- पुलिस विभाग के कर्मचारी ही बता रहे ग्रूप में वायरल हुआ था चैट फिर पत्रकार पर द्वेषपूर्ण मामला पंजीबद्ध क्यों?
- कर्मचारी लगातार दे रहा अपने ही विभाग के अधिकारियों को चुनौती
- पुलिस विभाग के कर्मचारी ही बता रहे है कहां से मिला उन्हें चैट

-रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर 21 मार्च 2022 (घटती-घटना)। देखिए एक आदमी आपको मारना चाहता हो और वह यह भी चाहता हो कत्ल का इल्जाम उस पर ना आऐ तो इस पर एक साहित्यकार नें लिखा है यदि वह जहर देता तो सबकी निगाह में आ जाता, सो उसनें यूं किया कि वक्त पर दवा न दी। इस लाइन के साथ पुलिस विभाग के पीडि़त आरक्षक ने अपने ही विभाग के अधिकारियों पर एक बहुत बड़ा प्रश्न चिन्ह लगाते हुए लंबा चौड़ा शिकायत अपने विभाग के तमाम अधिकारियों को कर जांच की मांग की है और कई तथ्यों को सामने रखकर कानूनी भाषा में भी अपने अधिकारियों को समझाने का प्रयास किया है लेकिन क्या अधिकारी उस भाषा को समझेंगे या फिर अधिकारी उन्हीं पुलिसकर्मियों की सुनेंगे जिनकी सुनकर ही वह और पूर्व के अधिकारी गलत करते आये हैं और निर्दोश फंसते चले गए हैं और दोषी बाईज्जत बरी होते चले गए हैं, पुलिस सूत्रों की मानें तो कोरिया जिले की पुलिस फिलहाल एकमात्र प्रधान आरक्षक के निर्देश और सलाह पर काम करती चल रही है वहीं उसकी तमाम शिकायतों के बाद भी उसको लेकर कोई कार्यवाही पूरा विभाग नहीं कर पा रहा है क्योंकि जिले भर के सभी अधिकारियों की कमजोर नब्ज की उसे अच्छी जानकारी है और वह इसी वजह से निश्चिन्त हो कर काम करता चला आ रहा है और उसे मनचाही जगह अपनी पोस्टिंग करवा लेता है।
वहीं आरक्षक ने सोशल मीडिया में लिखा की मेरे द्बारा पुलिस अधीक्षक कोरिया के समक्ष संबंधित वायरल चैट के आपत्तिजनक वाटसएप चैट के आरोपी पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध करनें हेतु आवेदन पत्र प्रस्तुत किया गया था। जो कि अब तक तकरीबन 15 दिवस होने को है, पुलिस अधीक्षक कोरिया के द्वारा अपराध पंजीबद्ध नहीं किया गया है? क्या मैं पुलिस अधीक्षक कोरिया के मौन को सीआरपीसी 156(3) के तहत न्यायालय जाने की मौन स्वीकृति/अनुमति समझुं? कहीं ऐसा तो नहीं कि पुलिस अधीक्षक कोरिया आदिवासियों के विरुद्ध आपत्तिजनक कॉमेंट एवं वायरल चैट जिन पुलिस अधिकारियों के नंबर से वायरल हैं, उनपर कोई भी कार्यवाही नहीं करने का ऊपरी दबाव हो और पुलिस अधीक्षक कोरिया भी संभवत: यही चाहते हों कि मैं न्यायालय चला जाऊं, मेरी समझ के अनुसार पुलिस अधीक्षक कोरिया की कोर्ट जाने हेतु मौन स्वीकृति है?
कोरिया पुलिस को रस्सी को सांप और सांप को रस्सी बनाने में महारत हासिल
कोरिया जिले के एक थाने की पुलिस को साथ ही कुछ पुलिस अधिकारियों को-रस्सी को सांप और सांप को रस्सी बनाने में महारत हासिल है और पुलिस के उच्च अधिकारी कहतें हैं वे जांच कराऐंगे पर सवाल है कैसे? क्या करप्ट थाना प्रभारी और वायरल वाट्सएप चैट के आरोपी पुलिस अधिकारियों को हटाने की हिम्मत जुटा पाएंगे और कार्यवाही करनें का दम तो है नही और जांच कराऐंगे? यह लाइन पीडि़त आरक्षक ने लिखकर खुले तौर पर वायरल चैट कांड की जांच को लेकर अपने अधिकारी को चुनौती दे रहे हैं पदाधिकारी चुनौती स्वीकार करने की जगह पल्ला झाड़ रहे हैं।
मुझे कमजोर करना चाहते हैं अधिकारी
जानकारों की मानेंं तो कोरिया के एक थाने की पुलिस को साथ ही कुछ पुलिस अधिकारियों एवं पुलिस अधीक्षक कार्यालय के स्टेनों को रस्सी को सांप और सांप को रस्सी बनाने में महारत हासिल है उच्च पुलिस अधिकारी कहतें हैं कि वे जांच कराऐंगे पर करप्ट थाना प्रभारी और वायरल वाट्सएप चैट के आरोपी थाना प्रभारी,पुलिस अधीक्षक कार्यालय के स्टेनों व अन्य पुलिस अधिकारियों पर एफआईआर करनें, तैनाती से हटाने और अन्य विभागीय कार्यवाही करनें का दम तो पुलिस के उच्च अधिकारियों में है नही और कहते हैं कि जांच कराऐंगे, इनका दम सिर्फ मुझ जैसे कमजोर और शोषित पुलिस कर्मचारी को परेशान करनें, प्रताड़ित करने को ही चलता है जबकि वाट्सएप चैट के संदर्भ में रायपुर पुलिस नें पत्रकार निलेश शर्मा पर अपराध पंजीबद्व किया है, वह भी वाटसअप चैट को आधार बनाकर और कोरिया पुलिस को 45 दिन हो गये वाट्सएप चैट वायरल हुऐ और अभी जांच करेंगे का राग अलापा जा रहा है।