के सफल थानेदार कोयला चोरी मामले असफल क्यों ?
- रात में कोयला चोरों की गाड़ी अवैध कोयला लेकर मौत बनकर तेज रफ्तार से दौड़ रही, अंकुश कब ?
- आखिर क्यों थाना पटना क्षेत्र में मोबाईल व कबाड़ चोरी की वारदात भी तेजी से बढ़ी है?
- मोबाईल चोरो के डर से सप्ताहिक बाजार में बिना मोबाईल के सब्जी लेने जाते हैं लोग क्या यही है सुरक्षा भरोसा ?
-रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर 27 मार्च 2022 (घटती-घटना)। कोरिया जिले का एक ऐसा थाना जहां के थाना प्रभारी सबसे सफल माने जाते हैं क्योंकि इनके नेतृत्व में एक दिन के कुछ घंटों में एक ही जगह पर 4 बार पर जुआ एक्ट की कार्यवाही होती है एक ही दिन में कुछ ही घंटों के अंदर एनडीपीएस की चार-चार कार्यवाही होती है पर इन से इनके उच्च अधिकारी यह नहीं पूछते कि यह कार्यवाही तुमने कैसे कि जिस में इतनी बड़ी सफलता तुम्हें मिली है? जबकि इस प्रकार की कार्यवाही को कानूनी जानकार गलत तरीके की कार्यवाही मानते हैं और इस प्रकार की कार्यवाहीयो पर प्रश्न भी उठाना लाजमी है खैर उनके उच्च अधिकारी हैं चाहे कार्यवाही करें या ना करें पर यह है कि जिले के सबसे सफल थाना प्रभारी में इनकी गिनती आती है क्या इतने सफल थाना प्रभारी के थाना क्षेत्र में जमकर कोयले का अवैध कारोबार चल रहा है उसमें थानेदार चुप क्यों? क्या कोरिया जिले के पटना थाना क्षेत्र में पुलिस का कोई ऐसा अधिकारी नहीं आया है जो कोयले की चोरी पर रोक लगा सके? कोयले की चोरी पर रोक लगाना लगता है संभव नहीं असंभव है ऐसा क्यों है यह तो विभाग के उच्च अधिकारी व उनके थानेदार ही जाने इस समय पटना थाना क्षेत्र में पटना, कटकोना, देवखोल व हथवार सहित कई जगहों से अवैध कोयला निकाला जा रहा है और ईट भा में पहुंचाया जा रहा है इस समय कोयले का काला धंधा जमकर चल रहा है और क्षेत्र में इस बात की चर्चा है कि यह कारोबार पुलिस की सांठगांठ से ही हो रहा है यही वजह है कि यह कारोबार रुकने की जगह बड़ी तेजी से बढ़ रहा है। ज्ञात हो की कोरिया जिले का पटना क्षेत्र पिछले कई सालों से कोयला चोरी का गढ़ बना हुआ है, कोयला चोरी के साथ साथ पहाड़ों में अवैध कोयला खदानें बनाकर कोयला निकाली जा रही है। ईंट भों का सीजन शुरू होते हैं कोल ट्रान्सपोर्ट के अलावा मालगाड़ीयों से कोयला चोरी शुरू होता ही है साथ में पहाड़ों को खोदकर अवैध रूप से कोयला खदान भी खुल गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि ग्रामिण पहाड़ों में खदान बनाकर बिना सुरक्षा के कोयला निकालने का काम कर रहे हैं जो खतरों से भरा पड़ा है। कुछ क्षेत्र वन विभाग में आते हैं तो कुछ क्षेत्र एसईसीएल कटकोना व पण्डोपारा का पड़ता है। प्रशासन के नाक के नीचे हो रहा है कोयले का अवैध उत्खनन, चंद पैसों के लिए लोग जान जोखिम में ड़ालकर पहाड़ों में गुफा बनाकर निकाल रहे हैं कोयला, वन परिक्षेत्र में 12 से 15 अवैध कोयला खदानों से निकाला जा रहा है कोयला, दुर्घटना के बाद भी सोया है विभाग, पहाड़ों को खोदकर बनाई गई अवैध कोयला खदानों में घुसकर निकाला जा रहा है कोयला, अवैध कोयला खदान के भीतर से कोयला निकालते में कुछ ग्रामीणों की हो चुकी है मौत। बीते वर्ष 2016-2019 में संचालित अवैध कोयला खदान में कोयला निकालने घुसा युवक चट्टान के धसकने से उसके नीचे दब गया और उसकी मौके पर ही मौत हो चुकी है।
