पटना @ 187 गवाहों ने चार गुनहगारों को पहुंचाया फांसी के फंदे तक

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पटना,01 नवम्बर 2021(ए)। पटना के गांधी मैदान में पीएम मोदी की सभा के दौरान ब्लास्ट करके छह लोगों को मौत और 89 लोगों को बुरी तरह जख्‍मी कर देने के नौ गुनहगारों में से चार को फांसी की सजा, दो को उम्र कैद, दो को 10-10 साल और एक के लिए सात साल की सजा एनआईए कोर्ट ने मुकर्रर की है। गुनहगारों को सजा के इस मुकाम तक पहुंचाने में एनआईए को आठ साल लग गए। इस दौरान कोर्ट में एनआईए ने 187 गवाह पेश किए।
27 अक्टूबर 2013 को गांधी मैदान में नरेन्द्र मोदी की हुंकार रैली में इंडियन मुजाहिदीन के जिहादियों ने सीरियल ब्लास्ट किए थे। इन धमाकों ने सिर्फ पटना नहीं पूरे बिहार और देश को दहला कर रख दिया था। धमाकों में छह बेगुनाह लोगों की मौत हो गई थी जबकि 89 लोग घायल हुए थे। एनआईए ने ब्लास्ट मामले की जांच शुरू की। इसके पहले मामले में तीन केस दर्ज किए गए। बाद में तीनों केसों को मिलाकर एक केस बनाया गया। एनआईए की जांच और गुनहगारों को सजा के अंजाम तक पहुंचाने में सबसे अधिक योगदान इस केस के 187 गवाहों का रहा। इन गवाहों ने अदालत की कार्यवाही के दौरान धमाकों की साजिश और 27 अक्टूबर 2013 को गांधी मैदान में हुए घटनाक्रम की कडç¸यों को जोड़ा और सच सामने ला दिया। इतनी गवाहियों के सामने गुनहगार टिक न सके। अदालत के सामने उनका गुनाह उजागर हो गया और एक नवम्बर 2021 को आखिरकार अदालत ने उनमें से चार को फांसी, दो को उम्रकैद, दो को 10-10 साल और एक को 7 साल की सजा सुना दे दी।
एनआईए ने 11 जिहादियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। इस मामले में एक भी आरोपी को जमानत नहीं मिली। सभी आरोपी बेऊर जेल में बंद थे। पिछले 27 अक्‍टूबर को यानी घटना के ठीक आठ साल बाद उसी तारीख पर एनआईए कोर्ट ने नौ आरोपियों को दोषी करार दिया था। एक नवम्बर की सुबह सभी नौ आरोपियों को सजा सुनने के लिए बेऊर जेल से अदालत लाया गया। यहां शाम तीन बजे के बाद अदालत ने आरोपियों को सजा सुनाई।
पटना में दो रांची में एक केस हुआ था दर्ज
इंडियन मुजाहिदीन के जिहादियों ने नरेन्द्र मोदी की हुंकार रैली में पटना के गांधी मैदान में 27 अक्टूबर 2013 को सीरियल बम ब्लास्ट किया था। इसमें 6 लोगों की मौत हो गई थी और 89 लोग घायल हुए थे। घटना उस समय हुई जब रैली में मोदी भाषण देने आने वाले थे। इस घटना को लेकर पटना में दो और झारखंड के रांची के कोतवाली थाने में एक केस दर्ज किया गया था। पटना पुलिस ने पहली एफआईआर पटना जंक्शन के जीआरपी थाने में कांड संख्या 361/2013 और गांधी मैदान थाने में कांड संख्या 451/2013 दर्ज की। झारखंड पुलिस ने कोतवाली (हिंदपिडी) थाने में 985/2013 कांड दर्ज किया।
एनआईए ने पटना जंक्शन के प्लेटफार्म 10 के नजदीक शौचालाय में हुए ब्लास्ट पर पटना जीआरपी थाना में दर्ज केस को 1 नंवबर 2013 को आरसी 10/ 2013, गांधी मैदान में हुए सीरियल बलास्ट मामले में गांधी मैदान थाना में दर्ज मामले को आरसी 1/2013 और आंतकी घटना को अंजाम देने के लिए साजिश रचने, विस्फोटक व अन्य प्रतिबंधित सामग्री इकट्ठा कर देश के विरुद्ध लड़ाई छेड़ने की साजिश रचने को लेकर रांची में दर्ज केस को आरसी 12/ 2013 दर्ज कर जांच शरू की थी। एनआईए ने इन तीनों एफआईआर को मिलाकर एक एफआईआर पटना जंक्शन जीआरपी थाना कांड संख्या 361/2013 सह एनआईए आरसी 10/ 2013 बनाई और जांच को अंजाम तक पहुंचाया।
कोर्ट में कब क्या हुआ
14 जुलाई 2014 को दस के खिलाफ आरोप गठित
02 नंवबर 2017 तक एनआईए ने अभियोजन गवाह पेश किये
23 नंवबर 2017 से 12 दिसंबर 2017 तक दस आरोपितों का कोर्ट में बयान दर्ज
02 जनवरी 2018 से 17 मई 2018 तक आरोपितों को अपने बचाव में साक्ष्य देने को एनआईए कोर्ट ने समय दिया
(आरोपितों ने अपने बचाव में एक भी साक्ष्य या गवाह पेश नहीं किया)
04 जून 2018 से 30 सितंबर 2021 तक दोनों पक्षों की बारी-बारी से बहस हुई
06 अक्टूबर 2021 को लिखित बहस एनआईए कोर्ट में दायर की गई
27 अक्टूबर 2021 को एनआईए कोर्ट ने इस कांड में फैसला देने की तिथि निर्धारित की
एक नवम्बर 2021 को एनआईए कोर्ट ने नोमान अंसारी, हैदर अली उर्फ अब्दुल्लाह उर्फ ब्लैक ब्यूटी, मो मोजिबुल्लाह अंसारी और इम्तियाज अंसारी उर्फ आलम को फांसी की सजा दी है।
उमर सिद्दीकी और अजहरूद्दीन को उम्रकैद की सजा सुनाया है। इनके अलावा कोर्ट ने अहमद हुसैन और फिरोज असलम को 10-10 साल और फिरोज आलम उर्फ पप्पू को सात साल की सजा सुनाया है।


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