नगरीय चुनावों में निर्वाचित अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के शपथ ग्रहण को लेकर यह कैसी राजनीति? शपथ ग्रहण कार्यक्रम प्रशासन ने ही अलग-अलग संपन्न कराने दी अपनी सहमती
रवि सिंह –
बैकुण्ठपुर 30 जनवरी 2022 (घटती-घटना)। एक ही नगर पालिका के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष का शपथ ग्रहण अलग-अलग क्यों? क्या राजनीति में ऐसे भी दृश्य देखने को मिलते हैं जो कोरिया जिले की दो नगरपालिकाओं में संपन्न हुए चुनावों के बाद शपथ ग्रहण कार्यक्रमों को लेकर देखा जा रहा है, नगरपालिकाओं चुनावों में निर्वाचित अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के शपथ ग्रहण को लेकर यह कैसी राजनीति? भाजपा ने बैकुंठपुर में अपने दल के निर्वाचित अध्यक्ष का अकेले ही करा लिया शपथ ग्रहण कार्यक्रम, सत्ताधारी कांग्रेस ने शिवपुर चरचा नगरपालिका अध्यक्ष व बैकुंठपुर नगरपालिका उपाध्यक्ष का संपन्न कराया अलग से शपथ ग्रहण कार्यक्रम, आखिर एक साथ क्यों नहीं किया दोनों ही दलों ने मिलकर शपथ ग्रहण समारोह? अलग अलग शपथ ग्रहण का आयोजन कर आखिर क्या जतलाना चाहते हैं राजनीतिक दल।
कोरिया जिले की दो नगरपालिकाओं में संपन्न हुए नगरपालिका चुनावों के परिणाम आने उपरांत अध्यक्ष उपाध्यक्ष भी दोनों ही नगरपालिकाओं में निर्वाचित हो चुके हैं। दोनों ही नगरपालिकाओं में अब शपथ ग्रहण को लेकर दोनों ही राजनीतिक दल अलग अलग शपथ ग्रहण कार्यक्रम आयोजित करते नजर आ रहें हैं और जिसमें वह अपने अपने दल के नेताओ को आमंत्रित कर शपथ ग्रहण कार्यक्रम को भव्यता देने का प्रयास कर रहें हैं। शपथ ग्रहण में अलग जाकर शपथ ग्रहण समारोह को दलीय रूप से अपने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के सानिध्य में आयोजित करने का सबसे पहले निर्णय बैकुंठपुर नगरपालिका अध्यक्ष के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान भाजपा द्वारा लिया गया और अब जिसका अनुसरण सत्ताधारी दल कांग्रेस ने किया है और अपने शिवपुर चरचा नगरपालिका अध्यक्ष सहित बैकुंठपुर नगरपालिका उपाध्यक्ष का शपथ ग्रहण अलग से कांग्रेस नेताओं के सानिध्य व उपस्थिति में संपन्न किया है। जिस तरह भाजपा ने बैकुंठपुर नगरपालिका अध्यक्ष के शपथ ग्रहण कार्यक्रम को भाजपामय बनाया उसी तरह कांग्रेस ने भी बैकुंठपुर व शिवपुर चरचा के क्रमश: अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के शपथ ग्रहण कार्यक्रम जिसमें अध्यक्ष सहित उपाध्यक्ष का शपथ ग्रहण कार्यक्रम संपन्न हुआ को कांग्रेसमय बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ा, और सभी कांग्रेस नेताओं की उपस्थिति में कार्यक्रम संपन्न हुआ।
एक साथ भी संपन्न हो सकता था शपथ ग्रहण कार्यक्रम
जिले की दोनों नगरपालिकाओं में शपथ ग्रहण कार्यक्रम एक साथ भी संपन्न किया जा सकता था। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों द्वारा एक साथ यदि अपने अपने निर्वाचित अध्यक्ष उपाध्यक्ष का शपथ ग्रहण कराया गया होता तो कार्यक्रम एक ही साथ संपन्न हो चुका होता और इसका संदेश भी बेहतर जाता जो शहर विकास की अवधारणाओं को दलगत भावना से ऊपर उठकर मानने की भावना को दोनों ही दलों के लोगों के बीच स्थापित करता नजर आता।
