बैकुंठपुर@उच्च अधिकारियों ने अपने कर्मचारियों पर क्यों नहीं की कार्यवाही?

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वायरल कथित चैट को लेकर विभाग के कर्मचारी अपने उच्च अधिकारी को सोशल मीडिया पर दे रहे चुनौती।
पुलिस का आपसी बातचीत का कथित चैट होता है वायरल,पुलिस वाला ही देता है चुनौती, खबर लिखने पर दर्ज होता है एफआईआर, वाह! पुलिस प्रशासन।
सोशल मीडिया पर वायरल चैट मामला शायद दब जाता यदि खबर नहीं होती प्रकाशित?
कोरिया पुलिस के अंदर ही कलह की स्थिति है जो सोशल मीडिया पर बार-बार देखी जा रही है कौन दूर करेगा इस कलह को?
वायरल चैट में कर्मचारियों पर कार्यवाही न करके उच्च अधिकारी कर्मचारियों द्वारा लिखी कथित बातों को चरितार्थ तो नहीं कर
रहे?
-रवि सिंह-
बैकुंठपुर,27 फ रवरी 2022(घटती-घटना)।
इन दिनों कुछ ऐसा ही मामला कोरिया जिले में पुलिस के कारनामे से सुर्खियां बटोर रही है। कुछ दिनों से फेसबुक पर पुलिस कर्मचारी ही अपने अधिकारीयों को शिकायत करते गंभीर आरोपो के साथ चुनौती दे रहे है। पहले पुलिसकर्मियों के बीच की बातचीत का चैट हुआ था वायरल, अब उस चैट से संबंधित सोशल मीडिया पर अपने अधिकारी को चुनौती दे रहे है पहले तो वाट्सअप ग्रुप में चैट हुआ था वायरल अब फेसबुक में खुलेतौर पर आरोप व चुनौती दिया जा रहा है। पर हो सकता है इस खबर को प्रकाशित करने पर एक और एफआईआर न झेलना पड़े पत्रकार को क्योंकि यह खबर बिलकुल भी पुलिस के उच्चअधिकारियों को अच्छी लगने वाली नहीं है पर कोरिया पुलिस मे अनुशासन खत्म होना भी अच्छा नही है। पुलिस को यदि यह खबर चुभती है तो मान लीजिए की आपके विभाग में कुछ अच्छा नहीं चल रहा कृपया इसे सुधारे और कानून व्यवस्था पर ध्यान दें न कि झूठे एफआईआर पर। क्या कथित चैट में कथित पुलिस कर्मचारियों पर कार्यवाही ना करके उच्चअधिकारी उनकी कही बातो को खुद चरितार्थ तो नहीं कर रहे? या फिर करने में तुले हुये है? चैट लिखने से लेकर उसे वायरल करने वालों पर कार्यवाही के बजाए, उजागर करने वाले पर एफआईआर आखिर क्यों?
ज्ञात हो कि कुछ दिन पहले पुलिसकर्मियों के बीच बातचीत का चैट व्हाट्सएप ग्रूप में वायरल हुआ था जिस प्रकार उस कथित चैट में पुलिस कर्मचारी अपने ही अधिकारियों के लिए बातचीत की गयी थी है और किस तरह एक पुलिसकर्मी को परेशान भी किया गया था कथित चैट में पुलिस ने अपना परिचय दिया था। यह भी बात इतनी ही सही है कि उस चैट से जो जो लोग जुड़े हुए हैं जिनकी वजह से पुलिस की बदनामी हुई है पुलिस उन पर कार्यवाही कर पाने में नाकाम है। उन पर कारवाही न करके पुलिस ने पत्रकार पर ही एफआईआर दर्ज कर पूरे मामले को ही एक नया मोड़ दे दिया, जहां पुलिस ने यह सोचकर एफआईआर किया था कि मामला शांत हो जायेगा पर यह मामला आगे बढ़ गया, इस मामले में और कड़ाई से जांच दूसरी जांच एजेंसी से कराने की मांग उठऩे लगी है। कथित चैट में पुलिस ने जिस पुलिसकर्मी का जिक्र किया था वहीं कर्मचारी लगातार उसी चैट को फिर सोशल मीडिया पर शिकायतों के माध्यम से भी अपने अधिकारी को चुनौती दे रहा है जो सोशल मीडिया पर साफ देखा जा सकता है। शायद फिर खबर प्रकाशन होने पर पुलिस पूछ सकती है कि आखिर आपको यह बात कहां से पता चली, क्योंकि सोशल मीडिया पर पुलिस एक्टीव नहीं। हांलाकि इसका जवाब यही है कि इस खबर का स्रोत पिछले बार की तरह ही सोशल मीडिया है।
कोरिया पुलिस में आखिर कलह क्यों
पूर्व पुलिस अधीक्षक विवेक शुक्ला के जाने के बाद कोरिया जिले के अंदर पुलिस विभाग में अचानक कलह की स्थिति क्यों निर्मित हो गयी ऐसे सवाल हर तरफ सुनायी पड़ रही है। उनके जाने के बाद से ही कोरिया पुलिस के अंदर काफी लंबे समय से कलह उत्पन्न है इस कलह की वजह कोई और नहीं विभाग के ही विवादित पुलिस कर्मचारी हैं जो अधिकारीयों को ही अपने वश में करने का हुनर रखते है। यही वजह है कि कुछ पुलिस कर्मचारी ही विवादित है जो हमेशा सुर्खियों में रहते हैं इनके खिलाफ शिकायतें भी खूब होती हैं और खबर छापने पर पत्रकार के प्रति विवादित पुलिसकर्मी द्वेष भी रखते हैं, कर्मचारियों के बीच कलह की स्थिति इसलिए निर्मित है क्योंकि अधिकारी इन विवादित कर्मचारियों पर लगाम नहीं लगा पा रहे हैं यही की वजह है कि अधिकारियों की लापरवाही से उनके कर्मचारी अनुशासन हीन हो चले हैं जिसका परिणाम है कि सोशल मीडिया हो या समाज पुलिस की छवि किस प्रकार धूमिल हो रही है यह साफ देखा जा सकता है पर अभी भी उच्च अधिकारी अपने कर्मचारियों को समझ जाएं तो शायद कोरिया की पुलिस अच्छी हो सकती है, पर क्या अधिकारी ऐसे कर्मचारियों को समझ पाएंगे या फिर इन पर अपने मेहरबानी बनाए रखेंगे और इन्हीं के मुताबिक सब कुछ होता रहेगा या फिर कहें तो अपने अधिकारीयों के लिये कमाऊं पुत्र बने रहेंगे?
एक बार फिर सोशल मीडिया पर दी जा रही है चुनौती
पिछले वायरल चैट को लेकर पिछले कुछ दिनों से पुलिस विभाग के कर्मचारी जो अपने विभाग के लिए चर्चित हैं सोशल मीडिया में अपनी बातों को रख कर शिकायत पत्र प्रस्तुत करते हुये यहां तक कि संबंधित वायरल चैट को पोस्ट करके अपने विभाग को चुनौती दे रहे हैं जो साफ तौर पर उच्च अधिकारी तक भी यह बात पहुंची होगी पर शायद इस बात के पीछे की वजह क्या है इसे पता करने में असफल रहे हैं आखिर यह क्यों हो रहा है मंथन करने के बजाये अपनी वैमन्यसता निकालने में ज्यादा रूचि दिखायी दे रहा है।
जनता की मांग अनुशासन में
आये पुलिस

