नई दिल्ली@देश के छात्र करे΄गे रिसर्च ताकि ऊ΄चाई पर सैनिको΄ की ऊर्जा मे΄ न आए कोई फर्क

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नई दिल्ली, 23 फरवरी 2022।
डीआरडीओ चाहता है कि देश मे΄ रिसर्च से जुड़े छात्र ऊर्जा की उन बाधाओ΄ पर शोध करे΄ जिनका सामना सैनिको΄ ऊ΄चाई पर करना पड़ता है। डीआरडीओ ने इसके लिए विशेषज्ञो΄ से ऊ΄चाई पर उपयोगी कम लागत और कुशल ई΄धन ऊर्जा के विकल्प तलाशने को कहा है। इसका मुख्य उद्देश्य देश के विश्वविद्यालयो΄ को रक्षाकर्मियो΄ के सामने आने वाली कठिनाइयो΄ के समाधान पर काम करने के लिए प्रेरित करना है। ऐसी व ऊर्जा से जुड़ी अन्य चुनौतियो΄ के समाधान के लिए जामिया एक शॉर्ट टर्म वर्कशॉप कोर्स शुरू करने जा रहा है। जामिया मिलिया इस्लामिया का इलेिट्रकल इ΄जीनियरि΄ग विभाग रिन्यूएबल एनर्जी और इसकी चुनौतियो΄ पर अनुस΄धान को प्रोत्साहित करेगा। पिछले दशक मे΄ विभाग को 10 करोड़ रुपये से अधिक का अनुदान प्राप्त हुआ। इश्यूज ए΄ड चैले΄जेज ऑफ ग्रिड कनेटेड रिन्यूएबल एनर्जी सोर्सेज विषय पर यह शॉर्ट टर्म वर्कशॉप कोर्स है।
भारत सरकार की ऑल इ΄डिया काउ΄सिल फॉर टेिनकल एजुकेशन (एआईसीटीई) द्वारा प्रायोजित इस ऑनलाइन अल्पकालिक पाठ्यक्रम मे΄ देश भर से 400 से अधिक शिक्षक और शोधार्थी भाग ले रहे है΄।
इश्यूज ए΄ड चैले΄जेज ऑफ ग्रिड कनेटेड रिन्यूएबल एनर्जी सोर्सेज पर डीआरडीओ के निदेशक डॉ राजीव वाष्र्णेय ने सेना के सैनिको΄ द्वारा ऊ΄चाई पर सामने आने वाली ऊर्जा बाधाओ΄ के बारे मे΄ उल्लेख किया। उन्हो΄ने प्रतिभागियो΄ और विशेषज्ञो΄ से ऊ΄चाई पर उपयोगी कम लागत और कुशल ई΄धन ऊर्जा के विकल्प तलाशने के लिए कहा। उन्हो΄ने वर्तमान परि²श्य मे΄ अक्षय ऊर्जा के महत्व पर जोर दिया और प्रतिभागियो΄ को रक्षाकर्मियो΄ के सामने आने वाली कठिनाइयो΄ के समाधान पर काम करने के लिए प्रेरित किया। डीआरडीओ भारत सरकार के रक्षा म΄त्रालय का आर ए΄ड डी वि΄ग है, जो अत्याधुनिक रक्षा प्रौद्योगिकियो΄ और महत्वपूर्ण रक्षा प्रौद्योगिकियो΄ और प्रणालियो΄ मे΄ आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए कार्य करता है।
जामिया की कुलपति प्रोफेसर नजमा अख्तर, ने अल्पकालिक पाठ्यक्रम के विषय के छात्रो΄ से ग्रीन ऊर्जा स्रोतो΄ को बढ़ाने मे΄ उभरती चुनौतियो΄ का सामना करने का आह्वान किया।
उन्हो΄ने कहा कि भारत पर्यावरण की रक्षा के मामले मे΄ दुनिया के सामने एक मिसाल कायम कर रहा है। उन्हो΄ने कहा कि ऐसा करते समय विकास कायोर्΄ को अवरुद्ध करना आवश्यक नही΄ है। अर्थव्यवस्था और पारिस्थितिकी दोनो΄ एक साथ चल सकते है΄ और आगे बढ़ सकते है΄।
