
अम्बिकापुर ,20 फरवरी 2022(घटती-घटना)।: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा केन्द्रीय जेल अम्बिकापुर में अम्बिकापुर जेल अधीक्षक राजेन्द्र गायकवाड़ जी के अनुमति से पुरूष वार्ड में आध्यात्मिक प्रवचन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें जेल अधीक्षक राजेन्द्र गायकवाड़, सरगुजा संभाग की सेवाकेन्द्र संचालिका ब्रह्माकुमारी विद्या दीदी, एवं जेल के स्टाफ तथा लगभग 500 कैदी भाई कार्यक्रम में उपस्थित थे।
सरगुजा संभाग की सेवाकेन्द्र संचालिका ब्रह्माकुमारी विद्या दीदी कैदी भाईयों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन हो, उनका आन्तरिक शक्तियाँ जागृत हो, उनका मनोबल एवं आत्मविश्वास बढे इस पर अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में सुकरात का उदाहरण देते हुये कहा कि भले ही वो दिखने में सुन्दर नहीं थे परन्तु उनके विचार बहुत सुन्दर थे इसी प्रकार मनुष्य अपने कर्मो से सुन्दर बनता हैं इसलिये मनुष्य को श्रेष्ठ कर्म करना चाहिये जिससे उसकी सुन्दरता सदा बनी रहेगी इसका आधार है श्रेष्ठ विचार। क्योंकि जितना हम अपने विचारों को श्रेष्ठ बनायेंगे उतना हमारा कर्म श्रेष्ठ बनेगा और जब कर्म श्रेष्ठ बनेगा तभी हम महान बनेंगे। और आगे उन्होंने कहा कि सदा ये ध्यान रहें कि भगवान हमें देख रहा है तो हम अपने कर्मों पर अटेन्षन रहेगा क्योंकि जैसे बाहर सी.सी. टी.वी कैमरें के निगरानी में रहते तो बुरा कर्म करने से डरते है वैसे ही सदा हमें ये अटेन्षन रहे कि हम भगवान की नजर में है तो ऑटोमेटिकली हमसे श्रेष्ठ कर्म ही होगा बुरा कर्म नहीं। दिव्य कर्म करने वाला मानव देवता कहलाते हैं और आसुरी कर्म करने वाला मानव असुर कहलाता हैं। जो देवता होते हैं उनके अन्दर सदा ही देने का गुण होता है देने वाला ही महान बनता हैं तो हमें अपने जीवन को गुणों से इतना परिपूर्ण बनाये। और सदा लक्ष्य रखे कि मुझे कुछ न कुछ लोगो को देते ही रहना हैं कभी किसी से लेने की भावना नहीं रखना हैं क्योकि जो हम देते हैं वहीं हमारे पास रिटर्न में आता है दूसरों को प्यार देंगे तो प्यार मिलेगा, सम्मान देंगें तो सम्मान मिलेगा इसलिये सदा देने की भावना रखना हैं। हमेशा हमें दूसरों के गुणों को देखने का अभ्यास करना चाहिये तभी हम गुणमूर्त बनेंगे।