लोक निर्माण विभाग सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर क्यों गंभीर नहीं।
जिले में पीडब्लूडी विभाग द्वरा करोड़ों की लागत से कई सड़कों का निर्माण हो रहा है पर गुणवत्ता ठेकेदार के भरोसे।
लोक निर्माण विभाग में लोक निर्माण विभाग में भरा साही चलने का लग रहा आरोप।

-राजेंद्र शर्मा –
खड़गवां ,23 नवम्बर 2021 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार का नाम आए और कोरिया पीछे रहे यह हो नहीं सकता, इसका एक उदाहरण कोरिया जिले के खड़गवां विकास खंड के उधनापुर से पैनारी सडक निर्माण कार्य की गुणवत्ता में स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि सब कुछ ठेकेदार के भरोसे छोड़ कर सरकारी अफसर निश्चिंत हो कर एसी का हवा खा रहे है लगातार शिकायतें होने के बावजूद हिलने डुलने तक को तैयार नहीं।
भारत सरकार ने 25 दिसम्बर 2000 को प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना की शुरुआत की थी। इस योजना का प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण इलाकों को 500 या इससे अधिक आबादी वाले (पहाड़ी और रेगिस्तानी क्षेत्रो में 250 लोगों की आबादी वाले गांव) सड़क सम्पर्क से वंचित गांवों को बारहमासी सड़कों से जोड़ना था। पीएमजीएसवाई के तहत निर्मित ग्रामीण सड़को में उचित तटबन्ध और जल निकासी होनी चाहिये। ये सोच सरकार सड़क का निर्माण करवाती है। इसके लिए विशेष रूप से ट्रेनिंग करा कर इंजीनयर तैयार किये पर अब सब नियम आदि को पानी में मिट्टी मिलाए जैसे कर अधिकारी ठेकेदार अपने विकास के लिए काम कर रहे हैं। इसी आधार पर अन्य विभागों को भी सडक निर्माण कार्य की जिम्मेदारी दी गई है जैसे लोक निर्माण विभाग को उधनापुर से पैनारी सड़क निर्माण कार्य को ठेकेदार के माध्यम से निमार्ण कार्य कराना जो पूर्णतया गुणवत्ता विहीन निर्माण कार्य की शिकायत स्थानीय ग्रामीणों ने सडक निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ है तब से किया जा रहा है मगर शिकायत के बाद भी किसी प्रकार की कार्यवाही नहीं होने से ग्रामीणों में काफी रोष है। स्थानीय ग्रामीणों में चर्चा है कि उधनापुर से पैनारी सड़क निर्माण कार्य करने वाली कंपनी की पहुंच सरकार के बड़े बड़े मंत्रीओ से होने के कारण इस सड़क की शिकायत पर शिकायत के बाद भी कार्यवाही नहीं हो रही है आखिर क्यों? उधनापुर से पैनारी सड़क निर्माण कार्य का भी वही हाल ठेकेदार भ्रष्टाचार कर के लाभ कमाने के चकर में गुणवत्ता विहीन कार्य कर रहे है और जिमेदार जाँच करने के बजाए कुर्सी पर बैठ एसी का हवा खा रहे। उधनापुर से पैनारी लंबाई 7.125 किलोमीटर अनुबंध क्रमांक 4–8/2020–21 कार्य के प्रारंभ करने की तिथि का बोर्ड में उल्लेख नहीं है और निर्माण कार्य की लागत 754.26 लाख और कार्य पूर्णता का समय 27/7/2021 है ठेकेदार मेसर्स बैजनाथ अग्रवाल सुरजपुर, कार्यपालन अभियंता आर के मेश्राम अंकित है और बोर्ड में किस योजना से सडक का निर्माण कार्य कराया जा रहा है ये कुछ भी अंकित नहीं है और सड़क का निर्माण तय मानक के आधार पर नहीं किया जा रहा। ठेकेदार ने सात किलोमीटर सड़क पर निर्माण कार्य किया जा रहा है इस सड़क पर निमित्त पुल में 20 एमएम गिट्टी का उपयोग कर पुल बनाना था मगर ठेकेदार ने 40 एमएम गिट्टी का उपयोग किया। यह गिट्टी सिर्फ डब्लुबीएम कार्य में मुरुम बिछाकर किया जाता है। ठेकेदार ने रेत, सीमेन्ट की मात्रा में भी बहुत घालमेल किया है। पुल में पानी का छिड़काव (क्यूरिंग) भी सही ढंग से नहीं किया है। पुल अभी से भरभराना शुरु हो गया है। ठेकेदार ने मुख्य रुप से अपना मुनाफा बढ़ाने सड़क को भ्रष्टाचार के आगे झोक दिया है जो जिमेदार अधिकारी के लिए जाँच का विषय है करना या ना करना उनकी मर्जी।
डायवर्सन रोड ही नहीं बनाया
रोड बनाने के पहले डायवर्सन बनाने के लिए भी राशि का आवंटन किया जाता है, लेकिन यहां पहले पुल पुलिया बनाया गया। ठेकेदार के द्वारा डायवर्सन रोड का निर्माण करना था, जो रोड बनने के पहले डायवर्सन रोड द्वारा ग्रामीणों को आवागमन में सुविधा हो सके। शासन के द्वारा निर्माण कार्य प्रारंभ होने से पहले डायवर्सन रोड बनाने की प्रक्रिया तय रहती है लेकिन इस सड़क पर पुल पुलिया का निर्माण किया गया है उक्त ठेकेदार नियम को ताक पर रखकर रोड का निर्माण कार्य करा रहा है। नियम के आधार पर सड़क निर्माण के लिए प्रथम चरण में 20-20 सेंटीमीटर में दो लेयर में मुरुम डालना अनिवार्य है। दो परत के मुरुम को पानी मारकर रोलर से दबाये जाने का भी प्रावधान है। मानक के आधार पर ठेकेदार की ओर से मुरुम नहीं डाला गया है। राहगीर ग्रामीणों ने बताया कि यह ठेकेदार पास की पहाडç¸यों से खोद कर मिट्टी डालकर काम किया है इनका हर कार्य स्तरहीन लग रहा है। आसपास से सिर्फ मिट्टी ही डाली जा रही है।
शिकायतकर्ता का आरोप
सरकारी निर्धारित मानकों की खुलेआम धज्जियां अधिकारियों की जानबूझ कर की जा रही अनदेखी से उड़ायी जा रही हैं। बहरहाल पुल पुलिया का घटिया निर्माण, सड़क पर अभी मुरुम का लेयर ही पड़ा है, जो प्रथम चरण के निर्माण में ही अपनी गुणवत्ता की पोल खोल रहा है। जहां काम हो रहा है, वहां भारी अनियमितताएं हैं, नियमों का उल्लंघन कर पुल-पुलिया का निर्माण किया गया है। इस गुणवत्ता विहीन निर्माण की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग क्षेत्र के ग्रामीणों द्वारा किया जा रहा है इस पूर्व में कई बार लिखित शिकायत की गई है मगर किसी प्रकार की कोई जाच नहीं हुई है अब देखना दिलचस्प होगा कि ठेकेदार की मनमानी पर प्रशासन और सरकार लगाम लगाती है अथवा उसके आगे आत्मसमर्पण करती है ? जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है?
जिम्मेदार ने साधी चुपी
लोक निर्माण विभाग के सड़क निर्माण करने वाले अधिकारियों से इस संबंध में बात करने की कोशिश की गयी तो वे कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं हुए। ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा है कि जिन अधिकारियों की मॉनिटरिंग में सडक़ का निर्माण कराया जाना है, वह मौके पर ही नहीं रह रहे हैं।