नई दिल्ली ,02 जनवरी 2022 (ए)। केंद्र सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) की पहचान के लिए मौजूदा वार्षिक आय सीमा आठ लाख रुपये के साथ जारी रखने का फैसला किया है। सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दायर एक हलफनामे में केंद्र ने बताया कि मानदंडों के पुनर्मूल्यांकन के लिए सरकार द्वारा गठित समिति ने सुझाव दिया कि मौजूदा मानदंडों को इस साल की काउंसलिंग और प्रवेश के लिए जारी रखा जा सकता है। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने बताया कि आठ लाख रुपए तक की आयवर्ग वाले अभ्यर्थियों को नीट कोर्स में दाखिला देना चाहती है।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में दायर एक हलफनामे में केंद्र सरकार ने ने समिति की एक रिपोर्ट की एक प्रति भी संलग्न की। इसके साथ ही बताया गया कि केंद्र सरकार ने समिति की सिफारिशों को स्वीकार करने का निर्णय लिया है, जिसमें नए मानदंडों को संभावित रूप से लागू करने की सिफारिश भी शामिल है। पूर्व वित्त सचिव अजय भूषण पांडे, सदस्य सचिव आईसीएसएसआर वीके मल्होत्रा और प्रधान आर्थिक सलाहकार संजीव सान्याल की तीन सदस्यीय समिति ने 31 दिसंबर को केंद्र को सौंपी थी। हालांकि इस समिति द्वारा केंद्र सरकार को सौंपी गई अपनी रिपोर्ट में बताया गया कि समिति इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि मौजूदा वार्षिक आय आठ लाख रुपये का मानदंड अधिक समावेशी नहीं है। केंद्र सरकार ने इसी कमेटी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि कोर्ट इसे कम से कम इस साल के लिए मंजूरी दे तो दाखिले के लिए काउंसिलिंग शुरू की जाए। साथ ही केंद्र ने यह भी कहा कि अगले सत्र से ईडब्ल्यूएस के मापदंडों में बदलाव किया जा सकता है। इस मामले पर 6 जनवरी को सुनवाई होनी है। सरकार ने जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुआई वाली पीठ को बताया कि याचिकाएं दाखिल होने के बाद कोर्ट ने उन पर सुनवाई करते हुए काउंसिलिंग पर रोक लगा रखी है, इसलिए अब मौजूदा नियम शर्तों और मापदंडों पर काउंसलिंग की इजाजत दी जाए। अगले सत्र के लिए इनमे कमेटी समुचित व्यावहारिक बदलाव कर देगी। यानी इडब्लूएस कोटे के लिए बुनियादी शर्तों में निजी मकान, घरेलू संपत्ति आदि के मुद्दों पर भी एक्सपर्ट कमेटी समुचित अध्ययन कर अपनी सिफारिशें देगी।