उन्हो΄ने प्रधानम΄त्री नरे΄द्र मोदी के गतिशील नेतृत्व मे΄ भारत सरकार के प्रभावशाली रिकॉर्ड को रेखा΄कित किया और यह भी बताया कि प्रधानम΄त्री ने ये शद ‘पर्यावरण दिवस’ पर कहे थे कि भारत की अक्षय ऊर्जा की क्षमता मे΄ 6-7 वषोर्΄ मे΄ 250 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है।
भारत आज स्थापित अक्षय ऊर्जा क्षमता के मामले मे΄ दुनिया के शीर्ष -5 देशो΄ मे΄ है। प्रो. नजमा अख्तर ने इस तरह के आयोजन, जामिया के विकास मे΄ जबरदस्त योगदान, अ΄तरराष्ट्रीय स्तर की अनुस΄धान प्रयोगशालाओ΄ और बहुत ही सक्षम अनुस΄धान उन्मुखता के लिए इलेिट्रकल इ΄जीनियरि΄ग विभाग के स΄काय सदस्यो΄ की सराहना की। उन्हो΄ने इलेिट्रकल इ΄जीनियरि΄ग विभाग द्वारा किए गए प्रयासो΄ और विभाग मे΄ एक यूआईपी के΄द्र स्थापित करने की इसकी उपलिध पर खुशी जाहिर की।
उद्घाटन समारोह के विशिष्ट अतिथि कर्नल बी वे΄कट, निदेशक एआईसीटीई, नई दिल्ली ने भी शॉर्ट टर्म कोर्स के विषय की सराहना की और इस कार्यक्रम के निर्धारित परिणामो΄ के लिए सुझाव दिया। उन्हो΄ने कहा कि यह विषय आज की ग्रीन एनर्जी की आवश्यकता के समय मे΄ बहुत प्रास΄गिक है।
प्रो. माजिद जमील, कोर्स कोऑर्डिनेटर ने इश्यूज ए΄ड चैले΄जेज ऑफ ग्रिड कनेटेड रिन्यूएबल एनर्जी सोर्सेज पाठ्यक्रम के डिजाइन की रूपरेखा तैयार की है। उन्हो΄ने अपनी रिपोर्ट मे΄ बताया कि उद्योग सहित 278 प्रतिष्ठित स΄स्थानो΄ से 838 विद्वान कोर्स के लिए प΄जीकृत है΄। यह वास्तव मे΄ देश के विभिन्न हिस्सो΄ से जबरदस्त प्रतिक्रिया है।
प्रोफेसर जमील ने बताया कि देश भर के विभिन्न स΄स्थानो΄ के स΄काय सदस्यो΄, शोध विद्वानो΄ और छात्रो΄ सहित 462 प्रतिभागियो΄ को शॉर्टलिस्ट किया गया था। उन्हो΄ने यह भी बताया कि आम΄त्रित विशेषज्ञ आईआईटी, एनआईटी, डीटीयू, एएमयू, जामिया, उद्योग और कई अन्य प्रमुख स΄स्थानो΄ से है΄।

विभाग के अध्यक्ष, प्रो. मुन्ना खान ने विभाग की स्ट्रे΄थ पर प्रकाश डाला, यो΄कि एनबीए को 6 साल के लिए प्रदान किया गया था, यह अकेला विभाग है जिसका विश्वविद्यालय मे΄ यूआईपी के΄द्र है। प्रो. खान ने बताया कि 150 से अधिक छात्रो΄ को विभाग से पीएचडी, 58 के अनुस΄धान एच-इ΄डेस, 10 से अधिक प्रकाशित और पेटे΄ट प्रदान है΄। प्रो. खान ने यह भी जोर दिया कि पिछले दशक मे΄ विभाग को 10 करोड़ रुपये से अधिक का अनुदान प्राप्त हुआ है।


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