बीच सत्र में बेवजह पुस्तकें बदलने का लगाया गया है आरोप
बैकुण्ठपुर 24 जनवरी 2022 (घटती-घटना)। कोरिया जिले में निजी स्कूलों की मनमानी को लेकर वैसे तो आये दिन कोई न कोई खबर जरूर सामने आती रहती है लेकिन इसबार जो मामला सामने आया है वह बेहद गंभीर इसलिए हो जा रहा है क्योंकि मामला जिला मुख्यालय के निजी विद्यालय से जुड़ा हुआ है वह भी एक ऐसे विद्यालय से जहां जिले के आला अधिकारियों के भी बच्चे अध्धयनरत हैं और जिले के जनप्रतिनिधियों के बच्चे भी अध्ययनरत हैं।
मामला बैकुंठपुर रामपुर स्थित सेंट जोशेफ उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का है जहां चालू सत्र में ही विभिन्न कक्षाओं की पुस्तकों को बदलने की तैयारी जारी है। सेंट जोशेफ उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बैकुंठपुर द्वारा चालू सत्र में विभिन्न कक्षाओं की विषय पुस्तकें बदली जाने वाली हैं इस आशय की शिकायत अभिभावकों सहित कुछ पुस्तक दुकानदारों ने जिला शिक्षा अधिकारी से करते हुए इस पर सज्ञान लेकर ऐसा होने से रोकने की मांग की है और उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी का ध्यान इस ओर भी आकृष्ट कराया है कि कोविड 19 के इस संक्रमण काल के दौरान विषय पुस्तकों को नहीं बदले जाने का नियम है जबकि सेंट जोशेफ स्कूल विभिन्न प्रकाशकों से समझौता कर ऐसा करने की तैयारी में है। ऐसा केवल स्कूल प्रबंधन द्वारा पैसा कमाने के उद्देश्य से किया जा रहा यह भी आरोप अभिभावकों व पुस्तक दुकानदारों ने लगाया है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि एक तरफ कोरोना महामारी की वजह से लोग ऐसे ही परेशान हैं, वहीं निजी विद्यालय अधिक आय अर्जित करने के लिए कभी पुस्तकों का बदलाव,कभी स्कूल ड्रेस में बदलाव करके पालकों को परेशान कर उनके ऊपर आर्थिक बोझ डालने का काम कर रहें हैं यह भी शिकायत करते हुए रोक लगाए जाने की मांग की गई है। बताया जा रहा है पहले जनवरी प्रथम सफ्ताह में ही सेंट जोशेफ स्कूल की पुस्तकों की सूची मिल जाया करती थी जो अभी तक नहीं मिली है और अंदर से जैसी सूचना मिल रही उसके अनुसार पुस्तकों को बदलने की तैयारी है जबकि शिक्षा नीति के तहत 2023-2024 में कोर्स बदलना ही है ऐसे में सेंट जोशेफ स्कूल क्यों जल्दबाजी में है पुस्तकों के बदलने को लेकर यह सोचने वाली बात है। अभिभावकों व पुस्तक दुकानदारों की शिकायत पर अब जिला शिक्षा अधिकारी क्या कार्यवाही करते हैं कैसे निजी विद्यालय की मनमानी रोकते हैं यह तो देखने वाली बात होगी लेकिन जिले में निजी विद्यालयों की मनमानी बदस्तूर जारी है जिससे इनकार नहीं किया जा सकता और जिससे अभिभावकों को लगातार परेशान होना पड़ रहा है।