पार्षदों का हुआ दो-दो बार शपथ ग्रहण
परिणाम के दिन ही पार्षदों का शपथ ग्रहण करा दिया गया था, इसके बाद फिर से अध्यक्ष उपाध्यक्ष के शपथ ग्रहण के साथ पार्षदों का शपथ ग्रहण कराया गया जो समझ के परे है, जबकि एक बार शपथ ग्रहण हो चुका है ऐसा करने के पीछे सिर्फ एक ही वजह समझ में आती है वह है शक्ति प्रदर्शन, दोनों ही दलों द्वारा पार्षदों का दोबारा शपथ ग्रहण कराकर यह साबित किया गया कि उनके साथ कितने पार्षद हैं यह जानकारी भी आपस मे परस्पर विरोधी दलों को हो जाये।
जिला प्रशासन भी शपथ ग्रहण कार्यक्रमों के राजनीतिक दलों के आयोजन की राजनीति में सहभागी नजर आया
जिले में दो नगरपालिकाओं में संपन्न हुए नगरपालिका चुनावो के बाद अध्यक्ष उपाध्यक्ष के निर्वाचन उपरांत चूंकि जिले में किसी भी एक दल का कब्जा दोनों ही नगरपालिकाओं में कायम नहीं हो सका खासकर सत्ताधारी दल की आपसी गुटबाजी और एक दूसरे को ही खुद अपने ही दल में पराजित करने की नीति के कारण सत्ताधारी दल ने दोनों ही नगरपालिकाओं में बेहतर बहुमत प्राप्त करने उपरांत भी दोनों ही नगरपालिकाओं में क्रमश: अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद से हांथ भी धो डाला और भाजपा अल्पमत के बावजूद एक जगह अध्यक्ष व एक पालिका में अपना उपाध्यक्ष बना ले गई और इससे सत्ताधारी दल ने खासी नाराजगी भी अपने भीतर पाल ली और प्रशासन को भी शपथ ग्रहण की राजनीति में सहभागी बनाने से पीछे नहीं हटी जो देखने को जिले में मिला। जिला प्रशासन सत्ताधारी दल के साथ राजनीति करता नजर आया और शपथ ग्रहण कार्यक्रम जो एकसाथ हो सकता था उसे अलग अलग करने की अनुमति प्रशासन ने दे डाली। प्रशासन चाहता तो अलग अलग शपथ ग्रहण कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति ही नहीं देता और शपथ ग्रहण कार्यक्रम एकसाथ संपन्न हो जाते और बेहतर संदेश भी नगरपालिका की जनता के बीच चला जाता, जो अलग अलग शपथ ग्रहण से नहीं जा सका।
नपा की जनता के लिए भी शपथ ग्रहण कार्यक्रम अलगाव उत्तपन्न करने जैसा
जिले की दो नगरपालिकाओं में जिस तरह अलग अलग दलों ने अपने अपने निर्वाचित अध्यक्ष व उपाध्यक्ष का शपथ ग्रहण कार्यक्रम संपन्न कराया उसे देखकर यह भी लोग कहते सुने गए कि शपथ ग्रहण कार्यक्रमों से यह स्पस्ट हुआ कि कौन से दल ने या किस अध्यक्ष या उपाध्यक्ष के शपथ ग्रहण में किसे बुलाया गया और किसे अपना माना गया। दोनों ही दलों ने अपने अपने अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के शपथ ग्रहण कार्यक्रम में अलग अलग लोगों को आमंत्रित किया जिससे यह स्पस्ट भी हुआ कि किसने किसे अपना माना और किसे अपना नहीं माना यह शपथ ग्रहण कार्यक्रम के बुलावे से साफ हो गया। लोगों का कहना है कि लोकतंत्र में जहां चुनाव जीतकर आया हुआ जनप्रतिनिधि पूरे जन का होता है निर्वाचित क्षेत्र के सभी जनों के हितों के लिए होता है उस भावना और उस पवित्र लोकतांत्रिक विचारधारा को ही जिले में दोनों राजनीतिक दलों ने हाशिये पर डाल दिया और जता दिया कि जिले में दल से ऊपर जनता की सेवा और सुविधा नहीं है दलों का अपना वर्चस्व ही उनके लिए और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के लिए सर्वोपरि है।