नई दिल्ली , 31 दिसंबर 2021 (ए)। आम ग्राहकों के लिए नए साल की शुरुआत एक अच्छी तो एक बुरी ख़बर के साथ होने जा रही है. जीएसटी काउंसिल की आज हुई 46वीं बैठक में जूतों और अन्य फुटवियर सामानों पर बढ़ी हुई दरें एक जनवरी से लागू करने के फ़ैसले को बरक़रार रखने का फ़ैसला किया. इसका असर ये पड़ेगा कि इन सामानों पर लगने वाला जीएसटी 5 फ़ीसदी से बढ़कर 12 फ़ीसदी हो जाएगा जिससे जूते महंगे हो जाएंगे . हालांकि थोड़ी राहत देते हुए काउंसिल ने कपड़ों पर लगने वाले जीएसटी की दर को 5 फीसदी से बढ़ाकर 12 फ़ीसदी करने के अपने पुराने फ़ैसले को çफ़लहाल टालने का निर्णय किया है. हालांकि ये राहत केवल अस्थायी मालूम पड़ती है. जीएसटी दरों को तार्किक बनाने के लिए काउंसिल की ओर से बनाई गई कमिटी अब कपड़ों के मामले पर भी विचार करेगी. कमिटी फरवरी में अपनी रिपॉर्ट देगी जिसके बाद फरवरी के अंत में या मार्च में एक बार फिर जीएसटी दरों की समीक्षा की जाएगी. 17 सितंबर को हुई जीएसटी की बैठक में कपड़ों और फुटवियर सामानों पर जीएसटी की दर 12 फ़ीसदी करने का फैसला किया गया था. बढ़ी हुई दर 1 जनवरी 2022 से लागू करने का निर्णय हुआ था लेकिन काउंसिल के फैसले के बाद गुजरात और कुछ अन्य राज्यों समेत कई व्यापार और उद्योग संगठनों ने भी जीएसटी की दर बढ़ाए जाने का विरोध करते हुए सरकार से पुनर्विचार करने का अनुरोध किया था. इसी को देखते हुए आज जीएसटी काउंसिल की बैठक बुलाई गई थी.
कपड़े और जूते पर बढ़ी जीएसटी का कारोबारियों ने किया विरोध
नए साल के शुभारंभ के साथ ही कपड़े व जूते महंगे होने वाले है। एक जनवरी से कपड़े और जूते में जीएसटी में बढ़ोतरी हो रही है। गुरुवार शाम इसके विरोध में कपड़ा कारोबारियों ने अपने संस्थान के बिजली बंद करके जीएसटी के विरोध में नारेबाजी की। पंडरी थोक कपड़ा व्यापारी संघ के अध्यक्ष चंदर विधानी ने बताया कि इस विरोध प्रदर्शन के दौरान कपड़ा बाजार के सभी व्यापारी शाम सात बजे गेट नंबर दो पर इकट्ठा हुए। सभी व्यापारियों ने अपने संस्थानों के बिजली बंद कर दिए थे और कपड़े पर बढ़ी हुई जीएसटी वापस लेने की मांग की।उन्होंने कहा कि इस प्रकार जीएसटी में बढ़ोतरी से कपड़े व जूते दोनों की कीमतों में बढ़ोतरी होगी। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान थोक कपड़ा व्यापारी संघ के अध्यक्ष चंदर विधानी, रेडीमेड एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय मुकीम के साथ ही बड़ी संख्या में कारोबारी उपस्थित थे।
