उल्टा पड़ा दांव,किसान आंदोलन की नही होगी घर वापसी
-डॉ राजकुमार मिश्र –
अम्बिकापुर,29 नवम्बर 2021 (घटती-घटना)। प्रधानमंत्री श्री मोदी किसी भी विषय पर,या बिना किसी विषय के भी,लगातार बोलते रहने के लिए लालायित रहते है ।।निस्संदेह वह बहुत अच्छा भी बोल लेते हैं मगर हमारे प्रधानमंत्री के बोलने और करने में जो फर्क साफ नजर आता है वह उनके नेतृत्व वाली सरकार की विश्वसनीयता के लिए पलीते से कम साबित नही हो रहा है।
सोमवार को संसद के शीत कालीन सत्र का पहला दिन ही प्रधानमंत्री के झूठ की भेंट चढ़ गया।इसी सत्र में तीनों काले कृषि कानूनों को बाकायदा वापस लिया जाना था ।एक दिन पहले सरकार ने इस सत्र को सार्थक बनाने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई थी मगर उस बेहद महत्वपूर्ण बैठक में उक्त काले कानूनों के कारण फैली देशव्यापी अशांति के एकमात्र जिम्मेदार खुद प्रधानमंत्री शामिल नही हुए ।सिर्फ प्रवचननुमा सन्देश प्रसारित करवा दिया कि हर सवाल का उचित उत्तर सरकार जरूर देगी,महान संसदीय परम्परा निभाने में विपक्ष का ससम्मान सहयोग सदैव मिलना चाहिए।मगर आज सोमवार को दोनों सदनों में सरकार ने दादागिरी से ही अपना काम निकाल लिया।ध्वनिमत जैसे पतले गलियारे से तीनों काले कानून वापस लेकर विपक्ष के तमाम सवालों को रौंदते हुए सरकार निकल गई।इसपर भी मन नही भरा तो सवाल पूछने को ही कार्यवाही में बाधा बताते हुए दोनों सदनों के दर्जनभर से अधिक सदस्यों को सस्पेंड भी कर दिया ।इसके बाद अपनी अनसुनी और अवमानना से तिलमिलाए विपक्ष ने संसद से बाहर जनता के सामने अपनी बात रखी और अबतक यह स्पष्ट हो गया है कि मोदी सरकार का काले कानून वापस लेकर किसानों के आंदोलन को खत्म करने का दांव फेल हो गया है।किसान आंदोलन की घरवापसी नही होनेवाली।चार दिसम्बर को किसानों की बैठक में आंदोलन के अगले कदम को तय करने की घोषणा कर दी गईं है।