
24 साल वाले जिले को आगे बढ़ाने में 17 कलेक्टर का योगदान,कोरिया जिले के 17 कलेक्टर कौन-कौन थे जानें इनके बारे में…
कांग्रेस सरकार में कलेक्टर विकासशील व भाजपा सरकार में एस प्रकाश का सबसे लंबा था कार्यकाल,किस कलेक्टर ने कोरिया जिले को दी एक अलग पहचान
-रवि सिंह –
बैकुण्ठपुर 31 जनवरी 2022 (घटती-घटना)। अविभाजित मध्यप्रदेश में 25 मई 1998 को कोरिया जिला अस्तित्व में आया और अस्तित्व में आते ही कोरिया जिले के पहले कलेक्टर एसके वेद को बनया गया, वही 1 नवंबर 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हुआ और इस नए राज्य का हिस्सा रहा कोरिया जिला, नए राज्य में कोरिया जिले के पहले कलेक्टर विकासशील रहे जबकि जिले के तीसरे कलेक्टर भी इन्हें कहा जा सकता है पर छत्तीसगढ़ राज्य गठन के दौरान यह कोरिया जिले के पहले कलेक्टर है, वही कोरिया जिले के 5 वें कलेक्टर आमिर अली भाजपा सरकार के पहले कलेक्टर रहे है, जिस समय कोरिया जिला बना उस समय कांग्रेस की सरकार थी और छत्तीसगढ़ राज्य बनते तक कांग्रेस की सरकार रही, इस 5 साल में कांग्रेस ने दो कलेक्टर बदले, कांग्रेस सरकार के तीसरे कलेक्टर भाजपा की सरकार आने के बाद बदले गए, जिनका नाम विकासशील है, 2003 के बाद भाजपा की सरकार आई और इस 15 साल में 8 कलेक्टर भाजपा सरकार ने बदले, भाजपा सरकार के अंतिम कलेक्टर नरेंद्र कुमार दुगा रहे, कलेक्टर नरेंद्र कुमार दुगा का स्थानांतरण कांग्रेस सरकार ने किया, इसके बाद से 3 साल वाली कांग्रेस सरकार में नरेंद्र कुमार दुग्गा को लेकर पांच कलेक्टर बदला, इस प्रकार कांग्रेस व भाजपा सरकार मिलाकर कोरिया जिले के 24 साल के इतिहास में 17 कलेक्टर कोरिया जिले को मिले, जिसमें 8 साल की कांग्रेस सरकार में बदले आठ कलेक्टर तो वही भाजपा सरकार ने 15 साल में बदले आठ कलेक्टर। दोनों की तुलना में कांग्रेस सरकार कलेक्टर बदलने में माहिर निकली। कांग्रेस सरकार में कोरिया कलेक्टर विकासशील ने जहां 3 साल का कार्यकाल पूरा किया, तो वहीं भाजपा सरकार में एस प्रकार का 34 महीने का राह कार्यकाल जो सिर्फ 3 साल में 2 महीने ही कम था।
एस के वेद प्रथम कोरिया कलेक्टर के रूप में हुए थे पदस्थ
अविभाजित मध्यप्रदेश में कोरिया जिला का गठन 1998 में हो गया था और कोरिया जिले के गठन होने उपरांत जिले के पहले कलेक्टर के रूप में एस के वेद की पदस्थापना जिले में हुई थी। एस के वेद ने 25 मई 1998 को जिले का पदभार ग्रहण किया और 10 जून 1999 को उनका जिले से तबादला कर दिया गया।कलेक्टर एस के वेद ने कोरिया कलेक्टर के रूप में अपने 12 महीने के कार्यकाल में जो कुछ नवीन जिले को लेकर उसके विकास व उसकी स्थापना को लेकर हो सका वह हर संभव प्रयास किया।
नीलम रॉव कोरिया जिले की दूसरी कलेक्टर के रूप में हुईं थी पदस्थ