चंद पैसों के लालच
में ग्रामिण जान जोखिम
में डाल रहे
मिली जानकारी के मुताबिक इन दिनों पटना सहित क्षेत्र में एक दो नहीं बल्की कभी संख्या में संचालित अवैध ईंट भों के कारण कटकोना वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत मुरमा, देवखोल, पूटा गांव की पहाडी में करीब 15 अवैध कोयला खदान बनकर तैयार हो गया है जहां से चंद पैसों के लालच में ग्रामिण चट्टानों के नीचे खोदकर बनाए गए अवैध कोयला खदानों में घुसकर कोयला निकालते हैं और बोरियों में भर कर सस्ते दाम में उन लोगों के पास बेच देते हैं जिनके द्वारा रात के अंधेरे में ईंट भों में कोयला सप्लाई का कार्य किया जाता है। आंकलन किया जाए तो इन दिनों रात भर में करीब 12 से 15 पिकप कोयला पटना क्षेत्र के अलावा कारिया जिले के बाहर अन्यत्र जिलों में सेचालित ईंट भों तक पहुंच रहा है। जिन्हें रोकने में एसईसीएल, खनिज विभाग, वन विभाग या पुलिस विभाग के द्वारा कोई ठोस कदम अब तक नहीं उठाया गया है जिसके कारण रात के अंधेरे में चंद पैसों का लालच देकर लोगों से कोयला चोरी करवाने वाले क्षेत्र के कुछ तथा कथित लोगों के हौसले बुलंद हैं।
सप्ताहिक बाजार में मोबाइल चोर सक्रिय
पटना का बाजार सबसे बड़ा बाजार क्षेत्र का माना जाता है और यहां के सप्ताहिक बाजार में मोबाइल चोरी होने की खबर आती है जिस वजह से बाजार में सब्जी लेने जाने वाले लोग बिना मोबाइल के बाजार जाना पसंद करते हैं क्योंकि उन्हें इस बात का डर सताता है कि कहीं मोबाइल चोरी ना हो जाए पर ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाने में पुलिस नाकाम है और दिनदहाड़े मोबाइल चोर पुलिस को चेतावनी दे रहे हैं। पुलिस भय है सिर्फ आम आदमियों में है ना कि अवैध कारोबार करने वाले में।
रात के अंधेरे में भी अवैध कोयला खदानों से निकालते हैं कोयला
ईंट भों का संचालन शुरू होने के बाद कोयले की मांग बढ़ने पर दिन के अलावा रात में भी ग्रामिण गांव से 3 किमी दूर जंगल में साईकिल से जाते हैं और वहां कोयला निकालकर सड़क तक लाते हैं उसके बाद गाड़ीयों में भरकर ईंट भों तक पहुंचाते हैं इस काम को अंजाम देने के लिए एक नहीं दो नहीं बल्की 20 से 25 लोग रहते हैं जो रात के अंधेरे में टार्च जलाकर निकालते हैं।
मालगाड़ीयों व कटोरा साइडिंग से भी होता है कोयला
चोरी पटना के कटोरा साईड़िंग से रेल्वे ब्रीज के बीच जब मालगाड़ी की गति कम होती है उस समय काफी संख्या में लोग मालगाड़ी में चढ़ जाते हैं और कोयला को रेल्वे ट्रैक पर फेंकते हैं, मालगाड़ी की गति तेज होता देख मालगाड़ी से उतर जाते हैं, जब मालगाड़ी चली जाती है तब कोयले को रेल्वे ट्रेक के किनारे इका कर देते हैं, रेल्वे किनारे लगे कोयले के ढ़ेर को शाम होते ही पीकप में लोड़ कर ईंट भ_ों तक उन लोगों द्वारा पहुंचा दिया जाता है जिनके द्वारा चंद पैसा देकर ग्रामिणों से कोयला उतरवाया जाता है, इस तरह से चलती मालगाड़ी से कोयला उतारते समय दो बार बड़ी घटना भी हो चुकी है जिसमें एक युवक की जान जा चुकीहै और एक ग्रामिण का हाथ कटकर अलग हो चुका है इसके बाद भी पैसों के लालच में चलती मालगाड़ी से कोयला उतारा जाता जिन्हें रोकने का प्रयास न तो पुलिस करती है और न ही रेल्वे विभाग या एसईसीएल के अधिकारी।