बैकुण्ठपुर@कांग्रेस ने 15 साल बाद प्रदेश की सत्ता में वापस लौटने कांग्रेसजनों को किया था संगठित

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  • कोरिया जिले के कई दिग्गज कांग्रेसजनों की तात्कालीन सांसद चरणदास महंत ने कराई थी घर वापसी
  • विधानसभा चुनाव के पूर्व पटना के आदर्श चौक के समीप संपन्न हुआ था यह कार्यक्रम
  • कार्यक्रम के दौरान उपस्थित थे जिले के तीनों ही विधानसभाओं के कांग्रेस प्रत्याशी
  • आखिर क्या ऐसी वजह हुई कि घर वापसी और चुनाव में विजश्री मिलते ही कांग्रेसजन पड़ड़ गए अलग थलग
  • घर वापसी किये कांग्रेस के एक वरिष्ठ कांग्रेसी आखिर क्यों आकर्षित हैं गोंड़वाना गणतंत्र पार्टी की तरफ
  • वरिष्ठ कांग्रेसी लड़ड़ सकते हैं गोंड़ड़वाना गणतंत्र पार्टी के टिकट पर चुनाव:सूत्र


-रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर 21 मार्च 2022 (घटती-घटना)। कुछ तस्वीर कभी भी भूलने वाली नहीं होती कुछ ऐसी ही तस्वीरें मौजूद हैं जो वर्ष 2018 की है जब 15 साल बाद कांग्रेस प्रदेश की सत्ता में आने के लिए हर संभव प्रयास कर रही थी, वही दौर था जब खुद 14 अगस्त 2018 को डॉ चरणदास महंत की अगुवाई में कार्यकर्ताओं को संगठित करने के लिए कार्यक्रम आयोजित किया गया था जिस समय वरिष्ठ कांग्रेसी यवत कुमार सिंह ने छत्तीसगढ़ जनता जोगी कांग्रेस छोडक़र कांग्रेस पार्टी में घर वापसी किया था यह वही आदिवासी नेता है जिनके नेतृत्व में काफी संख्या में लोग कांग्रेस में प्रवेश किए थे पर चुनाव जीतने के बाद या खुद पार्टी में उपेक्षा के शिकार हो गए आज ऐसा कयास लगाया जा रहा है कि दिग्गज आदिवासी नेता यवत कुमार सिंह 2023 में विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं और वह इसके लिए गोंड़वाना गणतंत्र पार्टी के लगातार संपर्क में जैसा कि सूत्रों का दावा है।
यवत कुमार सिंह स्वच्छ छवि व ईमानदार जनप्रतिनिधियों के रूप में जिले में अपनी पहचान रखते हैं और उनकी सादगी भी लोगों को केवल इसलिए भा जाती है क्योंकि उन्होंने जिला पंचायत अध्यक्ष रहते हुए भी जनता से अपना जुड़ाव आम व्यक्ति के रूप में कायम रखा हुआ था और वह बिल्कुल ही ईमानदारी से अपना कार्यकाल पूर्ण किये थे। यवत कुमार सिंह जनता जोगी कांग्रेस से जब घर वापसी किये थे और वापस कांग्रेस में लौटकर अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस को 15 साल बाद सत्ता में वापस लाने पूरी ईमानदारी से काम किये थे तो ऐसा लगा था कि कांग्रेस में खासकर जिले के कांग्रेस सहित निर्वाचित जनप्रतिनिधि उनकी पूछ परख रखेंगे वहीं उन्हें पार्टी में कोई बढ़ी हुई जिम्मेदारी प्रदान करने के लिए सभी प्रयास करेंगे लेकिन सत्ता में वापसी के बाद से ही यवत कुमार सिंह जिस तरह अलग थलग नजर आए उससे यह साबित होने लगा कि सत्ता प्राप्ति तक ही उनकी जरूरत कांग्रेस पार्टी को थी और जैसे ही सत्ता में वापसी हुई उन्हें किनारे कर दिया गया और तभी से वह किसी भी पार्टी कार्यक्रम में नजर भी नहीं आते और न ही उन्हें 3 साल के कार्यकाल के बाद पार्टी ने कोई बढ़ी हुई जिम्मेदारी भी प्रदान की।
आइए जानते है युवत कुमार सिंह के बारे में
कोरिया जिले की राजनीति में उच्च शिक्षा ग्रहण कर जिला पंचायत अध्यक्ष तक का सफर पूरा करने वाले यवत कुमार सिंह उन आदिवासी नेताओं में से एक हैं जिनके पास शासन की योजनाओं की भी बेहतर समझ है और जिनके पास जनता को शासन की योजनाओं की लाभ हानि बताने की कला भी है। इन्होने सरपंच से लेकर जिला पंचायत तक का सफर पूरा किया विधायक बनने की भी काबलियत थी पर पार्टी ने भरोसा नहीं किया, यदि पार्टी भरोसा करती तो काग्रेस के सफल विधयाको में से एक होते।
लड़ सकते है 2023 का विधानसभा चुनाव
यवत कुमार सिंह जैसा कि बताया जा रहा सूत्रों के हवाले से की गोंड़वाना गणतंत्र पार्टी से विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं यदि ऐसा सही मायने में हुआ तो निश्चित रूप से इसका नुकसान कांग्रेस को ही उठाना पड़ेगा और कांग्रेस ऐसे में अपने एक उस पुराने वरिष्ठ कांग्रेसी को भी खो देगी जिसने वर्षों कांग्रेस के लिए काम किया यहाँ तक की जिले के कांग्रेस जिलाध्यक्ष की भी जिम्मेदारी जिसने निभाया। उपेक्षा आखिर वरिष्ठ कांग्रेसजनों की क्यों हो रही है और क्यों लगातार कांग्रेस से ही कइयों के बागी होकर चुनाव लड़ने की सुगबुगाहट सुनाई दे रही है।
क्या विधानसभा अध्यक्ष कांग्रेसजनों को एकजुट कर पाएंगे
कांग्रेस पार्टी के लिए निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के लिए चिंता का विषय होना चाहिए लेकिन जिस तरह 3 सालों तक जनप्रतिनिधियों का कार्यकाल रहा और वरिष्ठ कांग्रेसी ही जिस तरह उपेक्षित होते रहे लगता नहीं कि आगामी विधानसभा में कांग्रेस के ही कई बागियों को कांग्रेस चुनाव लड़ने से रोक सकेगी। तत्कालीन सांसद चरणदास महंत जिन्होंने जनता जोगी कांग्रेस से पुराने वरिष्ठ कांग्रेसजनों की घर वापसी कराई थी क्या वह इस ओर ध्यान देकर पुन: जिले के उपेक्षित वरिष्ठ कांग्रेसजनों को एकजुट करने का कुछ प्रयास करेंगे या नहीं यह आने वाले समय मे जरूर पता चलेगा।


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