कोरिया जिले के दूसरे कलेक्टर के रूप में आईएएस नीलम शमी राव जो एक महिला आईएएस थीं को अविभाजित मध्य प्रदेश के कोरिया जिले के दूसरी कलेक्टर की जिम्मेदारी मिली उस समय प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी 10 जून 1999 को इन्होंने कलेक्टर का पदभार ग्रहण किया 21 दिसंबर 2000 में इनका तबादला कर दिया गया और यह भी जिले से चली गई इनका कार्यकाल 18 महीने का रहा इस 18 महीने में उन्होंने नवीन जिले को पहचान देने के लिए और पूर्णता स्थापित करने के लिए काम किया।
विकासशील कोरिया के तीसरे व छत्तीसगढ़ के पहले कलेक्टर रहे,कार्यकाल 3 साल का रहा
कलेक्टर विकासशील मध्य प्रदेश विभाजन के बाद छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के पहले कलेक्टर के रूप में जिले की जिम्मेदारी निभाने पहुंचे और कोरिया जिले के तीसरे कलेक्टर के रूप में कार्य करते हुए इनका कार्यकाल 3 साल का रहा, इन्होंने 3 जनवरी 2001 को कोरिया कलेक्टर के पद पर पदभार ग्रहण किया 17 दिसंबर 2003 को इनका तबादला हुआ और कोरिया का प्रभार छोडक़र यह अन्यत्र स्थान्तरित होकर चले गए, पूरे 3 साल कांग्रेस की सरकार रही और पूरे 3 साल विकासशील कोरिया के कलेक्टर बने रहे कोरिया जिले के गठन के बाद से सबसे लंबा कार्यकाल विकासशील का ही रहा। कलेक्टरों में से सबसे लंबा कार्यकाल भी उनका जिले में रह और नवीन जिले के लिए विकास की संभावनाओं सहित जिले को बेहतर रूप देने की भी जिम्मेदारी उन्हीं के जिम्मे आई उनके कार्यकाल के दौरान। अपने तीन वर्षों के लंबे कार्यकाल के दौरान कलेक्टर विकासशील ने नए प्रदेश के नए जिले का विकास पूरे मनोयोग से किया इन्हीं के कार्यकाल में कोरिया कलेक्टर संयुक्त कार्यालय बना और इन्हीं के कार्यकाल में उसका उद्घाटन भी किया गया। विकासशील जैसा नाम था वैसा ही उनका कार्यकाल भी रहा उनके ही कार्यकाल में जिले के विकास को नया आयाम मिला, इसी वजह से जिलेवासी आज भी कलेक्टर विकासशील को याद करते हैं उनके कार्यकाल में कोरिया जिला पूरी तरह अस्तित्व में आ गया था। विकासशील के ही कार्यकाल में झुमका बांध के तट से लगकर जिले के अधिकारियों का बंगला बना और उन्ही के कार्यकाल में अन्य शासकीय कर्मचारियों के आवास भी बने। विकासशील के कार्यकाल में उनकी एक बात और बेहतरीन रहा करती थी वह बड़े जिंदादिली से जिलेवासियों के मुलाकात किया करते थे और वह हमेशा जिले के युवाओं को लेकर उनके लिए प्रेरणा भी बना करते थे। विकासशील एक ऐसे आईएएस थे जिन्होंने सरकारी संस्थाओं में अध्ययन करके आईएएस बनने में सफलता प्राप्त की थी और वह शासकीय शिक्षण संस्थाओं के लिए सदैव सकारात्मक रहा करते थे और युवाओं को आगे बढ़ने की सफल होने की सीख भी दिया करते थे।
दुर्गेश चंद्र मिश्रा कोरिया जिले के चौथे कलेक्टर रहे
दुर्गेश चंद्र मिश्रा ने 26 दिसंबर 2003 को कोरिया कलेक्टर के रूप में अपना पदभार ग्रहण किया और 24 जुलाई 2004 को इस पद से मुक्त हो कर अन्यत्र स्थान्तरित हो गए इन्हीं के रहते हुए छत्तीसगढ़ राज्य का पहला विधानसभा चुनाव संपन्न हुआ जिसमें सरकार भाजपा की बनी और लोकसभा चुनाव भी इन्ही के कार्यकाल में संपन्न हुआ।
अमिर अली कोरिया के पांचवें कलेक्टर रहे
