्र पत्रकार सुरक्षा समिति प्रदेशभर में लगातार सौंप रहा है ज्ञापन,मामला कोरिया जिले के पत्रकार से जुड़ा हुआ।
्र खबर प्रकाशन को लेकर पत्रकार रवि सिंह पर कोरिया पुलिस ने दर्ज किया है गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज।
्र निष्पक्षता के साथ समाचार प्रकाशन के कारण की गई है एफआईआर दर्ज।
्र एफआईआर दर्ज किए जाने के मामले में अब कोरिया जिले की पुलिस पर उठ रहें हैं सवालिया निशान।
्र एक खबर पर आनन फानन में कोरिया जिले की पुलिस ने पत्रकार पर किया है एफआईआर दर्ज।
्र मुख्यमंत्री सहित राज्यपाल को पत्रकार सुरक्षा समिति लगातार सौंप रहा है ज्ञापन।
्र प्रदेश के पुलिस महानिदेशक से भी मामले में हस्तक्षेप की पत्रकार सुरक्षा समिति कर रहा मांग।
-रवि सिंह-
बैकुंठपुर, 23 फ रवरी 2022(घटती-घटना)। कोरिया जिले के एक समाचार पत्र संवाददाता के ऊपर कोरिया जिले की पुलिस ने एफआईआर दर्ज किया है और एफआईआर भी ऐसे मामले में दर्ज किया गया है जो एक समाचार प्रकाशन को लेकर किया गया है जबकि समाचार में ऐसा कुछ भी पत्रकार द्वारा नही परोसा गया है जो एफआईआर अनुसार सही माना जाए, कुल मिलाकर एफआईआर जो पुलिस ने दर्ज किया है उसका आधार मात्र इतना है कि पत्रकार लगातार निस्पक्षता के साथ समाचारों का प्रकाशन कराता चला आ रहा था और वह अपनी खबरों के माध्यम से शासन प्रशासन को लगातार मिल रही सूचनाओं से अवगत कराता आ रहा था। पत्रकार रवि सिंह कोरिया जिले में एक दैनिक अखबार के जिला प्रमुख का दायित्व निभाते हुए लगातार निस्पक्षता के साथ खबरों का प्रकाशन करते चले आ रहे थे और यही वजह बनी जो उनके ऊपर एफआईआर दर्ज की गई जिससे उनकी खबरों को रोका जा सके और व्यवस्था की पोल खुल न सके। आनन फानन में पुलिस ने पत्रकार पर एफआईआर दर्ज तो कर ली और पत्रकार को गंभीर धाराओं में अपराधी भी बना दिया लेकिन अब जब मामले की जानकारी आम लोगों सहित पत्रकार सुरक्षा समिति तक पहुंचने लगी मामले ने अलग मोड़ ले लिया है।
अब आम लोगो सहित पत्रकार सुरक्षा समिति का भी मानना है कि पत्रकार ने एक ऐसी खबर का प्रकाशन किया जिसकी जानकारी यदि सार्वजनिक नही की जाती तो शायद मामले को लेकर पुलिस प्रशासन भी सजग नहीं होता क्योंकि मामला सोशल मीडिया से जुड़ा हुआ था और जिसमें सोशल मीडिया के वाट्सएप समूह में चल रही एक चैट को जिसमें एक समुदाय विशेष को लेकर टिप्पणी की जा रही थी को लेकर ही पत्रकार ने खबर का प्रकाशन किया था, पत्रकार ने स्वयं न तो किसी जाति समुदाय पर टिप्पणी की और ना ही किसी तरह की मर्यादा अपने शब्दों में तोड़ी बल्कि पत्रकार ने एक ऐसी सूचना का प्रकाशन किया जिसकी जानकारी मिलने पर समुदाय विशेष को भी यह पता चल सका कि समुदाय विशेष के संदर्भ में एक सोशल मीडिया वाट्सएप समूह में क्या चल रहा है।
खबर पढक़र समुदाय विशेष भी हुआ अवगत
पत्रकार की खबर पढ़कर समुदाय विशेष भी सोशल मीडिया में चल रही समाज के संदर्भ के लिखी जा रही अमर्यादित टिप्पणियों से अवगत हो सका और लिखने वाले पर कार्यवाही की मांग करने लगा, लेकिन पूरे मामले में पुलिस ने पत्रकार को ही दोषी ठहरा दिया और उसके ऊपर एफआईआर दर्ज कर लिया, जबकि समुदाय विशेष के लोगों का भी यही मानना था और है कि जिस सोशल मीडिया वाट्सएप समूह की सूचना से पत्रकार ने खबर का प्रकाशन किया उक्त खबर से समाज अपने विरुद्ध लिखे जा रहे अप्रिय शब्दों से अवगत हो सका और यह समाचार पत्र की खबर से ही संभव हो सका और इसको लेकर पत्रकार को दोषी मानना न्यायोचित कहीं से नहीं होगा। वहीं अब लगभग सभी लोगों का मानना है कि पत्रकार ने समाज विरुद्ध जब कोई टिप्पणी की ही नही तो दोषी पत्रकार को ठहराया जाना कहां तक सही होगा क्योंकि पत्रकार ने तो समुदाय विशेष के सामने उन विषयों को अपने खबर के माध्यम से पहुचाने का प्रयास किया जो समुदाय विशेष को लेकर विरुद्ध लिखे जा रहे थे।
पत्रकार पूरे मामले में कैसे षड्यंत्रकारी हो सकता है?
