क्या रेंजर से एसडीओ बने साहब का नहीं होगा तबादला,उठ रहा विभाग पर सवाल? रेंज में बिताये 10 वर्ष क्या एसडीओ बन कर भी जिले में ही रहेंगे अखिलेश मिश्रा?
साहब की संपत्तियों को लेकर भी उठते रहे सवाल,रिश्तेदार भी साहब के हो चुके मालदार,क्या सतर्कता व आयकर विभाग भी साहब की गिरफ्त में हैं लगातार
रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर 11 जनवरी 2022 (घटती-घटना)। भाजपा सरकार रही हो या वर्तमान की कांग्रेस सरकार, रेंजर साहब की मौज बरकरार, क्या रेंजर से एसडीओ बने साहब का नहीं होगा तबादला, उठ रहा विभाग पर ही सवाल? रेंजर में 10 साल बिता लिए है क्या एसडीओ बन कर भी कोरिया जिले में ही रहेंगे अखिलेश मिश्रा? एसडीओ बनने के बाद एक बार फिर रेंजर अखिलेश मिश्रा को लेकर चर्चाएं हुई शुरू। पहुंच काफी ऊपर तक बताते है रेंजर साहब! कोई कुछ नहीं कर सकता। एसडीओ बने बैकुंठपुर रेंजर को पदोन्नति पश्चात भी जिले से बाहर भेज पाएगा क्या विभाग? वन विभाग के एक ऐसे रेंजर जो अभी अभी बने हैं डीएफओ लेकिन वर्षों से जमे हैं एक ही जिले में, विभाग में पकड़ भी ऐसी की पूरे प्रदेश के वन विभाग में इनका तबादला कराने किसी भी अधिकारी में हिम्मत नहीं, भाजपा सरकार रही हो या वर्तमान की कांग्रेस सरकार, साहब की मौज बरकरार, साहब की संपत्तियों को लेकर भी उठते रहे सवाल, रिश्तेदार भी साहब के हो चुके मालदार, क्या सतर्कता व आयकर विभाग भी साहब की गिरफ्त में हैं लगातार, अरबों की संपत्ति के साहब बन बैठे हैं जिले सहित प्रदेश में मालिक।
कोरिया जिले में लगातार पदस्थ वर्तमान में रेंजर से एसडीओ पद पर पदोन्नत हुए वन विभाग के एक अधिकारी की दास्तान ऐसी की आज पूरे प्रदेश में उनकी चर्चाएं हैं और उनको लेकर पूरे प्रदेश में वन विभाग में एक ही बात प्रसिद्ध भी है कि साहब की विभाग में चलती ऐसी है कि उनसे पूछे बिना पूरा वन विभाग ही नहीं चलता भले ही शासन किसी का हो सरकार किसी की हो। सत्तापक्ष सहित विपक्ष को अपनी मुट्ठी में कैद करने में साहब की ऐसी महारत है कि साहब के दीवानों की हर तरफ लंबी कतार है और साहब का प्रतिदिन दरबार भी लगता है जहाँ किसी जनप्रतिनिधि से ज्यादा लोगों का हुजूम जुटता है और साहब सभी को प्रसन्न करके ही सभा समाप्त करते हैं जो साहब की आदत में शुमार है। वन विभाग बैकुंठपुर के वर्तमान में रेंजर से डीएफओ पद पर पदस्थ हुए साहब का नाम लेते ही विभाग के बड़े बड़े अधिकारी भी खुद समर्पण कर जाते हैं और उनके विरुद्ध जाने से कतराते हैं ऐसी अनेकों दास्तान भले ही सुनने में अटपटी लगें लेकिन साहब की चलती गजब की है जिसे लेकर सभी जानते हैं साहब से उलझना मतलब अपना नुकसान करना। साहब जिले सहित प्रदेश में अथाह सम्पत्तियों के मालिक भी बन बैठे हैं और यह अरबों