राज्य शासन आदेश की कर रहा अवहेलना
रायपुर, 11 दिसंबर 2021 (ए )। पूरे देश में सिर्फ छत्तीसगढ़ प्रदेश ही एकमात्र ऐसा देश है जिसने बिना पूर्व सूचना के विगत 20 नवंबर को राजधानी में 220 एवं प्रदेश में 5 हजार हुक्का शॉप्स को बंद करने का आदेश दिया। हुक्का में नशा नहीं है, लेबोरेटरी की रिपोर्ट से भी यह साबित हो चुका है। बैंगलोर में हर्बल हुक्के को अनुमति वहां की सरकार ने दी है। इस संबंध में अचानक रोक लगाए जाने से होटल एवं हुक्काबार में कार्यरत लोगों का जहां रोजगार छिना है वहीं 50 लाख रूपए का वेतन समस्त हुक्का सेंटरों में काम करने वाले कर्मियों का नहीं मिलने से वे दर-दर की ठोकर खा रहे हैं। उक्ताशय की जानकारी प्रेसक्लब रायपुर में आयोजित पत्रकारवार्ता में होटल हुक्का रेस्टोरेंट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष तरीक खान ने दी। खान ने बताया कि शासन के आदेश के खिलाफ समस्त हुक्का कारोबारी उच्च न्यायालय की शरण में याचिका के जरिए पहंुचे जहां पर न्यायालय ने प्रकरण पर विचार करते हुए हुक्के को नशीला पदार्थ मानने से इंकार करते हुए शासन द्वारा लगाई गई रोक को खारिज किया है। पत्रकारवार्ता में उपस्थित अन्य कारोबारियों ने भी जनभ्रांति को दूर करते हुए बताया कि उक्त हुक्का विभिन्न फ्लेवरों में अवश्य मिलता है किंतु एक कोटपा एक्ट के तहत भी नहीं आता है। कारोबारियों से प्रदेश शासन ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 में दिए गए अधिकारों की मनमानी व्याख्या करते हुए कारोबार को बंद करने का जो आदेश जारी किया है वह गलत है। शासन से कारोबारियों की अपील है कि हुक्का पर लगाया गया प्रतिबंध तत्काल खोला जाए अन्यथा न्यायालय की अवमानना करने का दोषी मानते हुए कारोबारी पुनः छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट बिलासपुर में अवमानना का प्रकरण दर्ज करवाएंगे।