पत्रकार पूरे मामले में कैसे षड्यंत्रकारी हो सकता है जबकि उसने कुछ छिपाने की बजाए सार्वजनिक रूप से यह सामने लाने का प्रयास किया कि सोशल मीडिया समूह के वाट्सएप समूह में कुछ ऐसा भी चल रहा है जो सभी के लिए जानना जरूरी है क्योंकि उस समूह में जिले के अन्य पत्रकारों सहित कई जनप्रतिनिधि व पुलिसकर्मि भी मौजूद हैं और जो विषय पर ठीक ढंग से सज्ञान नहीं ले रहें हैं। पत्रकार रवि सिंह पर कोरिया पुलिस के द्वारा दर्ज की गई एफआईआर को लेकर अब प्रदेशभर के पत्रकार फिर से पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग करने लगे हैं जिससे किसी खबर को लेकर किसी पत्रकार को इस तरह से कानूनी रूप से प्रताड़ित न होना पड़े। पत्रकार रवि सिंह पर दर्ज आनन फानन वाली एफआईआर को खत्म करने के लिए प्रदेशभर में पत्रकार सुरक्षा समिति ज्ञापन सौंप रही है और अभी तक 20 जिलों में ज्ञापन सौंपा जा चुका है। पूरे मामले में पत्रकार द्वारा समुदाय विशेष से भी आग्रह किया जा चुका है कि उसकी मंशा किसी को आहत करने की कतई नहीं थी और न ही उसने यह भी अपनी खबरों में लिखा जो कुछ समाचार में लिखा जा रहा है वह सत्य ही है पत्रकार ने सोशल मीडिया समूह के वाट्सएप समूह में चल रही एक ऐसी चैट को खबर बनाया जो शायद एक समुदाय विशेष के लिए गलत शब्दो के साथ लिखा जा रहा था और जिसमें षड्यंत्र की भी सुगबुगाहट थी। पत्रकार की खबर से कहीं न कहीं समुदाय विशेष भी उस सोशल मीडिया चैट से अवगत हो सका और सभी कुछ समाज व पुलिस के सामने आ सका।
उक्त मामले में
एक नहीं काई खबर हुई प्रकाशित
पत्रकार द्वारा उक्त विषय मे ऐसा भी नहीं है कि केवल एक ही बार कोई समाचार प्रकाशित किया गया, पत्रकार ने समुदाय विशेष के विरोध दर्ज करने से लेकर जिले के पुलिस कप्तान का भी बयान दूसरे दिन खबर में प्रकाशित किया और समुदाय विशेष के विरोध में भी अपनी जिम्मेदारी निभाई। पत्रकार कहीं से दोषी नहीं था फिर भी उसपर एफआईआर केवल इसलिए दर्ज की गई क्योंकि वह लगातार निष्पक्षता के साथ खबरों का प्रकाशन करता चला आ रहा था और उसी से क्षुब्ध होकर कुछ लोगों की पत्रकार को फंसाये जाने की रणनीति का वह शिकार हो गया।
पत्रकार संगठन
की मांग-
पत्रकार रवि सिंह पर दर्ज की गई एफआईआर वापस लेकर पत्रकार को दोष मुक्त किया जाए और उसकी खबर पर उसके विरुद्ध गंभीर धाराओं के तहत मामला पंजीबद्ध न किया जाए इसलिए पत्रकार सुरक्षा समिति अब प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री से मांग कर रहा है कि पत्रकारों के लिए पत्रकार सुरक्षा कानून लाया जाए और राज्यपाल से भी पत्रकार रवि सिंह मामले में हस्तक्षेप की मांग पत्रकार सुरक्षा समिति कर रही है। पूरे मामले में प्रदेश के पुलिस महानिदेशक से भी पत्रकार सुरक्षा समिति ने मांग की है कि वह मामले में पत्रकार के साथ न्याय के पक्षधर बने जिससे निष्पक्ष लिखने वाले एक पत्रकार का न्याय व्यवस्था पर विश्वास कायम रह सके और प्रदेश के कानून व्यवस्था को लेकर वह अपने लिए आस्वस्त हो सके। पूरे मामले में एक प्रमुख विषय यह भी है जो पत्रकार सुरक्षा समिति द्वारा मांग की जा रही है और वह यह कि पत्रकार के द्वारा प्रकाशित किसी खबर पर गंभीर धाराओं के तहत मामला पंजीबद्ध करने से पहले यदि उससे नोटिश देकर जवाब मांग लिया जाता तो शायद यह न्याय अनुसार सही होता, जबकि जिले की पुलिस ने पत्रकार को गंभीर धाराओं के तहत अपराधी घोषित कर दिया है और उसे सुनवाई के एक मौका भी नही दिया है जो कहीं न कहीं एक षड्यंत्र समझ मे आ रहा है और कानून के विपरीत जारी कार्य है।