की संपत्ति है जिसको लेकर भी चर्चाएं होतीं हैं लेकिन साहब हर जगह अपना तुरुप का इक्का फेंकने में माहिर हैं और आयकर विभाग हो या सतर्कता विभाग कोई इनपर हांथ डालने की हिम्मत नहीं करता। एक वर्ष में इनकी संपत्ति करोड़ों से अरबों तक पहुंच जाती है और साहब के रिश्तेदारों को भी साहब मालामाल बना देते हैं यह भी साहब की खासियत है। साहब जिले में जिले के अधिकारियों को भी गिरफ्त में रखते हैं क्योंकि इनकी पकड़ जबरदस्त है।
प्रदेश भर में है इनके सहित इनके रिश्तेदारों के नाम सम्पत्ति
वन विभाग के इन साहब के नाम और इनके रिश्तेदारों के नाम प्रदेशभर में संपत्ति है यह भी पुख्ता खबर है जो इनके करीबी रिश्तेदार चौक चौराहों में कहते भी फिरते हैं, इनके एक रिश्तेदार की तो ऐसी भी कहानी है कि गुरबत से इन्ही के सहारे बाहर निकलते ही आजकल उन्हें बड़ी बड़ी फेंकने की आदत सी हो गई है और वही खुद साहब की तरफ से खुद को साहब बताकर दिनरात संपत्ति खरीदने की बात करते फिरते हैं और वह सब कुछ खरीद लेंगे यह उनका कहना भी रहता है,साहब के इन रिश्तेदार की कहानी में एक बात और महत्वपूर्ण है वह दिनभर घुमकर केवल जमीन तलाशते हैं और किसकी जमीन बिक रही है उसको लेकर अपना भी प्रस्ताव रखते हैं। साहब के यह रिश्तेदार जमीन भवन सहित कुछ भी ऐसा जो किसी मजबूर द्वारा बेचा जा रहा हो उसे खरीदने तत्तपर रहते हैं और इनको लेकर क्षेत्र में भी लोगों का यही कहना है कि यह खुद को इस तरह का धन कुबेर बताते हैं की जिसे भी जमीन सम्पत्ति बेचनी होती है वह इन्ही से संपर्क करता है क्योंकि सभी जानते हैं कि यह केवल खुद को धन कुबेर बताते भर नहीं हैं यह साबित भी करते हैं कि यह हैं धन कुबेर,और इनका बैठना उठना भी चर्चा का विषय रहता है क्योंकि कभी कहीं भी बैठकर समय बिताने वाले यह साहब के रिश्तेदार आजकल केवल बड़े लोगों की ही संगत पसंद करते हैं।
सूरजपुर जिले के वन विभाग में भी साहब का रहता है हस्तक्षेप
सूत्रों की माने तो साहब वन विभाग के भले ही बैकुंठपुर वन परिक्षेत्र के रेंजर हैं लेकिन इनका प्रभाव और इनकी चलाती पूरे प्रदेश में है। इनके जैसा रेंजर वन विभाग में दूसरा नहीं यह खुद वन विभाग के बड़े अधिकारी भी कहते हैं और कई बड़े अधिकारी भी साहब से ही जुड़कर रहना पसंद करते हैं और उनके ही अनुभवों से कुछ लाभ कमाने की कोशिश करते हैं यह माना जाता है। साहब का कोरिया जिले के निकटस्थ जिले में भी वन विभाग में पर्याप्त हस्तक्षेप है और साहब सूरजपुर जिले के ओड़गी क्षेत्र के वन विभाग के कार्यों में खुलकर हस्तक्षेप करते हैं यह सूत्र बताते हैं। सूरजपुर जिले के ओड़गी वन परिक्षेत्र में जो कि सघन वन क्षेत्र है में वन विभाग के कार्यों में बैकुंठपुर के इन रेंजर साहब की गाड़ीयों का इस्तेमाल निर्माण