जिस तरह कोरिया पुलिस की छवि को लेकर कई सवाल उठ रहे है उसमें आमलोगों की मंशा है कि पुलिस अधीक्षक को मोह छोड़कर, निष्पक्ष होकर इस पर गहन चिंतन करते हुए अपने कर्मचारियों को अनुशासन में लाने के लिए कड़ी कार्यवाही की जानी चाहिए। खासकर इस मामले से संबंधित लोगों पर चाहे वह कोई भी हो चाहे वह किसी नेता का खास हो या फिर किसी अधिकारी का। जब पुलिस के अनुशासन के बात हो तो कार्यवाही भी पुलिस अधीक्षक को करनी चाहिए, क्योंकि अब बात उनके सम्मान की है इस जांच से विवादित लोगों को दूर रखकर स्वच्छ और ईमानदार छवि वाले पुलिस अफसरों से इसकी जांच करानी चाहिए। जो सच को सच और गलत को गलत कहने की हिम्मत रखता हो।
कहीं फिर ना
हो जाए एफआईआर

सोशल मीडिया पर अपनी बातें रख कर चुनौती दी जा रही है पर सवाल यह उठता है कि क्या जब सोशल मीडिया को देखकर कार्यवाही की जा सकती है तो इन पर क्यों नहीं? जहां सोशल मीडिया पर आई जानकारियों पर कार्यवाही होनी चाहिए थी उस पर ना होकर कार्यवाही पत्रकार पर हुई और एक बार फिर सोशल मीडिया की बातों को ही फिर से सबके सामने समाचार के माध्यम से रखा जा रहा है, कहीं ऐसा ना हो कि फिर से पुलिस मुद्दे को सामने रखने वाले पर ही एफआईआर दर्ज कर ले, यदि सोशल मीडिया पर कोई महत्मपूर्ण बात है जो शासन-प्रशासन व सत्ता से जुड़ी हुई है तो क्या उसका प्रकाशन करना गलत है? शायद पुलिस या भूल चुकी है कि इस समय ज्यादातर चीजें सोशल मीडिया के माध्यम से ही पत्रकारों तक पहुंचाई जा रही है।


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