भाजपा की सरकार बनते ही कोरिया जिले के पांचवें कलेक्टर अमीर अली रहे और भाजपा सरकार के पहले कलेक्टर उनका कार्यकाल 17 महीने का रहा 25 जुलाई 2004 को इन्होंने कोरिया कलेक्टर का पदभार संभाला 5 फरवरी 2006 को कार्य मुक्त हो गए इन्होंने भाजपा सरकार के साथ मिलकर कोरिया जिले को विकसित करने का सफर जारी रखा और अपने 17 महीने के कार्यकाल में कोरिया के लिए विकास का काम किया। इनके कार्यकाल में हुई भर्तियां सुर्खियों में रही जिसकी आज भी लोग गाहे बगाहे चर्चा कर ले जाते हैं अनायास उन्हें याद भी कर ले जाते हैं।
शहिला निगार कोरिया जिले की छठवीं कलेक्टर बनी
शहिला निगार ने 10 फरवरी 2006 को कोरिया जिले के कलेक्टर के रूप में पदभार ग्रहण किया और 13 दिसंबर 2007 को यह कार्य मुक्त होकर अन्यत्र स्थान्तरित हो गईं। इस प्रकार इनका कार्यकाल 23 महीनों का कोरिया जिले कलेक्टर के रूप में कार्यकाल रहा और यह एक ऐसी अधिकारी के रूप में अपनी पहचान जिले में छोड़ कर गईं जिनके कार्यकाल में जन सुनवाइयों में लोगों को उनकी समस्याओं का समाधान मिलता रहा और वह एक बेहतर कलेक्टर के रूप में पहचानी गईं।
डॉक्टर कमलप्रीत सिंह कोरिया के सातवें कलेक्टर बने
डॉ कमलप्रीत सिंह कोरिया जिले के सातवें कलेक्टर बनकर जिले में पहुंचे, भाजपा सरकार के तीसरे कलेक्टर के रूप में इनका कार्यकाल 17 महीने का जिले में रहा, 13 दिसंबर 2007 को इन्होंने कोरिया जिले का पदभार ग्रहण किया 25 मई 2009 को कार्यमुक्त होकर सरगुजा जिले के लिए स्थान्तरित हो गए,डॉ कमलप्रीत सिंह का कार्यकाल जिले में कार्यविभाजन को लेकर जाना गया और उन्होंने जिले के सभी कार्यालयों को अलग अलग जिम्मेदारी प्रदान करते हुए अनुविभाग स्तर पर समस्याओं के निराकरण हेतु अधिकारियों को अधिकार दिए कलेक्टर कार्यालय में ही सभी कार्यालयों को अलग अलग कार्यो सहित जन सुनवाई की जिम्मेदारी देकर विकेंद्रीकरण की परंपरा जारी की जिसको लेकर इनकी अलग पहचान बनी।
आलोक अवस्थी कोरिया जिले के आठवें कलेक्टर रहे
आलोक अवस्थी कोरिया जिले के आठवें कलेक्टर बनकर जिले में पदभार ग्रहण किये, और भाजपा सरकार के चौथे कलेक्टर के रूप में इनका कार्यकाल 1 साल का रहा 25 मई 2009 को उन्होंने जिले का पदभार ग्रहण किया 21 मई 2010 को यह जिले से अन्यत्र स्थानांतरित हो गए।
ऋतु सेन कोरिया की नवमी कलेक्टर रही
श्रीमती ऋतु सेन कोरिया जिले की नवमी कलेक्टर और भाजपा सरकार की पांचवी कलेक्टर बनकर जिले में पहुंची, इनका कार्यकाल 21 महीने का रहा इन्होंने कोरिया जिले का पदभार 21 मई 2010 को ग्रहण किया 15 फरवरी 2012 को इनका स्थांतरण सरकार द्वारा कर दिया गया। ऋतु सेन का जिले में कार्यकाल एक मामले में आज भी यादगार है जब इन्होंने एक बिल्डर पर शहर के कार्यवाही की थी और वह कार्यवाही उस समय कलेक्टर के हैसियत से बहोत बड़ी कार्यवाही मानी गई थी।
अविनाश चंपावत कोरिया जिले के दसवें कलेक्टर रहे
अविनाश चंपावत कोरिया जिले के 10वीं कलेक्टर रहे भाजपा सरकार के छठवें कलेक्टर के रूप में इनको कोरिया जिले का प्रभार मिला, इन्होंने कोरिया जिले का पदभार ग्रहण 15 फरवरी 2012 को किया 23 जून 2014 को कार्य मुक्त होकर अन्यत्र चले गए।
