श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए छठ घाटों पर समिति द्वारा की गई है विशेष व्यवस्था
अम्बिकापुर 09 नवम्बर 2021 (घटती-घटना)। लोक आस्था के चार दिवसीय महापर्व के दूसरे दिन मंगलवार को छठ व्रतियों ने खरना किया। इस दौरान खीर का प्रसाद घरों में बनाया गया। खरना के बाद व्रतियों का 36 घंटे के निर्जला उपवास शुरू हो गया। बुधवार की शाम अस्ताचलगामी सूर्य को अर्ध्य दिया जाएगा। वहीं गुरुवार की सुबह उगते सूर्य को अर्ध्य देने के साथ ही छठ पर्व का समापन होगा।
कोरोना काल के कारण पिछले वर्ष काफी कम लोगों ने छठ का व्रत किया था। कोरोना से बचाव के लिए शासन द्वारा छठ घाटों पर व्रत करने से प्रतिबंध लगा दिया गया था। बहुत कम की संख्या में लोगों ने अपने अपने घरों में ही व्रत कर भगवान भास्कर को अनुष्ठान किया था। इस कारण इस वर्ष पिछले वर्षों की तुलना में काफी लोगों छठ व्रत रखा है। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए इस वर्ष छठ घाटों पर समिति द्वारा विशेष व्यवस्था की गई है। शहर व आसपास के छठ घाटों को साफ सफाई कराई गई है। ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की कोई परेशानी ना हो। श्रद्धालुओं ने सोमवार को पूरे दिन निर्जला उपवास के बाद शाम को भगवान सूर्य को जल अर्पित कर घाट बंधन का रस में पूरी किया। इसके बाद व्रतियों ने घरों में पहुंचकर खीर पूरी का प्रसाद तैयार कर ग्रहण किया। इसके बाद व्रतियों द्वारा पूरी निष्ठा के साथ खरना का प्रसाद लोगों के बीच वितरण किया गया।
खीर बनाने शुद्धता का रखा पूरा ध्यान
खीर प्रसाद बनाने के लिए नदियों और कुएं के पानी इस्तेमाल किया। नये चूल्हे पर आम की लकड़ी को जलावन में इस्तेमाल करते हुए पीतल के बर्तन में खरना के लिए प्रसाद बनाया गया। प्रसाद बनाने के दौरान छठ व्रतियों के साथ ही घर की अन्य महिलाओं द्वारा छठ गीत गाये जाते रहे। प्रसाद के लिए खीर व रोटी पकाई गई। शाम ढलते ही छठ व्रतियों ने छठ गीतों के बीच प्रसाद ग्रहण किया। वहीं गुरुवार की शाम अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देकर छठव्रती परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करेंगे।
छठव्रतियों में दिखा उत्साह
पूरे दिन छठ व्रती अपने अपने कामों में व्यस्त रहें। साफ सफाई व गेहूं को जाते पिसा गया। जाते के पिसे आंटे से ही छठ का प्रसाद ठेंकवा बनाया जाता है। मंगलवार को छठव्रतियों ने घाटों पर जाकर स्नान किया और घाट बंधन का किया गया। इसके बाद घर जाकर खीर पूरी प्रसाद बना कर ग्रहण किया। प्रसाद बनाने के दौरान छठ व्रतियों ने छठ गीत गाते रहे।