अंबिकापुर@महामाया पहाड़ अतिक्रमण मामले में भाजपा असमंजस में

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अंबिकापुर 19 फरवरी 2022 (घटती-घटना)। भाजपा पार्षद के आरोपों के बाद कांग्रेस हमलावर हो गई है। कांग्रेस ने पूछा है कि पार्षद और भाजपा महामाया पहाड़ की सीमा कहां तक मानते हैं? इसे स्पष्ट करें। जहां तक कांग्रेस के जनप्रतिनिधियों का सवाल है वह जनता को शासन की योजनाओं का लाभ दिलाने की पहल पहले भी करते थे और आगे भी करते रहेंगे। दस्तावेजों और पात्र, अपात्रों की जांच का जिम्मा प्रशासन का है।
जिला कांग्रेस महामंत्री अरविंद सिंह गप्पू ने एक बयान में कहा कि महामाया पहाड़ पर कब्जे को लेकर प्रशासन की वह रिपोर्ट सार्वजनिक है जिसके सम्बंध में मीडिया में कलेक्टर ने कहा है रिपोर्ट का परीक्षण कराया जा रहा है। रिपोर्ट में राजस्व और वन भूमि मिलाकर कुल 254 लोगों द्वारा 3.39 हेक्टेयर जमीन पर अतिक्रमण बताया गया है। इस पर भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष ने पूरा महामाया पहाड़ खाली कराने का अल्टीमेटम दिया है। वहीं भाजपा पार्षद रियासत काल से बसे लोगों को पट्टा देने की मांग करते है। भाजपा खुद असमंजस की स्थिति में है। महामाया पहाड़ की रिपोर्ट में कुछ नया हासिल न होता देख भाजपाई नई रिपोर्ट लेकर लोगों के बीच भय का वातावरण निर्मित करने में लगे हैं। नई रिपोर्ट के माध्यम से महामाया पहाड़ पर अतिक्रामकों की संख्या 500 बताने के लिए बधियाचुंवा, खैरबार, घुटरा पारा, डबरीपानी को महामाया पहाड़ बताना हास्यास्पद है। भाजपा पार्षद ने महामाया पहाड़ के कब्जाधारियों के विस्थापित किए जाने की बात पर सवाल उठाते हुए पूछा था सिर्फ उनका ही क्यो, नमना कला, गांधीनगर,फुन्दूरडीहारी, बौरीपारा, गंगापुर, जोड़ा तालाब सहित अन्य क्षेत्र में शासकीय जमीन पर रह रहे लोगो का विस्थापन क्यो नहीं? भाजपा पार्षद ने इन क्षेत्रों के लोगों को उनकी पुरानी बसाहट से हटाकर विस्थापन के तहत नई जगह बसाना चाहते हैं। इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भाजपा और उनके पार्षद डरने की जरूरत नहीं है। 31 अक्टूबर 2017 के पहले से रह रहे एक भी व्यक्ति को विस्थापित नहीं होने दिया जाएगा। कांग्रेस हमेशा से गरीबों की लड़ाई लड़ती रही है। भाजपा पार्षद कभी महामाया पहाड़ के कब्जा धारियों को हटाने तो कभी रियासत काल से रह रहे लोगों को पट्टा देने की बात करते हैं। लगता है वे अपना मानसिक संतुलन खो बैठे हैं। पहले उन्हें अपनी मंशा साफ करने की जरूरत है।
हम फिर से भाजपा पार्षद को याद दिला दें कि महामाया पहाड़ की जांच में प्रशासन को रोहिंगया नहीं मिले। उनमें जरा सी नैतिकता बची है तो चुनौती के अनुरूप इस्तीफा दें। गरीब कब्जाधारियों का विरोध कर रहे लोग खुद अपने अनैतिक कार्य छोड़ कर जनता के सामने आएं अन्यथा जनता उन्हें मुंहतोड़ जवाब देगी।


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