एस प्रकाश कोरिया जिले के 11 वे कलेक्टर रहे
एस प्रकाश कोरिया जिले के 11 वे कलेक्टर रहे इन्होंने कोरिया जिले का पदभार 23 जून 2014 को संभाला और 19 मई 2017 को कार्य मुक्त होकर जिले से अन्यत्र स्थांतरित हो गए, अब तक के कलेक्टरों में यह दूसरा नाम शामिल है जिन्होंने सबसे ज्यादा कोरिया जिले में कलेक्टर के रूप में कार्यकाल संपन्न किया। एस प्रकाश जिले को कोरिया नीर की सौगात देने वाले कलेक्टर के रूप में जाने गए और जिलेवासियों को 1 रुपये मे 5 लीटर शुद्ध मिनरल वाटर मिल। सके यह उन्होंने प्रयास किया और जगह जगह कोरिया नीर प्लांट की स्थापना की।
जिले के 12 वें कलेक्टर बनकर जिले की बागडोर सम्हालने पहुंचे नरेंद्र दुग्गा
कोरिया जिले के 12 वें कलेक्टर के रूप में नरेंद्र कुमार दुग्गा को जिले का प्रभार मिला और वह भाजपा शासनकाल के आठवें कलेक्टर के रूप में कोरिया जिले के कलेक्टर के रूप में पदभार ग्रहण किया और उनका कार्यकाल 24 अप्रैल 2017 से 6 फरवरी 2019 तक का रहा नरेंद्र कुमार दुग्गा का जिले में कलेक्टर के रूप में कार्यकाल कुल 22 महीनों का रहा और वह जिले से तब स्थान्तरित किये गए जब प्रदेश की सत्ता कांग्रेस पार्टी के हांथो में चली गई और विधानसभा चुनावों में नरेंद्र कुमार दुग्गा ने ही जिला निर्वाचन अधिकारी की जिम्मेदारी निभाई। नरेन्द्र कुमार दुग्गा ने भी जिले के लिए बहोत कुछ किया वहीं उनके कार्यकाल के कुछ कार्यों को लेकर उनकी आलोचनाएं भी हुईं जिनमे मुरमा क्षेत्र में देवखोल गांव का मामला प्रसिद्ध है।
जिले के 13 वें कलेक्टर बनकर जिले की बागडोर सम्हालने पहुंचे विलास संदीपान भोस्कर
प्रदेश में कांग्रेस की सत्ता स्थापित होते ही कई जिलों के कलेक्टरों का तबादला किया गया जिसमें कोरिया जिले से नरेंद्र कुमार दुग्गा का तबादला करते हुए जिले को नए कलेक्टर के रूप में विलास संदीपान भोस्कर के रुप में 13 वें कलेक्टर के रूप में उन्हें जिले में पदस्थ किया गए, जिनका जिले में कुल कार्यकाल 4 महीनों के रहा और वह वर्ष 2019 में दिनांक 06 फरवरी 2019 से 10 जून 2019 तक पदस्थ रहे। इन्ही के कार्यकाल में लोकसभा चुनाव संपन्न हुए और चूंकि चुनाव में कांग्रेस प्रत्यासी की जिले की तीनो विधानसभाओं में हार हो गई और ले देकर कोरबा क्षेत्र से जाकर कांग्रेस प्रत्यासी की जीत हो सकी और इसी का खामियाजा कलेक्टर विलास संदीपान भोस्कर को उठाना पड़ा और अल्प कार्यकाल में ही उनका स्थानांतरण कर दिया गया। इनके बारे में एक बात और प्रसिद्ध रही कि यह एक ऐसे कलेक्टर के रूप में अपनी पहचान छोड़कर गए जिसको उसके प्रशासनिक क्षेत्र में लिए गए निर्णयों के लिए जाना जाएगा।
14 वें कलेक्टर के रूप में डोमन सिंह को मिली जिम्मेदारी
कोरिया जिले के 14 वें कलेक्टर के रूप में डोमन सिंह को जिम्मेदारी मिली और इनका कार्यकाल 10 जून 2019 से 27 मई 2020 तक कुल एक साल का रहा और उनका कार्यकाल नपा तुला रहा और उनका भी एक वर्ष पश्चात तबादला कर दिया गया।
15 वें कलेक्टर के रूप में जिले में पदस्थ किये गए एस एन राठौर