कार्यों में किया जा रहा है और जिसे लेकर ग्रामीण वहाँ के आक्रोशित व नाराज भी हैं क्योंकि वहां के निवास करने वाले वाहन मालिकों को किसी भी निर्माण कार्य मे अपनी गाड़ी और अपनी मशीनें लगाने की मनाही है और वहाँ बैकुंठपुर रेंजर साहब की ही गाड़ीया चलेंगी यह वहां तय है वन विभाग में। निर्माण कार्यों के घटिया स्तर को लेकर भी ओड़गी क्षेत्र में ग्रामीण नाराज हैं जो काम खुद बैकुंठपुर के रेंजर साहब की देखरेख में हो रहा है। बताया जाता है कि रेंजर साहब के पास बहोत सारी गाçड़यां और मशीनें भी हैं जो उन्होंने कई अन्य लोगों के नाम पर ले रखीं हैं जिससे उनकी पोल भी न खुले और उनका नौकरी में रहकर व्यवसाय भी जारी है।
वर्षों से एक जिले में पदस्थ वन अधिकारी की है दास्तान
वर्षों से एक ही जिले कोरिया में पदस्थ रहकर अरबपति बन चुके एक ऐसे वन अधिकारी की यह दास्तान है जिनके आगे प्रदेश ही हर सरकार नतमस्तक होती आई और वन विभाग भी हमेशा नतमस्तक रहा। प्रदेश में किसी भी भी सरकार रही हो कोरिया जिले के इन साहब को कोरिया जिले से बाहर भेज पाने में कोई सफल नही हुआ जो आज तलक चलती आ रही परम्परा बनी हुई है और इसबार पुनः पदोन्नति हुई और साहब जिले में ही खूंटा गाड़े बैठे हुए हैं और सरकार सहित विभाग मौन है।
बिना अनुमति खरीदी गई संपत्तियां भी हैं इनकी सम्पत्तियों में शामिल
वन विभाग के इन साहब के द्वारा खरीदी गई सम्पत्तियों की लंबी फेहरिस्त है, चल अचल सम्पत्तियों के साथ ही नकद सम्पत्तियों के यह कुबेर माने जाते हैं, इनके द्वारा स्वयं व अपने परिजनों के नाम खरीदी गई सम्पत्तियों के लिए विभागीय अनुमति भी इनके पास है या नही यह भी विभाग को ज्ञात नहीं। वन विभाग के इन साहब के रिश्तेदार भी आज करोड़पति बन चुके हैं और वह भी इन्ही के भरोसे जो कि जिले में लगातार चर्चा का विषय बना रहता है, लेकिन साहब के विरुद्ध जांच को कोई तैयार नहीं।
जमीन खरीदी मामले में बढ़कर बोली लगाने में भी सबसे बड़े सौदागर हैं साहब
वन विभाग के साहब जिले में जमीनों के दाम में वृद्धि के भी कारण बने हुए हैं और यह किसी भी जमीन जो बेची जस रही हो को ज्यादा दाम देकर खरीदने में माहिर और जानकर हैं यह भी चर्चा जिले में होती रहती है,केवल पटना क्षेत्र में इनके पास करोडों की भूमि इनके सहित इनके रिश्तेदारों के नाम दर्ज है जो इन्होंने बढ़कर बोली लगाकर खरीदी है।
आयकर विभाग व सतर्कता विभाग भी है मौन
आर्थिक निगरानी सहित अर्थ अर्जन को लेकर सतर्क रहने वाले विभागों में भी साहब की पकड़ गजब की है, दोनों विभाग भी साहब के सामने मजबूर हैं,साहब की संपत्तियों की न तो जांच होती है और ना ही उनपर कार्यवाही ही, साहब करोड़ो के मालिक बनते जा रहें हैं वेतन से आय में ही न कोई जांच हो रही है न कार्यवाही।