कोरिया जिले के 15 वें कलेक्टर के रूप में एस एन राठौर को जिले की जिम्मेदारी मिली और उनके कार्यकाल में जिले में कई लोककल्याणकारी शासन की योजनाओं का भी क्रियान्वयन हुआ वहीं कोविड 19 संबंधी जिले में जारी स्वास्थ्य प0व्यवस्था की भी जिम्मेदारी इन्हें ही उस समय सम्हालने का मौका मिला जब कोविड 19 का प्रसार तेज था। एस एन राठौर अपने प्रशासनिक निर्णयों को लेकर अडिग रहने वाले कलेक्टर के रूप में जाने जाते थे और उनका जिले के एक जनप्रतिनिधि से नहीं जम पाना ही उनके जिले से तबादले का कारण बन गया। एस एन राठौर ही वह कलेक्टर थे जिनके तबादला आदेश जारी होते ही सत्ताधारी दल के कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा जिला मुख्यालय सहित जिले के वरिष्ठ अधिकारियों के बंगलो तक मे आतिशबाजी की गई और रात भर की गई जिसकी जमकर आलोचना भी हुई।
16 वें कलेक्टर के रूप में जिले का प्रभार सम्हाल रहे थे कलेक्टर श्याम धावड़े
कोरिया जिले के 16वें कलेक्टर के रूप में जिले की कमान सम्हालने कोरिया जिले के कलेक्टर के रूप में श्याम धावड़े की पदस्थापना सरकार ने जिले में की। कोरिया जिले का इसी समय विभाजन कर दिया गया था और एमसीबी नवीन जिले के गठन को लेकर प्रशासनिक कार्यवाही का जिम्मा सम्हालने का इनको मौका मिला। श्याम धावड़े जिला विभाजन से उपजे असंतुष्टि को साधकर किसी तरह नए एमसीबी जिले के गठन को मूर्त रूप देने में लगे हुए थे, अनुसूचित जनजाति जनसंख्या बाहुल्य कोरिया जिले में श्याम धावड़े अनुसूचित जनजातियों के विकास से भी जुड़ी सम्भावनाओं को तलाश उन्हें मूर्तता प्रदान कर रहे थे और श्याम धावड़े शासन की महत्वाकांक्षी जनकल्याणकारी योजनाओं को लोगों तक पहुंचा पाने में सफल भी हो रहे थे वहीं उनके कार्यकाल और उनकी यह उपलब्धि ही रही कि जिला विभाजन से नाराज कोरिया जिलेवासियों ने नगरपालिका चुनावों में सत्ताधारी कांग्रेस के वार्ड पार्षदों को सबसे ज्यादा मतों और संख्या से विजयी बनाया वहीं पार्षदों पर ही नियंत्रण नहीं रख पाने की वजह से भितरघात की शिकार हुई कांग्रेस ने श्याम धावड़े जिला कलेक्टर का तबादला करा दिया जिससे यह सन्देश गया कि नगरपालिका चुनावों में हार का ठीकरा उन्ही पर फोड़ दिया गया।
17 वें कलेक्टर के रूप में जिले की कमान सम्हालेंगे आईएएस कुलदीप शर्मा
कोरिया जिले के 17 वें कलेक्टर के रूप में अब नए कलेक्टर कोरिया कुलदीप शर्मा जिले की कमान सम्हालेंगे। आईएएस कुलदीप शर्मा जिले की कमान कितने दिनों तक सम्हालते हैं यह भले ही अभी से इस विषय पर कुछ जल्दबाजी होगी लेकिन कलेक्टर कोरिया को वर्तमान में बड़ी जिम्मेदारी मिली है और उन्हें जिम्मेदारी पर खरा उतरना पड़ेगा,एक तरफ जिले का विभाजन अभी होना है और दूसरी तरफ कोरोना की तीसरी लहर हावी है। जिले के मुखिया बतौर जिले की बिगड़ चुकी स्वास्थ्य व्यवस्था कि भी उन्हें बराबर सुध लेनी पड़ेगी और जिलेवासियों के लिए रोजगारपरक कार्यों की भी व्यवस्था करनी होगी इस दौरान जिम्मेदारी बड़ी है अब यह देखने वाली बात होगी कि नए कलेक्टर का कार्यकाल कितना लंबा होता है।